अमेरिका और इजरायल का हमला नहीं आया काम, ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम का नहीं हुआ बाल भी बांका- रिपोर्ट
ईरान के पास अब भी वे सेंट्रीफ्यूज और भूमिगत ठिकाने मौजूद हैं जहां यूरेनियम संवर्धित किया जा सकता है


अमेरिका और इजरायल के तमाम दावों के बीच एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है. महीनों की भारी बमबारी और मिसाइल हमलों के बावजूद ईरान का परमाणु कार्यक्रम सुरक्षित है. ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक ताजा रिपोर्ट ने पश्चिमी देशों की नींद उड़ा दी है. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने जिन लैब्स और रिसर्च सेंटर्स को तबाह करने का दावा किया था, उनके बावजूद ईरान के पास वे तमाम संसाधन अब भी मौजूद हैं, जो उसे परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना सकते हैं. रिपोर्ट दावा करती है कि ईरान अब भी परमाणु हथियार बनाने की राह पर है.
हमलों के बाद भी परमाणु हथियारों का आधार सुरक्षित
रिपोर्ट बताती है कि पांच हफ्तों तक चले भीषण हवाई हमलों के बाद भी ईरान के पास परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी ज्यादातर उपकरण और सामग्री सलामत है. हालांकि अमेरिकी हमलों ने कुछ लैब्स और यूरेनियम निकालने वाली जगहों (येलोकेक साइट्स) को नुकसान जरूर पहुंचाया है, लेकिन ईरान का मुख्य परमाणु ढांचा अब भी सक्रिय है.विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास अब भी वे सेंट्रीफ्यूज और भूमिगत ठिकाने मौजूद हैं, जहां वह यूरेनियम को हथियार बनाने लायक स्तर तक संवर्धित (एनरिच) कर सकता है.
ईरान ने अपना ‘वेपन्स-ग्रेड यूरेनियम’ का भंडार बचा लिया है. संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी के मुताबिक, ईरान के पास लगभग 1000 पाउंड (करीब 450 किलो) उच्च संवर्धित यूरेनियम है. इसका आधा हिस्सा तो इस्फ़हान की परमाणु साइट के नीचे बनी बेहद गहरी सुरंगों में ताबूतों में बंद कर सुरक्षित रखा गया है.
यूरेनियम को लेकर फिर होगा रार?
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट का कहना है कि ईरान ने संकेत दिया है कि वह अपने संवर्धित यूरेनियम को सरेंडर करने के लिए तैयार है. लेकिन अमेरिका के लिए असली चुनौती यह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में यूरेनियम संवर्द्धन को पूरी तरह बंद करने को अपनी ‘रेड लाइन’ घोषित कर दिया है. ट्रंप प्रशासन का रुख साफ है कि ईरान को जीरो परसेंट संवर्द्धन पर आना होगा. दूसरी ओर, ईरान इस भंडार को आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं है क्योंकि उसे पता है कि यही उसकी सबसे बड़ी ढाल है.
पिछले साल हुए 12 दिनों के युद्ध में अमेरिका ने अपने सबसे शक्तिशाली ‘मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर’ बमों का इस्तेमाल करके फोर्डो और नतांज़ जैसे ठिकानों पर हमला किया था. हालिया पांच हफ्तों की लड़ाई में अमेरिका ने ईरान के मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि इजरायल ने परमाणु वैज्ञानिकों और रिसर्च सेंटर्स पर फोकस किया. बावजूद इसके, ईरान के ‘पिकैक्स माउंटेन’ जैसे अभेद्य ठिकानों तक अमेरिकी हथियार भी नहीं पहुंच सके हैं. दावा किया जा रहा है कि ईरान बेहद गुप्त तरीके से अपना परमाणु काम जारी रख सकता है.



