

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध ने पूरी दुनिया में तनाव का माहौल बना दिया है. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर भीषण हमले कर रहे हैं. अब तुर्किए ने खुले तौर पर ईरान का समर्थन किया है. अंकारा में सत्ताधारी दलों के सांसदों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने कहा, ‘मैं न तो सुन्नी हूं और न ही शिया. हम सब मुसलमान हैं. यह समर्थन करने का समय है. यह युद्ध रोकने का समय है. अगर ऐसा नहीं हुआ तो पूरी दुनिया जल जाएगी.’
तुर्किए ने ईरान का समर्थन करते हुए सभी मुसलमानों से उसका समर्थन करने का आह्वान किया है. एर्दोगन ने आगे कहा, ‘मैं संकट के समय मुंह मोड़ने वालों में से नहीं हूं. मैं खुलकर बोलूंगा और युद्ध रोकने की कोशिश करूंगा.’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एर्दोगन ने सांसदों से कहा कि यह युद्ध इजराइल ने शुरू किया है और वे इसे रोक सकते हैं. अगर अमेरिका कूटनीति को प्राथमिकता देता है, तो युद्ध रोका जा सकता है. तुर्किए इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सकता है.
ईरान के समर्थन में उतरा तुर्किए
इस बीच, तुर्किए भी इजराइल के निशाने पर है. बुधवार को इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री बेनेट ने कीज को बताया कि तुर्किए भी ईरान के नक्शेकदम पर चल रहा है. वहां सुन्नी मुसलमानों का एक समूह बन रहा है, जिसमें हमास, कतर और सीरिया शामिल हैं. इन समूहों का उद्देश्य इजराइल को नुकसान पहुंचाना है. यह भी महत्वपूर्ण है कि तुर्किए एकमात्र ऐसा देश है, जिस पर ईरान ने आक्रामक हमला नहीं किया है.
तुर्किए अभी भी ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा है. राष्ट्रपति एर्दोगन खुद इस काम में सक्रिय हो गए हैं. तुर्किए में हुई बैठक में सांसदों को गुप्त जानकारी दी गई. तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान और एक अन्य मंत्री ने सांसदों को लगभग 30-30 मिनट तक जानकारी दी. यह जानकारी इस संकट से निपटने के तरीकों के बारे में थी.


