उत्तम आकिंचन धर्म का सार, आनंद का भंडार है- पंडित अनंतकुमार विश्वंभरशास्त्री, महाराष्ट्र “ममत्व के परित्याग को आकिंचन कहते हैं।” साकेत नगर में “क्षमावाणी महापर्व” का होगा आयोजन।

आकिंचन ब्रम्हचर्य धर्म दस सार है!
चहुँगति दुखते काढी मुकती करतार है!!
“उत्तम आकिंचन धर्म का सार, आनंद का भंडार है” उक्त उद्गार श्री 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर, साकेत नगर में धर्मोपदेश देते हुए जैन समाज के विद्वान पंडित अनंतकुमार विश्वंभरशास्त्री जी ने व्यक्त किये, उन्होंने आगे कहा “उत्तम आकिंचन धर्म का असली सार मन से “मेरा और मैंने किया” की भावना को पूरी तरह मिटा देना है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस संसार में हमारी आत्मा के अलावा अन्य कोई भी भौतिक वस्तु, संपत्ति, शरीर या रिश्ता हमारा अपना नहीं है। सच्ची आकिंचनता केवल बाहरी चीज़ों को छोड़ने में नहीं, बल्कि उनके प्रति मन के भीतर छिपे गहरे लगाव, लालच और अहंकार को खत्म करने में है। जब इंसान चीज़ों का उपयोग तो करता है लेकिन उनसे अपना दिल नहीं लगाता, तब वह खोने के डर और मानसिक तनाव से आज़ाद होकर परम शांति को प्राप्त करता है। उत्तम आकिंचन धर्म को अपनाने का अर्थ घर-बार छोड़ना नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं, आसक्ति (मोह) और अहंकार को कम करना है। आकिंचन धर्म 24 प्रकार के परिग्रह के त्याग पूर्वक होता है। उत्तम आकिंचन धर्म के पालन से मोहनीय कर्म का नाश होकर जीव अनंत काल के लिए सुखी हो जाता है।”
हेमलता जैन ‘रचना’ ने बताया कि मंदिर जी में पर्युषण पर्व के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में “बूझो तो जाने” प्रतियोगिता में महिला, परुष और बाल-वर्ग से दशलक्षण धर्म पर आधारित प्रश्नोत्तरी आयोजित की गयी। वहीं आज चँवर झुलाओ तथा लाडू सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा। समस्त प्रतियोगितायें श्रीमती डॉ. पारुल जैन के द्वारा मंच सञ्चालन तथा मंच व्यवस्था श्रीमती डॉ. प्रज्ञा जैन के नेतृत्व में संपन्न हो रही हैं वहीं संगीतमय पूजन में श्रीमान डॉ. महेंद्र जैन रेल्वे, पंडित अमन जैन अपना योगदान दे रहे हैं। अन्य व्यवस्थाओं में प्रकाश चंद जैन, तारा चंद जैन, शरद जैन, देवेश जैन, नीलेश जैन सहित मंदिर कमेटी के अन्य सभी सदस्यों की सहभागिता से पर्युषण पर्व सानंद, सुचारु रूप से संपन्न हो रहे हैं। साकेत नगर जैन मंदिर के अध्यक्ष नरेंद्र टोंग्या ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान जिन-जिन साधर्मी भाई-बहनों ने लगातार 5 अथवा 5 से अधिक उपवास किए हैं उन सभी के तप, त्याग, संयम एवं आत्मशुद्धि की भावना को नमन करते हुए 26 सितंबर, शनिवार को “पारणा समारोह” आयोजित किया जायेगा वहीं पर्व की समाप्ति पर प्रतिवर्षानुसार “क्षमावाणी महामहोत्सव” का आयोजन साकेत नगर जैन मंदिर में रविवार 27 सितम्बर को संपन्न होगा जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में “माननीया श्रीमती कृष्णा गौर जी, राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार” का मंगल सानिध्य साकेत नगर जैन समाज को प्राप्त होगा।

