
है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में। खम ठोक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पांव उखड़। मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है।’ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की यह पंक्तियां मनुष्य के अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प को दर्शाती हैं। रविराज की सफलता की कहानी एक बार फिर एक इन पंक्तियों को मायने देती है। रविराज की कामयाबी यह दर्शाती है कि दृढ़ निश्चय और निरंतर मेहनत के बल पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।
दृष्टिबाधित रविराज ने यूपीएससी में लहराया परचम
नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड के महुली गांव के रहने वाले दृष्टिबाधित युवा रविराज ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 20वीं रैंक प्राप्त कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
किसान परिवार से आने वाले रविराज ने सीमित साधनों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल किया। उनकी उपलब्धि ने न केवल नवादा जिले का नाम रोशन किया है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए भी वे प्रेरणा बन गए हैं।