समय पर जरूरी उच्च पदनाम, कई विभागों में नहीं मिला चतुर्थ समयमान
अनेक कर्मचारी हो गए रिटायर, पीड़ा बताई कि अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान



भोपाल 15 जुलाई। मध्य प्रदेश में सरकारी सेवकों ने एक बार फिर उच्च पदनाम की वकालत की है। कर्मचारियों का कहना है कि अनेक विभाग ऐसे हैं। जहां उच्च पद नाम की प्रतीक्षा करते-करते सेवक रिटायर हो रहे हैं। शिक्षा विभाग में लिपिक सहित शिक्षकों की श्रेणियां भी इसकी प्रतीक्षा कर रही हैं। सहायक और उच्च शिक्षकों को अभी तक पदनाम नहीं दिया गया। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार कई विभागों में सरकारी सेवक चतुर्थ समयमान का इंतजार कर रहे हैं।
– समयमान एवं उच्च पद नाम दोनों की है जरूरत- डीके यादव-
मध्य प्रदेश राजपत्रित अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डीके यादव कहते हैं कि चतुर्थ समयमान और उच्च पदनाम दोनों की जरूरत है। सरकार को सभी विभागों से रिपोर्ट लेना चाहिए कि इन दोनों ही बिंदुओं की क्या प्रगति है। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि केन्द्र के समान डीए भी जरूरी है। अब समय है कि
सभी को एकजुट होकर सरकार से सबसे पहले संवाद करना चाहिए। संवाद ऐसा हो जिससे कि समस्या का सार्थक हल निकल सके। उन्होंने कहा है कि आंदोलन कोई विकल्प नहीं है। अगर ठोस वार्ता से काम चलता है तो इस विषय में तत्काल सभी संगठनों को एकजुट हो जाना चाहिए। श्री यादव का कहना है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री की मंशा है कि हर कर्मचारी संवर्ग को सुविधा मिलना चाहिए। श्री यादव का कहना है कि पिछले महीने मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई थी। तब उनके समक्ष गैर राज प्रशासनिक सेवा के अफसरों को आईएएस अवार्ड सहित अन्य मांगों पर चर्चा हुई थी। डीके यादव कहते हैं कि मुख्यमंत्री सहज और सरल स्वभाव के धनी हैं। सभी समस्याओं को वह गंभीरता से सुनते हैं और उनके निराकरण की दिशा में संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हैं।
– समय पर पदनाम का सभी को मिलना चाहिए लाभ- संतोष गांधी-
संगठन के महासचिव संतोष गांधी कहते हैं कि सिस्टम में सुधार होना बहुत जरूरी है। जब सरकार ने नियम बनाया है कि सभी विभागों में एक मुश्त सरकारी सेवकों को उच्च पदनाम दिया जाएगा तो फिर इतना विलम्ब क्यों किया जा रहा है। श्री गांधी का कहना है कि अनेक विभागों में कर्मचारी आशा लगाए हैं। इनमें से अनेक का रिटायरमेंट हो चुका है। ऐसे कर्मचारी प्रतीक्षा करते रहे फिर भी उन्हें समय पर उच्च पद नाम का लाभ नहीं मिल पाया है। श्री गांधी का कहना है कि इस विषय में सरकार को विभागों में सक्षम अफसरों के लिए टाइम लिमिट निर्धारित करना चाहिए। जिस विभाग में इस कार्य के प्रति लापरवाही हो रही है। वहां सक्षम अधिकारी से जवाब लेना चाहिए। वे कहते हैं कि अनदेखी के कारण कर्मचारी सालों से लंबा आर्थिक नुकसान उठाते चले आ रहे है। जिसकी भरपाई होना अब संभव नहीं दिख रही है।



