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भारत के उद्यमिता पारितंत्र को आकार देने में उद्यमिता शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका

भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज में उद्यमिता ने आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर लिया है। सशक्त सार्वजनिक नीतियां और प्रभावी शासन व्यवस्था इसके विकास को प्रोत्साहित करती हैं तथा उसे संतुलित और रचनात्मक दिशा प्रदान करती हैं। यह क्षेत्र अब एक प्रभावी विकास रणनीति के रूप में उभर चुका है, जो संसाधनों के बेहतर उपयोग, मानव संसाधन, पूंजी, कौशल और अन्य आवश्यक साधनों की सामूहिक शक्ति को संगठित कर उद्यम स्थापित करने में सहायक है। ऐसे उद्यम गरीबी को कम करने, रोजगार सृजन करने और देश के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
प्रभावी उद्यमी कौशल, बाजार की अच्छी समझ, टिकाऊ वित्तीय प्रबंधन और स्पष्ट व्यवसाय मॉडल किसी भी व्यवसाय को सहज रूप से आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। सुव्यवस्थित कक्षा प्रशिक्षण को व्यावहारिक मार्गदर्शन और वास्तविक अनुभव के साथ जोड़ने से किसी स्टार्टअप की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।
अहमदाबाद स्थित भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान भारत के उद्यमिता पारितंत्र को आकार देने और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्थान को उद्यमिता शिक्षा, प्रशिक्षण, कौशल विकास, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की वृद्धि, स्टार्टअप, नवाचार और संस्थान निर्माण के क्षेत्र में 40 से अधिक वर्षों का अनुभव है। इसे भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा कौशल पारितंत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त है।
इस संस्थान में स्नातकोत्तर शिक्षा केवल प्रबंधक तैयार करने के लिए नहीं बनाई गई है, बल्कि इसका उद्देश्य स्वामी-प्रबंधक, पारिवारिक व्यवसाय के उत्तराधिकारी, आंतरिक उद्यमी और समुदाय में परिवर्तन लाने वाले नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करना है।
प्रमुख कार्यक्रम
• स्नातकोत्तर प्रबंधन डिप्लोमा – उद्यमिता (पीजीडीएम-ई) दो वर्षीय, पूर्णकालिक, एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त
यह पाठ्यक्रम वर्ष 1998 में शुरू किया गया था और इसमें नए उद्यम की स्थापना की पूरी प्रक्रिया शामिल है — विचार की उत्पत्ति से लेकर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने तक। विद्यार्थियों को उद्यमिता पारितंत्र की व्यापक समझ प्रदान की जाती है।
पाठ्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं
• प्रथम पीढ़ी के उद्यमी तैयार करने हेतु नए उद्यम सृजन में विशेषकरण।
• पारिवारिक व्यवसाय की निरंतरता और विकास सुनिश्चित करने के लिए 5 वर्षीय विकास एवं विविधीकरण योजना पर आधारित पारिवारिक व्यवसाय प्रबंधन में विशेषकरण।
• प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी उद्यमिता में विशेषकरण।
• स्नातकोत्तर प्रबंधन डिप्लोमा – नवाचार, उद्यमिता एवं वेंचर विकास (पीजीडीएम-आईईवी) दो वर्षीय, पूर्णकालिक, एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त
भारत सरकार की स्टार्टअप पहल के अनुरूप यह पाठ्यक्रम व्यवसाय में प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार को प्रोत्साहित करता है। इसका पाठ्यक्रम परिणामोन्मुख है और विद्यार्थियों को अपने विचारों को परखने, नवाचार करने, बाजार का परीक्षण करने और सफल प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप स्थापित करने में सक्षम बनाता है।
पाठ्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं
• संस्थान के प्रौद्योगिकी आधारित इनक्यूबेटर — एडवांसिंग एंड लॉन्चिंग एंटरप्राइजेज केंद्र (क्रैडल) — के माध्यम से अनुभवात्मक शिक्षण।
• नवाचार और प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण का व्यावहारिक परिचय।
पीजीडीएम (ऑनलाइन): एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त ऑनलाइन पीजीडीएम और कार्यकारी कार्यक्रम, लचीले शिक्षण मॉडल, उद्योग विशेषज्ञों के पैनल और परियोजना आधारित मूल्यांकन के माध्यम से मध्य-करियर पेशेवरों तक संस्थान की शिक्षण पद्धति को विस्तारित करते हैं। यह समझते हुए कि उद्यमी क्षमताएं कॉर्पोरेट वातावरण में भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, संस्थान का स्नातकोत्तर प्रबंधन डिप्लोमा (ऑनलाइन) ‘कॉर्पोरेट उद्यमिता’ को एक विशिष्ट विशेषकरण के रूप में प्रदान करता है।
सामान्य प्रबंधन डिग्री से संस्थान के पीजीडीएम पाठ्यक्रमों को जो बात अलग बनाती है, वह यह है कि इनका पाठ्यक्रम सीधे उद्यम स्थापित करने और सफल बनाने के परिणामों पर केंद्रित है:
• चरणों में आगे बढ़ने वाला उद्यम निर्माण मॉडल, जिसमें विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही अपने विचारों पर आधारित प्रारंभिक परियोजनाएं शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
• ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वास्तविक अनुभव से जुड़े प्रोजेक्ट, जिनसे विद्यार्थियों को ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों और आपूर्ति शृंखला की चुनौतियों को समझने का अवसर मिलता है।
• पारिवारिक व्यवसाय के उत्तराधिकार, सामाजिक उद्यम और पारंपरिक क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी के उपयोग से जुड़े विषय, जो संस्थान की समावेशी सोच को दर्शाते हैं।
• आईईवी कार्यक्रम में बौद्धिक संपदा अधिकार, कानूनी प्रक्रियाओं और उत्पाद या सेवा को बाजार तक पहुंचाने की रणनीति पर विशेष ध्यान।
संस्थान का आंतरिक इनक्यूबेटर – क्रैडल – जो विचार से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया को पूरा करता है:
प्रौद्योगिकी आधारित इस दौर में नवाचारी व्यावसायिक विचार व्यापार जगत की दिशा बदल रहे हैं। वर्ष 2016 में शुरू किया गया एडवांसिंग एंड लॉन्चिंग एंटरप्राइजेज केंद्र (क्रैडल) अहमदाबाद स्थित संस्थान द्वारा संचालित एक प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर है, जिसे भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उद्यमिता विकास बोर्ड का सहयोग और समर्थन प्राप्त है।
क्रैडल विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य उभरते क्षेत्रों में नए और अभिनव विचारों को तकनीकी मार्गदर्शन, बौद्धिक संपदा से संबंधित सलाह, परामर्श, व्यवसाय योजना तैयार करने में सहायता, नेटवर्किंग, वित्तीय स्रोतों तक पहुंच और कार्यस्थल की सुविधा प्रदान करता है।
इसके परिणाम अत्यंत उल्लेखनीय रहे हैं। अब तक 145 स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किया जा चुका है। सरकारी योजनाओं के माध्यम से 10 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जुटाई गई है, तथा निवेशकों से बीज पूंजी के रूप में 100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्राप्त हुआ है।
जैसे-जैसे भारत का उद्यमिता परिदृश्य विकसित हो रहा है, संस्थान ने अपने पाठ्यक्रम में प्रौद्योगिकी को और अधिक समाहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत स्नातकोत्तर प्रबंधन डिप्लोमा – उद्यमिता कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी उद्यमिता का एक नया विशेषकरण जोड़ा गया है। गहन प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के तेजी से उभरने और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग द्वारा प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन दिए जाने के कारण यह शिक्षा उन विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोलेगी, जो नवोन्मेषी और प्रौद्योगिकी संचालित क्षेत्रों में उद्यम स्थापित करना चाहते हैं। उद्यम शुरू करने से पहले प्रत्येक संभावित उद्यमी को उस व्यावसायिक अवसर का गहन अध्ययन करना आवश्यक है, जिसे वह चुन रहा है। अधिकांश युवा उत्साही उद्यमियों के लिए बजट एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में परामर्श, उद्यमिता शिक्षा और उचित मार्गदर्शन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ताकि वे विभिन्न वित्तीय स्रोतों, सरकारी नीतियों, योजनाओं और उपलब्ध अवसरों की जानकारी प्राप्त कर सकें। इस दृष्टि से संस्थान के स्नातकोत्तर पूर्व छात्र बाजार में बेहतर स्थिति प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही, कार्यरत पेशेवरों में उद्यमी क्षमताओं का महत्व भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। नवाचार, रचनात्मकता, समस्या समाधान और उद्यमी दृष्टिकोण जैसी क्षमताएं कार्यकारी अधिकारियों के लिए बड़ी संपत्ति साबित हो सकती हैं। ये गुण उन्हें रणनीतिक योजना बनाने और संस्थागत विकास को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं। हर नियोक्ता ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता देता है जिनमें उद्यमशील सोच हो। संस्थान का स्नातकोत्तर प्रबंधन डिप्लोमा (ऑनलाइन) ‘कॉर्पोरेट उद्यमिता’ को एक विशिष्ट विशेषकरण के रूप में प्रस्तुत करता है। यह मॉड्यूल संस्थान के वर्षों के अनुभव पर आधारित है, जिसमें उसने प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट संस्थानों के लिए अल्पकालिक आंतरिक उद्यमिता विकास कार्यक्रम संचालित किए हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य अधिकारियों में प्रबंधकीय कौशल, नेतृत्व क्षमता और उद्यमशील सोच को सशक्त बनाना रहा है।
जैसे-जैसे भारत का उद्यमिता परिदृश्य आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे वे संस्थान जो शैक्षणिक गंभीरता को वास्तविक उद्यम स्थापना के अनुभव से जोड़ते हैं, भविष्य के उद्यमियों की नई पीढ़ी को दिशा देंगे। संस्थान में स्नातकोत्तर शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे इनक्यूबेशन, बाजार से प्रत्यक्ष जुड़ाव, नीतिगत समझ और निरंतर मार्गदर्शन के माध्यम से व्यवहार में उतारा जाता है। संस्थान ऐसे उद्यमियों को तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है जो मजबूत और टिकाऊ उद्यम स्थापित करें, समाज को सशक्त बनाएं और भारत की समावेशी आर्थिक प्रगति में सार्थक योगदान दें।

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