ई-अटेंडेंस के आधार पर वेतन कटौती से शिक्षकों में बढ़ रही चिंता और पनप रहा असंतोष
भोपाल। राज्य शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव ने कहा है कि शिक्षकों का पक्ष सुने बिना केवल ई-अटेंडेंस के आधार पर वेतन काटने जैसी कार्रवाई न्यायोचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई से पूर्व उसका पक्ष सुनना प्राकृतिक न्याय का मूल सिद्धांत है।उन्होंने कहा कि आज का शिक्षक केवल कक्षा में अध्यापन ही नहीं करता, बल्कि अनेक शासकीय एवं गैर-शैक्षणिक दायित्वों का भी निर्वहन करता है। जनगणना, निर्वाचन, सर्वेक्षण, विभिन्न पोर्टलों परभीऑनलाइन जानकारी अपलोड करना तथा अन्य विभागीय कार्यों के साथ साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की जिम्मेदारी भी उसी पर होती है।
श्री जगदीश यादव ने कहा कि अधिकांश शिक्षक अपने बच्चों की उच्च शिक्षा, गृह ऋण, वाहन ऋण, परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों तथा स्वयं एवं अपने माता-पिता के स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से भी जूझ रहे हैं।इसके अतिरिक्त सेवा में रहते हुए टीईटी जैसी परीक्षाओं का दबाव भी अनेक शिक्षकों के मानसिक तनाव को बढ़ा रहा है।ऐसी परिस्थितियों में यदि तकनीकी कारणों या ई-अटेंडेंस की त्रुटियों के आधार पर बिना स्पष्टीकरण प्राप्त किए सीधे वेतन कटौती की जाती है, तो इससे शिक्षकों में भय, असुरक्षा और आक्रोश का वातावरण उत्पन्न हो रहा है,जिसका प्रतिकूल प्रभाव उनके मनोबल और शिक्षण कार्य पर पड़ रहा है।
राज्य शिक्षक संघ के अध्यक्ष जगदीश यादव ने माननीय मुख्यमंत्री ओर शिक्षा मंत्री जी से मांग की है कि ई-अटेंडेंस से संबंधित किसी भी कार्रवाई से पूर्व संबंधित शिक्षक को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाए,तकनीकी एवं वास्तविक परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच की जाए तथा संवाद और विश्वास पर आधारित व्यवस्था विकसित की जाए।उनका कहना है कि सम्मानित और तनावमुक्त शिक्षक ही विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकता है।


