भोपाल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट का स्वागत; क्रेडाई ने मुख्यमंत्री को सौंपा जमीन पर काम का शोध-आधारित रोडमैप

नए भोपाल के लिए पहले 5 वर्षों का बजट, नागरिक भागीदारी, बेहतर संपर्क और प्रकृति-सुरक्षा साथ रखने पर जोर
भोपाल, 26 सितंबर 2026। बहुप्रतीक्षित भोपाल विकास योजना 2047 का प्रारूप प्रकाशित होने पर क्रेडाई भोपाल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया है। शनिवार दोपहर 2:45 बजे मुख्यमंत्री निवास पर हुई भेंट के दौरान क्रेडाई की ओर से अध्यक्ष मनोज सिंह मीक ने शोध-आधारित नीति-पत्र ‘भोपाल मास्टर प्लानः ड्राफ्ट से जमीन पर काम तक’ मुख्यमंत्री को सौंपा।
क्रेडाई ने प्रारूप प्रकाशन को राजधानी के नियोजित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना है। मुख्यमंत्री और उच्चस्तरीय शासन-प्रशासन के इस प्रयास का स्वागत करते हुए संस्था ने योजना को नागरिक सुविधाओं, रोजगार, निवेश और पर्यावरणीय सुरक्षा से जोड़ने वाला क्रियान्वयन कार्यक्रम प्रस्तुत किया है।
मनोज सिंह मीक द्वारा क्रेडाई और ‘कमाल का भोपाल’ के अंतर्गत तैयार नीति-पत्र में कहा विकास योजना केवल भूमि-उपयोग के रंग और निर्माण के नियमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसमें सवाल रखा गया है कि प्रस्तावित सड़क कब बनेगी, उसके लिए जमीन कैसे उपलब्ध होगी, पानी–सीवर और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था कौन करेगा, बजट कहाँ से आएगा और नागरिक को काम की प्रगति कैसे पता चलेगी।
पॉलिसी रिसर्च पेपर में भोपाल के पुराने योजना-अभिलेख, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की टिप्पणियाँ, मध्यप्रदेश के 5 शहरों तथा अन्य प्रमुख नगरों के नियोजन दस्तावेजों का अध्ययन शामिल है। सरकार के विचारार्थ 10 नीति-विकल्प, प्रारूप की समीक्षा के लिए 15 प्रश्न और विभिन्न शहरों के अध्ययन से विकसित 50 तुलनात्मक सिद्धांत दिए गए हैं। ये किसी दूसरे राज्य के नियमों को भोपाल में सीधे लागू करने की अनुशंसा नहीं, स्थानीय कानून और जरूरतों के अनुसार परीक्षण का आधार हैं।
मुख्य प्रस्ताव है कि नई योजना के साथ पहले 5 वर्षों का परियोजना-वार बजट, जिम्मेदार संस्था, भूमि प्राप्ति अथवा पुनर्गठन का वैधानिक रास्ता और वार्षिक कार्य-कार्यक्रम स्पष्ट हो। पुरानी सड़कों, आरक्षित भूमि, सेवाओं और विभागीय अभिलेखों के मिलान के लिए 100-दिवसीय प्रशासनिक कार्यक्रम सुझाया गया है। यह नागरिकों की वैधानिक आपत्ति और सुनवाई की अवधि का विकल्प नहीं होगा।
नीति-पत्र में आउटर और इनर रिंग रोड की अलग भूमिकाएँ, दक्षिणी औद्योगिक क्षेत्र से विमानतल तक तेज व भरोसेमंद पहुँच, उत्तर में विमानतल-संगत बड़ा कार्गो हब तथा दक्षिण में रेल–राजमार्ग आधारित लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की व्यवहार्यता पर जोर है। भौंरी की शिक्षा–नॉलेज–एआई सिटी, भेल की संभावित अतिरिक्त भूमि, आवास, कौशल और बिजली–पानी की जरूरतों को भी अलग अधिकार एवं स्वीकृति-प्रक्रियाओं के साथ देखने का सुझाव है।
झीलों, जलग्रहण क्षेत्रों, प्राकृतिक निकास, पहाड़ियों और विरासत की सुरक्षा को विकास की बुनियाद माना गया है। पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं और उपचारोत्तर देखभाल के अवसरों के साथ वरिष्ठ नागरिकों, किरायेदारों, छोटे कारोबारियों, श्रमिकों और कम आय वाले परिवारों की जरूरतों को भी स्थान दिया गया है।
विभागीय प्रेस नोट के अनुसार नया प्रारूप 1,016.90 वर्ग किलोमीटर निवेश क्षेत्र, 254 ग्राम और 45 लाख की आकलित आबादी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें 51 किलोमीटर के ग्रोथ कॉरिडोर, शिक्षा–नॉलेज–एआई सिटी, विमानतल और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों के संपर्क तथा डिजिटल ट्विन आधारित निगरानी की परिकल्पना है। इन प्रस्तावों का वास्तविक लाभ भूमि, वित्त, सेवा-क्षमता और चरणबद्ध क्रियान्वयन से तय होगा।
मनोज मीक 2006 से नई विकास योजना लागू करने का संघर्ष कर रहे हैं। क्रेडाई की पूर्ववर्ती पैरवी में 21 नवंबर 2025 को पीएमओ में पंजीकृत समग्र विकास निवेदन और 14 मई 2026 का नागरिक विमर्श भी शामिल हैं। आज सौंपा गया नीति-पत्र उसी सतत शोध और रचनात्मक संवाद को आगे बढ़ाता है। प्रारूप का स्वागत उसके प्रत्येक प्रावधान की बिना परीक्षण स्वीकृति नहीं है; अगला चरण नागरिक हित में दस्तावेज, मानचित्र और विकास नियमों पर प्रमाण-आधारित सुझाव तैयार करने का है।
जारीकर्ता: सचिवालय, क्रेडाई भोपाल
शोध एवं नीति-पत्र: मनोज मीक | अध्यक्ष, क्रेडाई भोपाल | फाउंडर, कमाल का भोपाल



