नई भोपाल विकास योजना बिना मेट्रोपॉलिटन अधिसूचना अधूरी रह जाएगी
भोपाल और इंदौर मिलकर नया ट्विन मेट्रोपॉलिटन आर्क बना सकते हैं: मनोज मीक


भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की अधिसूचना राजधानी के लिए एक असाधारण प्रशासनिक कदम है, यह एक बड़े शहरी मोड़ की शुरुआत है। उपलब्ध विवरणों के अनुसार यह क्षेत्र 12098 वर्ग किमी में फैलेगा और इसमें 6 जिलों के 2510 गांव शामिल होंगे। क्षेत्रफल के लिहाज़ से यह प्लानिंग कैनवास मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के 6328 वर्ग किमी और बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन रीजन के लगभग 8005 वर्ग किमी से भी बड़ा है। लेकिन असली सवाल सिर्फ़ आकार का नहीं, सटीक दिशा का है।
भोपाल की ताकत उसके संयुक्त चरित्र में है। यह राज्य की राजधानी है, देश के बीच स्थित है, यह रीजन स्टोन एज से रहने योग्य रहा है, इसके पास बुद्ध का बोध और भोज की विरासत है, संस्थागत महत्व है, हरित और झीलों वाली पहचान है, और आगे चलकर नॉलेज, एआई, लॉजिस्टिक्स और नई अर्थव्यवस्था का स्वाभाविक आधार बन सकने की क्षमता है। इसलिए इसे सेंट्रल इंडिया के भावी कैपिटल रीजन प्लेटफॉर्म के रूप में देखा जाना चाहिए।
हमारी सबसे बड़ी चिंता यह है कि जब राजधानी का इतना बड़ा महानगरीय ढाँचा अधिसूचित हो गया है, तब भी नई ‘भोपाल विकास योजना’ 21 वर्ष से लंबित है। बिना नए मास्टर प्लान, मजबूत ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर, रीजनल कनेक्टिविटी, इकोनॉमिक नोड्स और साफ़ गवर्नेंस मॉडल के, इतनी बड़ी अधिसूचना केवल नक्शे का विस्तार बनकर रह सकती है। भोपाल के पास अभी भी वह अवसर है, जहाँ विकास को अव्यवस्था के बाद नहीं, बल्कि अव्यवस्था से पहले डिजाइन किया जा सकता है।
पश्चिम में इंदौर–उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन का भी बड़ा विजन सामने है। यदि इंदौर–उज्जैन और भोपाल, दोनों महानगरीय क्षेत्रों को दूरदृष्टि के साथ विकसित किया गया, तो मध्यप्रदेश देश के मध्य में एक नई ट्विन मेट्रोपॉलिटन ग्रोथ आर्क की नींव रख सकता है। अब समय भोपाल और इंदौर को नई विकास योजना, बड़े विजन और फाइनेंस योग्य परियोजनाओं के साथ वास्तव में कैपिटल रीजन की तरह गढ़ने का है।



