धरातल पर दिखे परिवर्तन : – प्रो. सी.सी. त्रिपाठी
एनआईटीटीटीआर भोपाल में राजभाषा समीक्षा बैठक संपन्न हिंदी को प्रशासनिक दक्षता से जोड़ने की पहल

एनआईटीटीटीआर, भोपाल में राजभाषा प्रकोष्ठ की समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता माननीय निदेशक प्रो. सी.सी. त्रिपाठी द्वारा की गयी। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार एवं उपयोग के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई। इस अवसर पर प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी और भारतीय संस्कृति का गहरा संबंध है—हिंदी साहित्य और कला ने भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया है, इसने पारंपरिक मूल्यों को संजोया है और राष्ट्रीय पहचान को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है; अतः हिंदी के प्रयोग से न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती प्रदान करेगा। राजभाषा कार्य धरातल पर क्रियान्वित कर संस्थान में एक सकारात्मक परिवर्तन लाया जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे कार्यालयीन कार्यों में अधिकाधिक हिंदी का प्रयोग करें और इसे व्यवहारिक बनाएं। इसी क्रम में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एनआईटीटीटीआर भोपाल के पुस्तकालय में विज्ञान, अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी की पुस्तकों के साथ-साथ समृद्ध हिंदी साहित्य भी उपलब्ध है, जिसे पढ़कर कर्मचारी न केवल अपनी भाषा दक्षता बढ़ा सकते हैं, बल्कि पढ़ने की आदत भी विकसित कर सकते हैं। बैठक में राजभाषा विभाग के समन्वयक प्रो. पी. के पुरोहित ने राजभाषा कार्यों की दिशा में अब तक की प्रगति, उपलब्धियों एवं भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। बैठक में, अधिष्ठाता प्रशासन आर.के दीक्षित, राजभाषा अधिकारी मेजर निशांत ओझा, प्रशासनिक अधिकारी श्री गौतम कुमार, सचिव श्री संजय त्रिपाठी, श्रीमती बबली चतुर्वेदी सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर राजभाषा कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कर्मचारियों को सम्मानित किए जाने की भी घोषणा की गई। बैठक के समापन पर संस्थान की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएँ एवं प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी, जिससे एक सशक्त राजभाषा संस्कृति का निर्माण संभव हो सके।