बीयू विज्ञान मेले में आरएनटीयू का दबदबा, शैक्षणिक संस्थानों की श्रेणी में मिला प्रथम पुरस्कार, बच्चों ने प्रयोगों से समझा विज्ञान, नुक्कड़ नाटक से जाना भारत का ज्ञान
बीयू विज्ञान मेले में आरएनटीयू के स्टॉल ने जीता पहला पुरस्कार, बच्चों ने टेलीस्कोप से देखा आसमान और फिंगरप्रिंट तकनीक से समझा फॉरेंसिक साइंस

भोपाल। राजधानी स्थित बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में आयोजित विज्ञान मेले में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू) के स्टॉल को शैक्षणिक संस्थानों की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार मिला है। 22 से 26 सितंबर तक लगे इस स्टॉल पर विज्ञान को केवल प्रदर्शित करने के बजाय विद्यार्थियों को उसे देखने, समझने और गतिविधियों के माध्यम से अनुभव करने का अवसर दिया गया। इसके साथ ही टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के विद्यार्थियों ने भारत में विज्ञान के योगदान को लेकर नुक्कड़ नाटक का मंचन भी किया।
आरएनटीयू के सेंटर फॉर साइंस कम्युनिकेशन विभाग, फॉरेंसिक साइंस विभाग, और फार्मेसी डिपार्टमेंट की टीम ने विद्यार्थियों को मेले में विज्ञान से जुड़े मॉडल के बारे में समझाया। स्टॉल में मौजूद डॉ. प्रीति सिंह, दुर्गा पांडेय और भूपेंद्र सिंह ने बच्चों को रोजमर्रा के जीवन में विज्ञान के इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी दी।
टेलीस्कोप से खगोलीय अवलोकन रहा आकर्षण का केंद्र
आरएनटीयू के स्टॉल पर पहुंचने वाले विद्यार्थियों के लिए सबसे खास आकर्षणों में टेलीस्कोप से खगोलीय अवलोकन रहा। आसमान और अंतरिक्ष से जुड़ी जिज्ञासाओं को करीब से समझने के लिए विद्यार्थियों ने टेलीस्कोप के माध्यम से अवलोकन किया। वहीं, फॉरेंसिक विज्ञान की झलक भी स्टॉल का खास आकर्षण रही। विद्यार्थियों को फिंगरप्रिंट की पहचान और उसे निकालने की प्रक्रिया का डेमो दिया गया, जिससे उन्होंने जाना कि अपराध की जांच में वैज्ञानिक तकनीकों का किस तरह इस्तेमाल किया जाता है।
इसके अलावा स्टॉल पर विज्ञान से जुड़े मॉडल, प्रयोग और इंटरैक्टिव गतिविधियां आयोजित की गईं। स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों ने इनमें उत्साहपूर्वक भाग लिया। स्टॉल पर आने वाले विद्यार्थियों की रुचि केवल प्रदर्शनों को देखने तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे गतिविधियों के बारे में सवाल करते और उन्हें समझने में भी रुचि दिखाते नजर आए। आरएनटीयू ने मेले में विज्ञान को अनुभव और संवाद से जोड़ने का प्रयास किया।
मेले में नुक्कड़ नाटक का भी किया गया मंचन
इसी क्रम में 24 सितंबर को मेले में ‘भारत का ज्ञान और भारत का विज्ञान’ विषय पर नुक्कड़ नाटक का मंचन भी किया गया। नाटक की शुरुआत एक ऐसे युवा पात्र ‘मॉडर्न मोंटू’ से होती है, जिसे लगता है कि भारत का विज्ञान में कोई बड़ा योगदान नहीं रहा। दादी मां के साथ संवाद के जरिए उसकी यह धारणा बदलती है। इसके बाद आर्यभट, सुश्रुत और योगिनी जैसे पात्र सामने आते हैं और भारतीय गणित, खगोल, चिकित्सा तथा योग परंपरा की जानकारी संवाद और गीतों के माध्यम से देते हैं।
नाटक की खास बात यह रही कि इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान के विरोध में नहीं रखा गया। अंतिम हिस्से में पुराने ज्ञान की नींव पर आधुनिक विज्ञान के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया गया। इस तरह प्रस्तुति ने विद्यार्थियों के सामने विज्ञान और ज्ञान को केवल किताबों के विषय के रूप में नहीं, बल्कि हमारी वैज्ञानिक विरासत और वर्तमान समय से जुड़े विषय के रूप में रखने की कोशिश की।
पुरस्कार मिलना रचनात्मक सोच का परिणाम: कुलगुरु
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. रवि प्रकाश दुबे ने कहा कि विज्ञान मेले में प्रथम पुरस्कार मिलना विद्यार्थियों और शिक्षकों की रचनात्मक सोच का परिणाम है। वहीं, रजिस्ट्रार डॉ. संगीता जौहरी ने कहा कि RNTU के स्टॉल पर विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी इस बात का संकेत है कि जब विज्ञान को प्रयोग और अनुभव से जोड़ा जाता है तो सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।
22 से 26 सितंबर तक चले विज्ञान मेले में विश्वविद्याल की सहभागिता ने विज्ञान को मॉडल और प्रदर्शनी से आगे ले जाकर अवलोकन, प्रयोग, संवाद और मंचन से जोड़ने का प्रयास किया। शैक्षणिक संस्थानों की स्टॉल श्रेणी में मिला प्रथम पुरस्कार इसी सहभागिता का प्रमुख परिणाम रहा। विज्ञान मेेले के समापन कार्यक्रम में डॉ. सीवी रमन यूनिवर्सिटी, खंडवा के रजिस्ट्रार डॉ. अनिल तवारी और आरएनटीयू के उपकुलसचिव समीर चौधरी भी उपस्थित रहे।



