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मां पढ़कर सुनाती थीं, दृष्टिबाधित बेटे ने UPSC में 20वीं रैंक लाकर दिया मेहनत का फल

है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में। खम ठोक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पांव उखड़। मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है।’  राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की यह पंक्तियां मनुष्य के अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प को दर्शाती हैं। रविराज की सफलता की कहानी एक बार फिर एक इन पंक्तियों को मायने देती है। रविराज की कामयाबी यह दर्शाती है कि दृढ़ निश्चय और निरंतर मेहनत के बल पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।

दृष्टिबाधित रविराज ने यूपीएससी में लहराया परचम

नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड के महुली गांव के रहने वाले दृष्टिबाधित युवा रविराज ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 20वीं रैंक प्राप्त कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

किसान परिवार से आने वाले रविराज ने सीमित साधनों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल किया। उनकी उपलब्धि ने न केवल नवादा जिले का नाम रोशन किया है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए भी वे प्रेरणा बन गए हैं।

बीपीएससी की परीक्षा भी पास कर चुके हैं रविराज

रविराज इससे पहले भी अपनी क्षमता का परिचय दे चुके हैं। उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा पास कर राजस्व अधिकारी के पद पर चयन प्राप्त किया था। उस परीक्षा में भी वे अपने जिले के टॉपर रहे थे।

दृष्टिबाधित रविराज ने कड़ी मेहनत और अटूट इच्छाशक्ति के साथ यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 182वीं रैंक (AIR 182) हासिल की थी। अब उन्होंने यूपीएससी में शानदार रैंक प्राप्त कर एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है।
रविराज की पढ़ाई-लिखाई

रविराज की शुरुआती पढ़ाई दयाल पब्लिक स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने इंटरमीडिएट की शिक्षा सत्येंद्र नारायण सिंह इंटर स्कूल से पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने सीताराम साहू कॉलेज में प्रवेश लिया और वहीं से राजनीति विज्ञान विषय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। रविराज के अनुसार, उन्होंने इस बार भी UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की है।

रोज 8 से 10 घंटे की मेहनत रंग लाई

अपनी तैयारी के बारे में उन्होंने बताया कि उन्होंने घर पर रहकर ही नियमित अध्ययन किया। वे प्रतिदिन लगभग 8 से 10 घंटे तक पढ़ाई करते थे। लगातार अनुशासन और समर्पण के साथ की गई तैयारी का ही परिणाम है कि आज उन्हें यह सफलता मिली है।

रविराज की उपलब्धि से महुली गांव और आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उन्हें बधाई दी है। बताया जा रहा है कि इस इलाके से पहली बार किसी अभ्यर्थी ने यूपीएससी में इतनी उत्कृष्ट रैंक हासिल की है।

उनकी सफलता से उनके माता-पिता भी बेहद खुश हैं। उनकी मां विभा सिन्हा ने बेटे की मेहनत और संघर्ष को याद करते हुए भावुक होकर उसकी सफलता की कहानी साझा की। वहीं उनके पिता रंजन कुमार सिन्हा ने कहा कि बेटे की लगन और परिश्रम ने आज पूरे परिवार का सपना साकार कर दिया है।

फिलहाल रविराज नवादा शहर के नवीन नगर इलाके में किराए के मकान में रहते हैं। इस समय वे नवादा से बाहर हैं और घर पर परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं है। फोन पर बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी अखिल भारतीय 20वीं रैंक मिलने की पुष्टि की।

सफलता में मां की अहम भूमिका

रविराज की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े लक्ष्य निर्धारित करते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं। उनकी इस उपलब्धि के पीछे उनकी मां विभा सिन्हा की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वे रविराज को पढ़कर सुनाती थीं, जिसे वह सुनकर याद कर लेते थे। यहां तक कि उनकी मां ही उनके लिए नोट्स भी लिखती थीं, जिससे उनकी तैयारी में काफी मदद मिली।

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