शिक्षकों द्वारा भोपाल में 18 अप्रैल को होगी मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा


TET (Teacher Eligibility Test) का कानून 2009 में बना और 2011 में पूर्ण रूप से लागू किया गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिनांक 1सितंबर 2025 को अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र के विरुद्ध दिए गए निर्णय को पूरे भारत में लागू मानते हुए सभी शिक्षकों के लिए TET परीक्षा अनिवार्य करने की स्थिति उत्पन्न की जा रही है जो फेल होगा उसे सेवा से बर्खास्त किया जायेगा
जबकि 2009 के पूर्व जो भी नियुक्ति है नियम बनने के पूर्व पर यह टेट नियम लागू नहीं होना चाहिए यह परीक्षा अव्यवहारिक है
इसी क्रम में 2 मार्च 2026 को अचानक Dpi भोपाल ने आदेश जारी कर जिला शिक्षा अधिकारियों से शिक्षकों की जानकारी मांगी गई है तथा जुलाई-अगस्त में परीक्षा प्रस्तावित है — जबकि इस विषय में न तो सरकार ने और न ही शिक्षक संगठनों से कोई समुचित विचार-विमर्श किया गया।
🔴 महत्वपूर्ण तथ्य:
जम्मू-कश्मीर व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई है, जिसके चलते वहां परीक्षा स्थगित है।
मध्यप्रदेश में 1995 से लेकर विभिन्न समयों में 1998 शिक्षाकर्मी, गुरुजी, संविदा व अध्यापक के रूप में भर्ती हुई — सभी भर्ती नियम सरकार द्वारा बनाए गए और उन्हीं के अनुसार नियुक्तियां हुईं।
⚠️ गंभीर चिंता:
25–30 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को पुनः TET परीक्षा देना अव्यवहारिक और मानसिक रूप से अत्यंत कष्टदायक है।
अधिकांश शिक्षक गृह ऋण, वाहन ऋण और पारिवारिक जिम्मेदारियों में बंधे हैं।
एक शिक्षक पर औसतन 5–6 सदस्यों का परिवार निर्भर है (बच्चे, बुजुर्ग माता-पिता, पति-पत्नी)।
सेवा समाप्ति की स्थिति में पूरे परिवार का जीवन संकट में आ जाएगा।
💰 आर्थिक वास्तविकता:
95% शिक्षक NPS (नई पेंशन योजना) के अंतर्गत हैं, जिसमें बर्खास्तगी की स्थिति में अत्यंत न्यून पेंशन (₹1000–₹1200) मिलती है।
❓ प्रश्न:
जब 2018 की नई नीति में नियुक्ति हुई, तब TET अनिवार्य क्यों नहीं किया गया?
2011 से अब तक शिक्षकों को इस विषय में स्पष्ट निर्देश क्यों नहीं दिए गए?
अन्य सेवाओं (IAS/IPS) में चयन के बाद बार-बार परीक्षा क्यों नहीं ली जाती?
📢 हमारी माँगें:
वर्तमान शिक्षकों को TET से पूर्ण छूट दी जाए।
प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता मान्य की जाए।
पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए।
भारत सरकार अध्यादेस लाये
राज्य सरकार पुनः विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाये
आंदोलन कार्यक्रम:
8 अप्रेल 2026: जिला स्तर पर रैली को सफल बनाएं।
11 अप्रेल 2026: ब्लाक तहसील विधायक/सांसद को ज्ञापन सौंपें एवं उनसे केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने तथा राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कराने का अनुरोध करें।
18 अप्रेल 2026: माननीय मुख्यमंत्री से अनुरोध यात्रा में शामिल होकर रैली को सफल बनाएं।
संगठन प्रयास:
जगदीश यादव, राज्य शिक्षक संघ, शासकीय शिक्षक संघ द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है जनजाति कार्य विभाग से डी के सिंगोर्, ट्राईबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन परमानंद डेहरिया, nmops, मनोहर प्रसाद दुबे, प्रांतीय शिक्षक संघ और अन्य संगठन समूह तैयारी में है
जनप्रतिनिधियों द्वारा मा दर्शन सिंह चौधरी सांसद, सुमेरसिंह सौलंकी राज्य सभा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल सांसद हमारे पूर्व विद्यायक
मुरलीधर जी पाटीदार द्वारा भी राज्य व केंद्र सरकार तक विषय पहुंचाया गया है। एवं प्रदेश के कई विधायकों और मंत्रियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव जी को पत्र लिख कर गंभीर चिंता व्यक्त की है
अपील:
मित्रों, भ्रम में न रहें। जिस प्रकार सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं, उसी प्रकार शिक्षकों का भविष्य भी संकट में है। अन्य विभागों में कर्मचारियों को समायोजन मिलता है, परंतु यहाँ सेवा समाप्ति की स्थिति बनाई जा रही है। अब समय है एकजुट होकर सड़कों पर उतरने का और अपने अधिकारों के लिए मजबूत आवाज उठाने का।आंदोलन ही समाधान है।
ऑनलइन प्रशिक्षण NISHTA AUR दीक्षा APP मे हुए जिसमे अंतिम मे पोस्ट टेस्ट हुवा है जो NCTE पर आधारित था जिसके प्रमाण पत्र भी आये है . संविदा शाला शिक्षक पात्रता परीक्षा का नाम बदलकर टेट कर दिया क्योंकि एनसीटीई की गाइडलाइन आ गई लेकिन संविदा भर्ती के लिए ही टेट है क्योंकि 2018 के पहले तक संविदा भर्ती ही होती थी.
-हीरानंद नरवरिया-



