10 राज्यों में क्यों हो रहे राज्यसभा चुनाव: जिन 37 सीटों पर निर्वाचन, उनमें कैसे समीकरण; कहां-किसका पलड़ा भारी
राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है? इसमें जीत का फॉर्मूला क्या है? 16 मार्च को जब चुनाव होगा तो किस राज्य की कितनी सीटें दांव पर होंगी? यह कब खाली हो रही हैं और कौन-कौन से चेहरे राज्यसभा से विदा लेने वाले हैं? जिन राज्यों में यह सीटें खाली हो रही हैं, वहां राजनीतिक दलों के लिए सीट जीतने का समीकरण क्या है

निर्वाचन आयोग ने बुधवार को राज्यसभा की 37 सीटों पर चुनाव तारीखों का एलान कर दिया। इन सभी सीटों पर 16 मार्च को चुनाव होंगे। राज्यसभा की जिन सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें महाराष्ट्र से लेकर पश्चिम बंगाल और बिहार से लेकर तमिलनाडु तक की सीटें शामिल हैं।
पहले जानें- राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है?
राज्यसभा में किस राज्य से कितने सांसद होंगे यह उस राज्य की जनसंख्या के हिसाब से तय होता है। राज्यसभा के सदस्य का चुनाव उस राज्य की विधानसभा के चुने हुए विधायक करते हैं, जिस राज्य से वह उम्मीदवार है। राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया लोकसभा और विधानसभा चुनाव से काफी अलग है, क्योंकि इस सदन के लिए मतदान सीधे जनता नहीं करती, बल्कि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि करते हैं। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है। राज्यसभा चुनावों के नतीजों के लिए एक फॉर्मूला भी तय किया गया है।
चुनाव नतीजों का ये फॉर्मूला क्या है?
विधायकों को चुनाव आयोग की ओर से एक विशेष पेन दिया जाता है। उसी पेन से उम्मीदवारों के आगे वोटर को नंबर लिखने होते हैं। एक नंबर उसे सबसे पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के आगे डालना होता है। ऐसे दूसरी पसंद वाले उम्मीदवार के आगे दो लिखना होता है। इसी तरह विधायक चाहे तो सभी उम्मीदावारों को वरीयता क्रम दे सकता है। अगर आयोग द्वारा दी गई विशेष पेन का इस्तेमाल नहीं होता तो वह वोट अमान्य हो जाता है। इसके बाद विधानसभा के विधायकों की संख्या और राज्यसभा के लिए खाली सीटों के आधार पर जीत के लिए आवश्यक वोट तय होते हैं। जो उम्मीदवार उस आवश्यक संख्या से अधिक वोट पाता है वह विजयी घोषित होता है।
ये आवश्यक संख्या कैसे तय होती है?
इसे समझने के लिए बिहार का उदाहरण लिया जा सकता है। यहां विधायकों की कुल संख्या 243 है। वहीं, कुल पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। हर एक सदस्य को राज्यसभा पहुंचने के लिए कितने विधायकों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए इसके लिए एक तय फॉर्मूला है। यह फॉर्मूला यह है कि कुल विधायकों की संख्या को जितने राज्यसभा सदस्य चुने जाने हैं, उसमें एक जोड़कर विभाजित किया जाता है।
इस बार यहां से पांच राज्यसभा सदस्यों का चुनाव होना है। इसमें एक जोड़ने से यह संख्या छह होती है। अब कुल सदस्य 243 हैं तो उसे छह से विभाजित करने पर 40.5 आता है। इसमें एक जोड़ने पर यह संख्या 41.5 हो जाती है। यानी बिहार से राज्यसभा सांसद बनने के लिए उम्मीदवार को 41 प्राथमिक वोटों की जरूरत होगी। अगर विजेता का फैसला प्रथम वरीयता के वोटों से नहीं होता तो उसके बाद दूसरी वरीयता के वोट गिने जाते हैं।
2026 में कुल कितनी सीटों पर चुनाव, अभी 37 पर चुनाव क्यों?
2026 में अलग-अलग समय पर राज्यसभा की कुल 73 सीटें खाली हो रही हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने अभी सिर्फ 37 सीटों पर चुनाव का एलान किया है। इसकी वजह यह है कि 37 सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल महीने में समाप्त होगा। इनमें से 22 सदस्य 2 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं। वहीं, 15 सदस्य 9 अप्रैल को रिटायर होंगे। यानी कुल 37 सदस्य अप्रैल में रिटायर होंगे।
इसी तरह जून में 22 सांसदों का कार्यकल खत्म हो रहा है। इनमें से 17 सदस्य 21 जून को, चार 25 जून और एक सदस्य 23 जून को रिटायर होंगे। वहीं, 11 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल नवंबर महीने में पूरा होगा। ये सभी 25 नवंबर को रिटायर होंगे। यानी इस साल राज्यसभा के लिए फिर चुनाव होना तय है।
क्या हैं इन राज्यों में चुनावी समीकरण?
