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नए साल 2026 का आगाज सोने में उछाल के साथ, रिकॉर्ड रैली के बाद चांदी की रफ्तार पर लगा ब्रेक

साल 2026 की शुरुआत में भारतीय सराफा बाजार में सोने का भाव बढ़कर 1,38,340 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया, जबकि चांदी गिरकर 2,37,400 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। आइए जानें 2025 के ऐतिहासिक रिटर्न, चांदी में मुनाफावसूली के कारण और 2026 के लिए विशेषज्ञों का पूर्वानुमान।भारतीय सराफा बाजार के लिए साल 2026 की शुरुआत मिश्रित रही है। जहां एक ओर सोने की कीमतों ने मजबूती के साथ नए साल का स्वागत किया, वहीं दूसरी ओर चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के बाजार में सोने की कीमतों में 640 रुपये की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि चांदी में 1,600 रुपये की बड़ी गिरावट आई।

गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव 1,38,340 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र (बुधवार) में यह 1,37,700 रुपये पर बंद हुआ था।

इसके विपरीत, चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट का सिलसिला जारी रहा। चांदी का भाव 2,37,400 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर आ गया, जो पिछले बंद भाव 2,39,000 रुपये से 1,600 रुपये कम है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2025 की रिकॉर्ड तेजी के बाद चांदी में कुछ मुनाफावसूली (profit booking) देखी जा रही है।

बीता साल 2025 सोने और चांदी दोनों के लिए ऐतिहासिक रहा। आंकड़ों पर नजर डालें तो सोना ने 2025 में करीब 73.45 प्रतिशत का रिटर्न दिया। वहीं, चांदी ने सोने को भी पीछे छोड़ते हुए लगभग 164 प्रतिशत की भारी बढ़त दर्ज की। 

वैश्विक बाजारों का दबाव

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में गिरावट का रुख रहा। बुधवार को हाजिर सोना 28 डॉलर या 0.65 प्रतिशत गिरकर 4,310.89 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। मिरै एसेट शेयरखान के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह ने बताया, “साल 2025 के अंतिम कारोबारी दिन अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सुधार के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें दबाव में रहीं। अल्पावधि में वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें एक सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है।”

मेहता इक्विटीज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटीज) राहुल कलंत्री के मुताबिक, 2026 में सराफा बाजार की चाल मुख्य रूप से निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करेगी। अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर नीति और डॉलर की मजबूती या कमजोरी सबसे महत्वपूर्ण कारक होगी। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की निरंतर खरीदारी और ईटीएफ (ETF) प्रवाह कीमतों को ढांचागत समर्थन प्रदान करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी के निर्यात पर चीन द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंध वैश्विक आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करेंगे, जिससे कीमतों में अस्थिरता आ सकती है। किसी भी प्रकार के वैश्विक तनाव की स्थिति में सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग में और इजाफा हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतें वर्तमान में रिकॉर्ड ऊंचाइयों के करीब हैं। हालांकि बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है, लेकिन केंद्रीय बैंकों की दिलचस्पी और सुरक्षित निवेश की मांग इसे लंबी अवधि में सहारा देगी। निवेशकों को सलाह है कि वे वैश्विक आर्थिक संकेतों और डॉलर इंडेक्स की चाल पर पैनी नजर रखें।

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