

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ। बुधवार सुबह 5:30 बजे एक चार पहिया वाहन सिविल अस्पताल के गेट पर रुका। चालक दौड़ता हुआ इमरजेंसी में पहुंचा और बताया कि मैं प्रतीक यादव का ड्राइवर हूं, उनकी तबीयत सही नहीं है। यह सुनते ही इमरजेंसी में तैनात मेडिकल अफिसर (RMO) डॉ. अनिल कुमार और डॉ. प्रिंस हड़बड़ा गए। डॉ. प्रिंस दो जूनियर डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट को लेकर फौरन उस गाड़ी में बैठकर प्रतीक यादव के घर पहुंचे।
डॉ. प्रिंस के मुताबिक, प्रतीक यादव बेसुध थे। पल्स चल नहीं रही थी। हार्ट बीट थम गई थी। उन्होंने डॉ. अनिल को यह बताया तो उन्होंने प्रतीक को अस्पताल लाने को कहा। सीएमएस डॉ. डीसी पांडेय ने बताया कि प्रतीक को सुबह 5:55 बजे अस्पताल लाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने प्रतीक को मृत लाया घोषित कर दिया। डॉ. पांडेय के मुताबिक, प्रतीक की मौत उनके घर पर ही हो चुकी थे।
29 अप्रैल को मेदांता में हुए थे भर्ती
इससे पहले, 29 अप्रैल को प्रतीक को मेदांता अस्पताल लाया गया था। असोसिएट डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन डॉ. रुचिल शर्मा के मुताबिक, सांस लेने में गंभीर दिक्कत और सीने में तकलीफ थी। जांच में ‘सब-मैसिव पल्मोनरी एम्बबेलिन्म की पुष्टि हुई, जो फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में खून का थक्का जमने से होती है। प्रतीक लंबे समय से उच्च रक्तचाप (एबटीएन) और डीप वेन ब्रोम्बोसिस (डीवीटी) से पीड़ित थे। उनका मेदांता में इलाज चल रहा था। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. इंद्रनील मुखोपाध्याय के मुताबिक, प्रतीक को हृदय संबंधी जटिलताएं भी हुई थी।
अस्पताल लाते समय शरीर पड़ गया था नीला
डॉक्टरों का कहना है कि प्रतीक को जब अस्पताल लाया गया तो उनका शरीर नीला पड़ गया था। ऐसे में मौत का कारा पता करने के लिए डॉक्टरों ने पुलिस को पोस्टमॉर्टम कराने की सलाह दी। डॉक्टरों के पैनल ने जांच के लिए विसरा सुरक्षित रख लिया। विसरा को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा, जहां से जांच रिपोर्ट आएगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतीक ने कोई संदिग्ध पदार्थ तो नहीं खाया था। बताया जा रहा है कि तबीयत बिगड़ने पर प्रतीक अपने कमरे से निकले थे। आशंका जताई जा रही है कि वह दवा खाने के लिए पानी लने किचन की तरफ गए थे। इसी दौरान अचेत हो गए। हालांकि , इस संबंध में प्रतीक के परिवार की तरफ से कोई बयान नहीं जारी किया गया है।
मिले चोटों के निशान
पोस्टमॉर्टम में प्रतीक के शरीर पर चोटों के कई निशान मिले हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, ये सभी ऐंटी मॉर्टम इंनरी के निशान हैं। इन चोटों के नीचे खून जमने के निशान थे यानी चोटें जीवित अवस्था में लगी थीं। मौत का कारण ‘मैसिव पल्मेनरी थ्रोम्बेएम्बोलिज्म के कारण ‘कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैपस’ बताया गया है।
यहां मिले चोट के निशान
- सीने के दाहिने हिस्से पर लगभग 14×7 सेमी की चोट
- दाहिने हाथ के पीछे और बगल के नीचे 19×12 सेमी की चोट।
- दाहिने हाथ, फोरआर्म पर 24×6 की लंबी चोट जो कोहनी से कलाई तक फैली हुई है
- दाहिने फोरआर्म पर 6×4 सेमी की चोट।
- दाहिनी कोहनी के पीछे 12×6 सेमी की चोट।
- बाई कलाई पर 3×2 सेमी की चोट।
कितनी पुरानी चोटें
- चोट नंबर 1,2,3 लगभग 5 से 7 दिन पुरानी है।
- चोट नंबर 4,5,6 लगभग 1 दिन पुरानी हैं।
पैनल ने किया पीएम
पोस्टमॉर्टम बुधवार सुबह 9:30 से 10:30 बजे के बीच हुआ। पीएम करने वाले मेडिकल पैनल में फोरेंसिक विभाग की प्रफेसर डॉ. मौसमी सिंह, सीनियर रेजिडेंट डॉ. फातिमा हर्षा और जूनियर रेजिडेंट ग्रेड-3 डॉ. हिमांशु पटेल शामिल रहे। पूरी प्रक्रिया विभागाध्यक्ष डॉ. अनूप वर्मा की देखरेख में कराई गई।