जिन 10 राज्यों में राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है, उनमें दक्षिण में तमिलनाडु से लेकर उत्तर में हिमाचल प्रदेश तक शामिल हैं। सबसे ज्यादा सात सीटें महाराष्ट्र, छह सीटें तमिलनाडु, पांच-पांच सीटें पश्चिम बंगाल और बिहार में खाली हो रही हैं। इसके अलावा ओडिशा में चार, असम में तीन, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में दो-दो और हिमाचल प्रदेश में एक सीट खाली हो रही है। इन सभी सीटों पर चुनाव होने जा रहा है।
क्या हैं महाराष्ट्र के समीकरण?
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा सात राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। फॉर्मूला के हिसाब से यहां किसी उम्मीदवार को जिताने के लिए कम से कम 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन सात में छह सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर सकता है। विपक्ष एकजुट नहीं होता तो सातवें उम्मीदवार के लिए मुकाबला रोचक हो सकता है।
क्या हैं तमिलनाडु के समीकरण?
तमिलनाडु में छह राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। यहां किसी उम्मीदवार को जिताने के लिए कम से कम 34 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। मौजूदा समीकरण के हिसाब से द्रविड़ मुनेत्र कझगम के नेतृत्व वाला सत्ताधारी गठबंधन चार सीटें आसानी से जीत सकता है। वहीं, अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले विपक्ष को दो सीटें मिल सकती हैं।
क्या हैं पश्चिम बंगाल के समीकरण?
पश्चिम बंगाल में पांच सीटें खाली हो रही हैं। फॉर्मूला के हिसाब से यहां राज्यसभा सीट जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 50 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। फिलहाल बंगाल में टीएमसी सबसे बड़ी पार्टी है, वहीं भाजपा दूसरे नंबर पर है। मौजूदा समीकरण के मुताबिक टीएमसी चार सीटें आसानी से जीत सकती हैं। वहीं, एक सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। यानी, माकपा को यहां नुकसान होना तय है।
क्या हैं बिहार के समीकरण?
बिहार में पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव घोषित किए गए हैं। फॉर्मूला के हिसाब से यहां राज्यसभा सीट जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। राज्य में मौजूदा समय में भाजपा के पास सबसे ज्यादा सीटें हैं, जबकि जदयू दूसरे नंबर पर है। मौजूदा समीकरण के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन चार सीटें आसानी से जीत सकता है। वहीं, पांचवीं सीट पर एनडीए का दावा महागठबंधन के मुकाबले ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहा है।
क्या हैं ओडिशा के समीकरण?
ओडिशा में चार राज्यसभा सीटों पर चुनाव घोषित किए गए हैं। फॉर्मूला के हिसाब से यहां राज्यसभा सीट जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 30 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। मौजूदा समीकरण के मुताबिक भाजपा दो तो बीजद एक सीट आसानी से जीत सकती है। चौथी सीट पर मुकाबला रोचक हो सकता है। इस स्थिति में कांग्रेस विधायकों की भूमिका अहम हो जाएगी।
क्या हैं असम के समीकरण?
असम में तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव घोषित किए गए हैं। फॉर्मूला के हिसाब से यहां राज्यसभा सीट जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 32 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। मौजूदा समीकरण के हिसाब से तीन में से दो सीटों पर भाजपा आसानी से जीत दर्ज कर सकती है।
क्या हैं तेलंगाना के समीकरण?
तेलंगाना में दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव घोषित किए गए हैं। फॉर्मूला के हिसाब से यहां राज्यसभा सीट जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। राज्य में मौजूदा समय में 66 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे मजबूत है। वहीं, भारतीय राष्ट्र समिति मुख्य विपक्षी दल है। यानी राज्यसभा सीटों में इन दोनों दलों के बीच टक्कर रहेगी। इसके अलावा राज्य में भाजपा आठ सीटों के साथ गेमचेंजर साबित हो सकती है। खासकर बीआरएस के लिए। कुछ यही स्थिति असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया भी पैदा कर सकती है।
क्या हैं छत्तीसगढ़ के समीकरण?
छत्तीसगढ़ में दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव घोषित किए गए हैं। फॉर्मूला के हिसाब से यहां राज्यसभा सीट जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 31 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। राज्य में मौजूदा समय में 54 सीटों के साथ भाजपा सबसे मजबूत है। हालांकि, कांग्रेस भी 35 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर है। यानी दोनों दल एक-एक सीट आसानी से हासिल कर सकते हैं। कांग्रेस के पास विधायकों की क्रॉस वोटिंग रोकना बड़ी चुनौती होगा।
क्या हैं हरियाणा के समीकरण?
हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव घोषित किए गए हैं। फॉर्मूला के हिसाब से यहां राज्यसभा सीट जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 31 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। राज्य में मौजूदा समय में 48 सीटों के साथ भाजपा सबसे मजबूत है। हालांकि, कांग्रेस भी 37 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर है। यानी भाजपा-कांग्रेस के लिए एक-एक सीट के साथ मुकाबला बराबर का रहने की संभावना है।

