राजा परीक्षित का जन्म प्रसंग सुनकर भक्ति में डूबे श्रद्धालु
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का कलश यात्रा से हुआ शुभारंभ



भोपाल। शहर में आयोजित द्वितीय श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में श्रद्धालुओं की अच्छी भागीदारी देखने को मिल रही है। सिद्धेश्वरी शक्तिपीठ माताजी एवं हनुमान जी महाराज की कृपा से हो रहे इस सात दिवसीय आयोजन में लोग नियमित रूप से पहुंचकर कथा श्रवण कर रहे हैं।
कलश यात्रा से हुआ शुभारंभ
4 अप्रैल को सिद्धेश्वरी मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई। यह यात्रा कोपल स्कूल, साई मंदिर और नेहरू नगर चौराहा होते हुए वापस मंदिर परिसर पहुंची। यात्रा में महिलाएं कलश लेकर भजन-कीर्तन करती नजर आईं।
कथा का आयोजन
कथा व्यास पंडित श्री 108 भगवत स्वरूप शास्त्री (वृंदावन) द्वारा श्रीमद् भागवत कथा सुनाई जा रही है। प्रवचन में धर्म और जीवन से जुड़ी बातों को सरल भाषा में बताया जा रहा है।
दूसरे दिन परीक्षित जन्म की कथा
कथा के दूसरे दिन राजा परीक्षित के जन्म प्रसंग का वर्णन किया गया। कथावाचक ने बताया कि जब पुण्य का समय आता है, तब ऐसे आयोजन होते हैं। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से व्यक्ति के पाप दूर होते हैं।
उन्होंने कहा कि भागवत महापुराण को वेदों का सार माना गया है, जो लंबे समय से लोगों को ज्ञान देता आया है। कथा में बताया गया कि गुरु द्रोण के निधन के बाद उनके पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोधित होकरउ ब्रह्मास्त्र चलाया। उसी समय अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ से राजा परीक्षित का जन्म हुआ।
कथा के दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन में शामिल होकर “राधे-राधे” के जयकारे लगाते रहे। पूरे पंडाल में शांत और धार्मिक वातावरण बना रहा।
संतों का सानिध्य
कार्यक्रम में संतोषपुरी गुरु महाराज (मुरैना) सहित अन्य संत भी उपस्थित हैं। आयोजन के मुख्य यजमान श्रीमती गीता एवं राजकुमार सिंह चौहान हैं।



