

कोलकाता, 12 जनवरी 2026: पूर्वी भारत के प्रमुख स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं में से एक, मणिपाल हॉस्पिटल्स ग्रुप की इकाई मणिपाल अस्पताल ढाकुरिया ने खड़गपुर के 41 वर्षीय व्यवसायी श्री अरिंदम सेन (नाम परिवर्तित) का सफल इलाज किया, जिन्हें जन्मजात गंभीर हृदय वाल्व रोग का पता चला था। उनका उपचार डॉ. कौशिक मुखर्जी, कंसल्टेंट – कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, मणिपाल अस्पताल ढाकुरिया की विशेषज्ञ देखरेख में किया गया। यह मामला एक दुर्लभ और अत्यंत उच्च जोखिम वाली एयरवे समस्या के कारण विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था, जिसके चलते सुरक्षित और सफल परिणाम के लिए कार्डियक सर्जरी और एनेस्थीसिया टीमों को निकट समन्वय में काम करना पड़ा।
रोगी गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस से पीड़ित थे—यह एक जानलेवा स्थिति है, जिसमें हृदय से रक्त प्रवाह नियंत्रित करने वाला मुख्य वाल्व अत्यधिक संकरा हो जाता है। यह समस्या बायकसपिड एओर्टिक वाल्व के कारण हुई थी, जो एक जन्मजात दोष है, जिसमें वाल्व में सामान्य तीन के बजाय केवल दो फ्लैप होते हैं, जिससे कम उम्र में ही वाल्व की कार्यक्षमता प्रभावित हो जाती है। इसके अलावा, रोगी को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) भी था, यानी हृदय के निचले दो कक्षों के बीच की दीवार में एक छेद, जिससे रक्त का असामान्य प्रवाह हो रहा था। स्थिति को और जटिल बना दिया रोगी की गंभीर चिंता (एंग्जायटी), जिसके लिए वे लंबे समय से दवाइयाँ ले रहे थे, और मुँह खुलने की अत्यंत सीमित क्षमता—सिर्फ एक उंगली जितनी—जिससे सामान्य एनेस्थीसिया और एयरवे प्रबंधन बेहद जोखिमपूर्ण हो गया। ऐसे मामलों में हृदय गति या रक्तचाप में मामूली बदलाव भी घातक हो सकता है।
इन जोखिमों को कम करने के लिए चिकित्सकीय टीम ने एक उन्नत और सावधानीपूर्वक नियंत्रित तकनीक अवेक नेज़ल ट्रैकियल इंटुबेशन की योजना बनाई। इस प्रक्रिया में रोगी जागते हुए और स्वयं सांस लेते हुए नाक के रास्ते धीरे-धीरे श्वसन नली डाली जाती है, ताकि हृदय पर अचानक दबाव न पड़े। रोगी की चिंता और जटिल स्थिति के बावजूद, यह प्रक्रिया बिना ऑक्सीजन स्तर में गिरावट या महत्वपूर्ण शारीरिक अस्थिरता के सफलतापूर्वक पूरी की गई। इसके बाद डॉ. कौशिक मुखर्जी के नेतृत्व में सफल हृदय शल्य चिकित्सा की गई, जिसमें क्षतिग्रस्त वाल्व को बदला गया और हृदय के छेद को बंद किया गया।
सर्जरी और इसके बाद की रिकवरी पूरी तरह से सुचारु रही, किसी भी प्रकार की जटिलता नहीं हुई। सर्जरी के चौथे दिन रोगी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वह अब घर पर नियमित फॉलो-अप के साथ अच्छी तरह स्वस्थ हो रहे हैं।
मामले की जटिलता के बारे में बताते हुए डॉ. कौशिक मुखर्जी ने कहा, “इस रोगी में दो गंभीर हृदय रोगों के साथ एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण एयरवे समस्या भी थी। गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस में हृदय गति और रक्तचाप पर सख्त नियंत्रण आवश्यक होता है, क्योंकि हल्का सा तनाव भी खतरनाक हो सकता है। विस्तृत योजना और टीमवर्क के जरिए हम उत्कृष्ट परिणाम हासिल कर पाए। इस मामले को खास बनाने वाली बात रोगी का हमारी टीम पर भरोसा था। इतनी जटिलता और चिंता के बावजूद वे पूरे उपचार के दौरान शांत रहे, और उन्हें स्वस्थ होकर मुस्कुराते हुए घर लौटते देखना हम सभी के लिए बेहद संतोषजनक है।”
एनेस्थीसिया से जुड़ी चुनौती पर डॉ. नीलंजन चक्रवर्ती, कंसल्टेंट – कार्डियक एनेस्थीसिया, मणिपाल अस्पताल ढाकुरिया ने कहा, “मुँह बहुत कम खुलने और गंभीर चिंता के कारण पारंपरिक इंटुबेशन संभव नहीं था। अवेक नेज़ल इंटुबेशन से रोगी स्वयं सांस लेते रह सके, जिससे एयरवे फेल होने या हृदय की अस्थिरता का जोखिम लगभग समाप्त हो गया। उच्च जोखिम वाले कार्डियक रोगी में इस प्रक्रिया का सफल प्रबंधन सावधानी, अनुभव और निरंतर आश्वासन को दर्शाता है।”
अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए रोगी ने कहा, “देश के कई अस्पतालों के डॉक्टरों से बात करने के बाद मैंने अंततः मणिपाल अस्पताल ढाकुरिया में डॉ. कौशिक मुखर्जी के तहत इलाज कराने का निर्णय लिया। मैं बहुत चिंतित था, लेकिन टीम ने हर चरण को विस्तार से समझाया, जिससे मुझे काफी राहत मिली। सर्जरी से लेकर रिकवरी तक मुझे जो देखभाल और संवेदनशीलता मिली, वह वास्तव में आश्वस्त करने वाली थी। पूरी टीम का मैं आभारी हूँ, जिनकी बदौलत मैं आत्मविश्वास और मुस्कान के साथ घर लौट सका।”
यह दुर्लभ और जटिल मामला उन्नत कार्डियक सर्जरी और कठिन एयरवे प्रबंधन में मणिपाल अस्पताल ढाकुरिया की विशेषज्ञता को दर्शाता है और सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी सुरक्षित तथा समग्र उपचार प्रदान करने की उसकी प्रतिबद्धता को एक बार फिर सिद्ध करता है।



