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सबको मिले रामचंद्र जैसा भाई: पुलिस नहीं खोज पाई ट्रक का सुराग, तीन माह में खुद खोजा भाई को कुचलने वाले का पता

भाई की मौत का दर्द और उसे टक्कर मारकर भागने वाले वाहन की तलाश। एक तरफ परिवार अपने सदस्य को खोने के गम से जूझ रहा था, तो दूसरी तरफ हादसे के लिए जिम्मेदार ट्रक का पता लगाने की चुनौती थी। हादसे के वक्त मृतक का भाई रामचंद्र भी कुछ दूरी पर दूसरी मोटरसाइकिल से चल रहा था। उसने अपनी आंखों के सामने भाई को खो दिया, लेकिन हार नहीं मानी। शुरुआत में वह ट्रक का सही नंबर नहीं बता पाया। पुलिस भी जांच के दौरान इसका पता नहीं लगा सकी। आखिरकार रामचंद्र ने खुद जानकारी जुटाई और करीब तीन महीने बाद ट्रक का सही नंबर पुलिस को बताया।कोर्ट ने पुलिस पर उठाए सवाल
साकेत कोर्ट स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी के बजाय मृतक के भाई के लगातार प्रयासों से हादसे में शामिल वाहन की पहचान सामने आई।गलत नंबर के कारण उठे सवाल
मामला 25 जून 2023 का है। सुबह करीब 7:30 बजे सुनील मोटरसाइकिल से हरियाणा के सुनपेड़ गांव जा रहे थे। उनका भाई रामचंद्र भी दूसरी मोटरसाइकिल पर साथ चल रहा था। फरीदाबाद के बाईपास पर जाजरू मोड़, सेक्टर-58 के पास एक कंटेनर ट्रक ने सुनील की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। हादसे में उनकी मौत हो गई और ट्रक चालक मौके से भाग गया। शुरुआत में रामचंद्र ने पुलिस को ट्रक का नंबर एचआर-73बी-1661 बताया। हालांकि, परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में इस नंबर का कोई वाहन नहीं मिला। बाद में 13 सितंबर 2023 को रामचंद्र ने शपथपत्र देकर ट्रक का नंबर एचआर-73ए-3196 बताया। पुलिस ने जांच के बाद इस ट्रक के चालक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।बारिश में ट्रक का नंबर पढ़ पाना आसान नहीं
अदालत ने माना कि बारिश के दिन पीछे से आ रहे ट्रक का नंबर ठीक से पढ़ पाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए शुरुआत में गलत नंबर बताए जाने भर से रामचंद्र की गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता। वहीं, बीमा कंपनी ने ट्रक के नंबर में अंतर को लेकर सवाल उठाए। उसने आशंका जताई कि मुआवजा पाने के लिए परिवार, वाहन मालिक और पुलिस ने मिलीभगत से दूसरे वाहन को मामले में शामिल किया। हालांकि, अदालत ने कहा कि कंपनी इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं दे सकी।परिवार को मिलेगा 29.88 लाख रुपये मुआवजा
अदालत ने सुनील की पत्नी सीमा, तीन बच्चों और मां माया को कुल 29,88,380 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इस राशि पर याचिका दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक नौ प्रतिशत सालाना ब्याज भी मिलेगा। पत्नी को करीब 17.88 लाख रुपये, तीनों बच्चों को तीन-तीन लाख रुपये और मां को तीन लाख रुपये दिए जाएंगे। बच्चों की राशि उनके बालिग होने तक सावधि जमा में रखी जाएगी। बीमा कंपनी को 45 दिन के भीतर मुआवजा जमा करने का निर्देश दिया गया है।

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