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इन महिलाओं में कैंसर से मौत का खतरा अधिक, शोध में हुए चौंकाने वाले खुलासे

कैंसर जैसी वैश्विक महामारी अब न केवल शारीरिक, बल्कि नस्लीय और आनुवंशिक असमानताओं के कारण भी चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल ही में ‘जेएएमए ऑन्कोलॉजी’ (JAMA Oncology) और ‘मास जनरल ब्रिघम’ के शोधकर्ताओं द्वारा जारी रिपोर्टों ने चिकित्सा जगत को चौंका दिया है।

शोध के अनुसार, स्तन कैंसर से जूझ रही काली महिलाओं में गोरी महिलाओं की तुलना में मृत्यु की संभावना 40 प्रतिशत तक अधिक है। यह डेटा न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पर सवाल उठाता है, बल्कि आनुवंशिक कड़ियों की ओर भी इशारा करता है।

काली महिलाओं के लिए बड़ा खतरा 

शोध के अनुसार, ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (TNBC) के मामलों में स्थिति और भी गंभीर है। इस विशेष और आक्रामक कैंसर से ग्रसित काली महिलाओं की जान जाने की संभावना इसी बीमारी से जूझ रही गोरी महिलाओं की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक पाई गई है। अमेरिका में महिलाओं की मृत्यु का यह दूसरा सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है।

लास्ट स्टेज कैंसर की संभावना दोगुनी 

इंग्लैंड में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि काली महिलाओं में स्तन कैंसर का पता अक्सर अंतिम चरण (Last Stage) में चलता है। गोरी महिलाओं की तुलना में काली महिलाओं में कैंसर के अंतिम चरण में होने की संभावना दोगुनी पाई गई है। समय पर जांच और स्क्रीनिंग की कमी इस अंतर का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है।

जेनेटिक लिंक और 2050 की डरावनी तस्वीर 

वैज्ञानिकों ने अफ्रीकी मूल की महिलाओं और TNBC के बीच एक जेनेटिक लिंक (आनुवंशिक संबंध) का पता लगाया है। यह शोध बताता है कि कैंसर का व्यवहार अलग-अलग नस्लों में भिन्न हो सकता है। अनुमान है कि 2050 तक दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर के मामले 3.5 मिलियन तक पहुंच जाएंगे। ‘मास जनरल ब्रिघम’ (2024) के शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि भले ही कैंसर के प्रकार अलग हों, लेकिन मृत्यु दर में यह 40% की असमानता लगभग हर प्रकार के स्तन कैंसर में मौजूद है।

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