बैंकर्स साहित्य एवं कला परिषद द्वारा द्वितीय पावस गोष्ठी का आयोजन


भोपाल। बैंक कर्मियों की संस्था “बैंकर्स साहित्य एवम कला परिषद, भोपाल” तथा “सागर सिल्वर स्प्रिंग्स वेलफेयर सोसाइटी” के संयुक्त तत्वावधान में, अयोध्या वायपास स्थित “सागर सिल्वर स्प्रिंग क्लब हाउस” में पावस गोष्ठी का आयोजन, चर्चित व्यंग्यकार श्री शारदा दयाल श्रीवास्तव के संयोजन में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार श्री गोकुल सोनी ने की। मुख्य अतिथि पूर्व वाइस चांसलर, जीवाजी राव विश्वविद्यालय डॉ विनोद सक्सेना, विशिष्ट अतिथि श्री राजेंद्र गुप्ता, सारस्वत अतिथि चर्चित साहित्यकार श्री सुरेश पटवा भी मंचासीन रहे। सरस और सफल संचालन संस्था सचिव श्री जयंत भारद्वाज ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं सुश्री पार्थिवी श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। संयोजक शारदा दयाल श्रीवास्तव ने सभी आमंत्रितों का स्वागत किया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री गोकुल सोनी ने कहा कि हम आज ऐसे विसंगति पूर्ण समय में जी रहे हैं, जब समाज विरोधी शक्तियां देश और समाज को खंड खंड करना चाहती हैं। परिवार नाम की कल्याणकारी संस्था को निरंतर, कभी स्त्री सशक्तिकरण के नाम पर, तो कभी मानव अधिकार के नाम पर तोड़ने का कुत्सित प्रयास हो रहा है, तब ऐसे विद्रूपतापूर्ण समय में साहित्य का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इसलिए कि साहित्य हमे मात्र करुणा, संवेदना, आत्मीयता, प्रेम, और विश्व बन्धुत्व के विचार ही नहीं देता, वरन् हमारे चिंतन को सही दिशा भी देता है। श्री सोनी ने पावस पर हास्य व्यंग्य में रचे बसे सरस दोहे प्रस्तुत करते हुए पढ़ा कि, “मेघ बरसते देख कर, ठेकेदार अधीर। गिर न जाए नया पुल, बहा न डाले नीर।।”
मुख्य अतिथि डॉ विनोद सक्सेना ने कहा कि भोपाल साहित्यिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत समृद्ध है। यहाँ साहित्यिक गतिविधियों से सक्रियता बनी रहती है। उन्होंने भोपाल के प्रबुद्ध साहित्यकार सुरेश पटवा के बहुविध लेखन की भूरी-भूरी सराहना की। विशिष्ट अतिथि श्री राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि क्लब साहित्यिक गतिविधियों के लिए हमेशा खुला है।
सारस्वत अतिथि श्री सुरेश पटवा ने अपने उद्बोधन में कहा कि क्लब को उनकी लिखित पुस्तक “हिंदू प्रतिरोध गाथा” भेंट कर क्लब में लाइब्रेरी शुरू करने की आवश्यकता प्रतिपादित करते हुए 20 पुस्तकें दान करने की घोषणा की और श्री गोकुल सोनी जिनसे भी इसी तरह पुस्तकें दान करने का निवेदन किया। जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। उन्होंने सुंदर रचना “प्यार सिर्फ़ चाँदनी नहीं, धूप का भी राग है, रूठना मनाना भी तो चाहत का अनुराग है, प्रस्तुत की।”
पुरुषोत्तम तिवारी ने “सुधा की बूँदे बरसने छन छनन”, संगीता भारद्वाज ने “बरखा के रिमझिम फुहार से पुलकित हिज धरती रानी”, सीमा अग्रवाल ने “कृष्ण तो कृष्ण है”, दिनेश गुप्ता ने “अंग्रेजी का जलवा है, हिंदी का उपहास हो रहा”,
शारदा दयाल श्रीवास्तव ने “चमत्कार को नमस्कार”, विजी श्रीवास्तव ने “ब्लाउज के सपने” व्यंग्य पाठ किया। डॉक्टर तिलोत्तमा आज़ाद ने “राघव के गूढ़ प्रश्न” कहानी का पाठ किया।
