मध्य प्रदेश

सरकारी आवासों पर वर्षों से अवैध कब्जा कर रह रहे लोग 

संपदा, जिला प्रशासन और नगर निगम बेखबर 

भोपाल। शहर में अवैध कब्जा करने वालों के हौसले बुलंद हैं। राजधानी के नार्थ टीटी नगर में दशहरा मैदान और बाणगंगा के समीप बने संपदा के अधीन आई टाइप शासकीय आवासों में लोग वर्षों से अवैध कब्जा करके निवास कर रहे हैं। सबसे खास बात है कि यहां पर माफिया सक्रिय है जैसे ही वहां आवंटन किए गए शासकीय कर्मचारी द्वारा आवास खाली किया जाता है पहले से नजर जमाए लोग उनसे चाबी ले लेते हैं या ताला तोड़कर अपने लोगों को रहने के लिए दे देते हैं। अवैध कब्जा करने वालों में कुछ तो 10 वर्षों से अधिक समय से निवास कर रहे हैं।

वर्षों से कब्जा करके अवैध रूप से रह रहे कयी परिवार

गवर्नमेंट क्वार्टर 23/12 में संदीप जाटव का परिवार भी 6 वर्षों से अवैध रूप से रह रहा है। पहले वह जिस व्यक्ति को आवंटित था उससे सांठ-गांठ कर रह रहा था अब दो वर्षों से खुद कब्जा कर लिया। इसी तरह सामने की पंक्ति में एक सिंह परिहार और एक अन्य परिवार करीब 10 वर्षों से अवैध कब्जा कर निवास कर रहे हैं। इसी तरह काफी संख्या में लोग अवैध कब्जा करके शासकीय आवासों में निवास कर रहे हैं। संपदा, जिला प्रशासन और नगर निगम बेखबर है या स्थानीय नेताओं के दबाव में कार्रवाई नहीं की जा रही है। कस्तूरबा विद्यालय के पास से लेकर पलाश होटल के बीच तक बने आवासों में कई परिवार वर्षों से अवैध कब्जा करके बेखौफ होकर निवास कर रहे हैं।

शराबियों का अड्डा भी बने हैं शासकीय आवास
गवर्नमेंट क्वार्टर 23/13 पहले एक शासकीय कर्मचारी को आवंटित था लेकिन उनके देहांत के बाद परिवार नीलबड़ में रहने लगा लेकिन अब वहां पर एक स्थानीय नेता के संरक्षण में शराबियों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। शाम को करीब आठ बजे से 12 बजे तक शराब पीने वाले यहां बैठकर जाम छलकाते हैं।

शासकीय आवास को किराए पर चला रहा माफिया
गवर्नमेंट क्वार्टर 23/ 14 में एक स्थानीय दबंग कब्जा कर रखा है। वह करीब 5 वर्षों से एक टेंट हाउस वाले को प्रतिमाह 4 हजार रुपए पर किराए से दे रखा है। सरकारी आवासों पर कब्जा करके माफिया किराए से देकर कमाई कर रहा है।

नगर निगम को लगा रहे हैं लाखों का चूना
शासकीय आवासों में अवैध रूप से कब्जा करके रह रहे लोग अंधाधुंध नल के जल का उपयोग कर रहे हैं। कोई पानी का बिल या जल कर जमा करने की जरूरत नहीं है क्योंकि जिनके नाम मकान आवंटित थे वो खाली करके चले गए और नल का बिल उन्ही के नाम था। करीब 10 वर्षों से रह रहे लोग इतने समय में नगर निगम को लाखों का चूना लगा चुके हैं।

सेवानिवृत होने के बावजूद जमे हैं कयी परिवार
इन्हीं शासकीय आवासों में बहुत से परिवार नौकरी से सेवानिवृत हो चुके हैं फिर भी कब्जा करके अवैध रूप से रह रहे हैं इन्हें भी शासन प्रशासन की कार्रवाई का कोई भय नहीं है।

वर्जन

जानकारी नहीं है, लिखकर दे दीजिए जांच कराएंगे।

मनीषा सेंतिया अपर सचिव गृह एवं संपदा संचालक।

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