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एक मिसाल ये भी! मुस्लिम माता-पिता ने हिंदू रीति-रिवाज से कराई बेटे की शादी, हर जगह हो रही तारीफ

कर्नाटक के बस्तावाड़ा गांव में एक मुस्लिम दंपति, महबूब और नूरजन ने मानवता की मिसाल पेश की है. उन्होंने दो हिंदू अनाथ बच्चों को गोद लिया और उनका पालन-पोषण हिंदू रीति-रिवाजों से किया. हाल ही में, उन्होंने अपने दत्तक पुत्र सोमशेखर का विवाह हिंदू विधि-विधान से संपन्न कराया. यह घटना धार्मिक भेदभाव से ऊपर उठकर सामाजिक सद्भाव और आपसी प्रेम का अनुपम उदाहरण है.

कर्नाटक में बेलगाम जिले के हुक्केरी तालुक का बस्तावाड़ा गांव एक ऐसी दुर्लभ घटना का गवाह है जहां मानवता ने धार्मिक और जातिगत भेदभाव को दर किनार करते हुए एक मुस्लिम दंपति, महबूब नाइकवाड़ी और नूरजन ने अपने दत्तक पुत्र, एक हिंदू युवक का विवाह हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार करवाकर समाज के लिए एक मिसाल कायम की है. दत्तक पुत्र का हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह करवाने के इस कदम की हर तरफ सराहना हो रही है.यह घटना लगभग बीस साल पहले घटी थी. दो भाई, सोमशेखर पूजार और वसंत पूजार, बचपन में ही अपने माता-पिता को खो बैठे और अनाथ हो गए. उस समय सोमशेखर चार साल का और वसंत दो साल का था. माता-पिता की मृत्यु के बाद, परिवार ने बच्चों की देखभाल करना छोड़ दिया, जिससे उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा

बेटे की हिंदू रीति-रिवाज से की शादी

एक मुस्लिम दंपत्ति जिन्होंने अपने बच्चों का पालन-पोषण हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार किया. उस समय, पड़ोस में रहने वाले महबूब और नूरजान दंपत्ति ने आगे आकर इन दो बच्चों को अपने पांच बच्चों के साथ गोद ले लिया. अलग-अलग धर्मों के होने के बावजूद, उन्होंने अपने बच्चों का पालन-पोषण हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार किया और शिक्षा सहित हर क्षेत्र में उनकी मदद की.

क्या है मामला?

अब वयस्क हो चुके सोमशेखर पूजार का विवाह हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ. विवाह समारोह में महबूब दंपति ने स्वयं माता-पिता की भूमिका निभाई और सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए. जाति और धर्म के नाम पर हो रहे दंगों से भरे मौजूदा हालात में, इस मुस्लिम दंपति द्वारा दिखाई गई मानवता और एकजुटता की व्यापक रूप से सराहना की गई है. बस्तावाड़ा गांव में घटी यह घटना सामाजिक सद्भाव का एक उदाहरण है.

मुस्लिम दंपति की हर कोई सराहना कर रहा है. लोग कह रहे हैं जहां देशभर में लोगों को आपस में लड़ाने कोशिश की जा रही है. दो धर्म के लोगों को एक दूसरे के सामने खड़ा करने कोशिश हो रही है. ऐसे में महबूब ने दत्तक पुत्र की हिंदू रीति-रिवाज से शादी करके एक मिसाल कायम की है.

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