
सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है, जो हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनती है। आंकड़ों से पता चलता है कि युवाओं की बड़ी आबादी भी इस खतरे की जद में है। कैंसर क्यों बढ़ता जा रहा है? जब भी आप इस सवाल का जवाब ढूंढते हैं तो सबसे पहले लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी को मुख्य तौर पर जिम्मेदार पाया जाता है। कई अध्ययन बढ़ते प्रदूषण, रसायनों के अधिक संपर्क और धूम्रपान-शराब की आदत को भी इसकी वजह मानते हैं।
हालांकि अब वैज्ञानिकों की टीम ने कैंसर के खतरों को लेकर अध्ययन में बड़ा खुलासा किया है। चीन के वैज्ञानिकों की एक टीम ने बताया है कि जो लोग अकेलेपन का शिकार हैं, जिनका सोशल कनेक्शन यानी लोगों से मिलना-जुलना कम होता है, ऐसे लोगों में भी समय के साथ कैंसर होने का खतरा अधिक हो सकता है।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ये खतरा ज्यादा देखा जा रहा है। विशेषज्ञों ने कहा अकेलेपन और कैंसर को कनेक्शन से 95% से अधिक लोग अनजान हैं।
तो अगर आप भी अकेलेपन से जूझ रहे हैं तो सावधान हो जाइए। ये आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है।
अकेलापन और इसके कारण सेहत को होने वाले खतरों को लेकर पहले के भी कई अध्ययनों में अलर्ट किया जाता रहा है। कई स्वास्थ्य संगठन इसे तेजी से उभरती महामारी के रूप में भी देखते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में बताया गया था कि दुनिया का हर छठा व्यक्ति अकेलेपन का शिकार है, ये स्थिति खामोश महामारी का रूप लेती जा रही है।
- अमेरिकी विशेषज्ञों ने कहा कि इसके घातक दुष्प्रभाव एक दिन में 15 सिगरेट पीने के बराबर हैं।
- अकेलेपन के कारण डिमेंशिया जैसी गंभीर समस्या विकसित होने का जोखिम 50% बढ़ने का खतरा रहता है।
- कोरोनरी आर्टरी डिजीज या स्ट्रोक होने का जोखिम 30% तक बढ़ जाता है।
- इतना ही नहीं अकेलेपन को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं जैसे स्ट्रेस से लेकर डिप्रेशन तक के लिए बड़ा कारण माना जाता रहा है।
अब विशेषज्ञों ने बताया है कि अकेलेपन के कारण कई प्रकार के जानलेवा कैंसर होने का भी जोखिम बढ़ जाता है, जिसको लेकर सभी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
- इसके लिए 35,000 से ज्यादा वयस्कों के डेटा को एनालाइज किया। इसमें पता चला कि जो लोग सोशली आइसोलेटेड रहते हैं, उन्हें कैंसर होने का खतरा ज्यादा हो सकता है।
- हालांकि विशेषज्ञों ने ये भी कहा है कि सिर्फ अकेलापन ही रिस्क बढ़ाने वाला नहीं होता है।
- अकेलेपन के साथ इनकम, लाइफस्टाइल की आदतें और इन्फ्लेमेशन जैसे फैक्टर्स भी मिलकर इस खतरे को कई गुना तक बढ़ाने वाले हो सकते है।
विशेषज्ञों ने कहा, हेल्थ पॉलिसी के जरिए सोशियो-इकोनॉमिक चुनौतियों, खराब लाइफस्टाइल और मेंटल हेल्थ समस्याओं में सुधार पर ध्यान दिया जाए तो ऐसे लोगों में कैंसर का रिस्क कम करने में मदद मिल सकती है।
अकेले रहने वालों में कैंसर का जोखिम अधिक – फोटो : Adobe stock
अध्ययन में क्या पता चला?
इस अध्ययन के लिए 38-73 साल की उम्र के 354,537 प्रतिभागियों के डेटा को शामिल किया गया। सभी लोग कैंसर फ्री थे।
- इन प्रतिभागियों से एक प्रश्नोत्तरी भरने के लिए कहा गया, जिसमें उनसे पूछा गया कि वे कितने लोगों के साथ रहते हैं, कितनी बार परिवार या दोस्तों से मिलते हैं और हफ्ते में कम से कम एक बार वे कौन सी फुरसत की एक्टिविटीज करते हैं?
- जिन लोगों ने कहा कि वे अक्सर अकेला महसूस करते हैं और उन्हें लगता है कि वे बहुत कम ही किसी से अपनी बात कह पाते हैं, ऐसे लोगों की संख्या 15,942 थी।
- इन प्रतिभागियों को का लगभग 12 साल तक फॉलो किया गया, इस दौरान 38,103 को कैंसर होने का पता चलाक्या कहते हैं शोधकर्ता?
अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. जियाहाओ चेंग कहते हैं, हमारी स्टडी से पता चलता है कि सोशल आइसोलेशन और अकेलापन भले ही सोच के हिसाब से जुड़े हों, लेकिन कैंसर के मामलों में ये भूमिका निभाते हैं।
- अकेलापन और सोशल आइसोलेशन, क्रोनिक स्ट्रेस रिस्पॉन्स को ट्रिगर करके कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।
- इससे इम्यून सिस्टम खराब होता है, इंफ्लेमेशन बढ़ जाती है और ट्यूमर को बढ़ावा देने वाले हार्मोनल बदलाव भी देखे जाते हैं।
- अकेले रहने वाले लोगों के स्मोकिंग करने, गड़बड़ खान-पान, कम व्यायाम करने और मेडिकल केयर को नजरअंदाज करने का जोखिम ज्यादा होता है जो कैंसर का खतरा बढ़ाने वाला माना जाता रहा है।