
भोपाल 25 अगस्त। आज बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र के सभागार में केंद्र निदेशक श्री महेश सक्सेना के संयोजन में, कार्यक्रम साक्षात्कार श्रृंखला “बाल साहित्य संवाद~2” का आयोजन किया गया। श्रृंखला की द्वितीय कड़ी के रूप में वरिष्ठ बाल साहित्यकार श्रीमती मालती बसंत का साक्षात्कार वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी द्वारा लिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री महेश सक्सेना जी के स्वागत भाषण से हुआ। कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए श्री सक्सेना ने बताया कि इसमें प्रतिमाह किसी एक बाल साहित्यकार से पैंतालीस मिनट का साक्षात्कार होता है एवं अगले पैंतालीस मिनट में उनकी श्रेष्ठ रचनाओं का पाठ होता है।
ज्ञातव्य हो को वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती मालती बसंत की कुल 26 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें 18 पुस्तकें बाल साहित्य की हैं। उनको बाल साहित्य हेतु कई पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं एवं महामहिम राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा 26 जनवरी 2007 को बाल साहित्य पर चर्चा हेतु राष्ट्रपति भवन आमंत्रित भी किया गया था।
जब साक्षात्कारकर्ता श्री गोकुल सोनी ने श्रीमती मालती बसंत से पूछा कि वे बाल साहित्य कब से लिख रही हैं एवं लेखन हेतु वे अपना प्रेरणा स्रोत किसे मानती हैं तब श्रीमती बसंत ने बताया कि वे 12 वर्षों से लिख रही हैं एवं वे अपना प्रेरणा स्रोत चंपक, नंदन और बालवीर जैसी पत्रिकाओं को मानती हैं।
श्री सोनी ने बाल साहित्य से संबद्ध अनेकों प्रश्न पूछे जिनका श्रीमती बसंत ने बड़ी बेवाकी से अनेकों उदाहरणों के साथ रोचक एवं ज्ञानवर्धक शैली में उत्तर दिए। कुछ प्रश्न सदन में उपस्थित साहित्यकारों में से डॉ कर्नल गिरजेश सक्सेना, सरिता बाघेला, श्यामा देवी गुप्ता, रंजना शर्मा, संगीता भारद्वाज, डॉ सीमा अग्रवाल, सुनील चतुर्वेदी, सरोजलता सोनी, के द्वारा भी पूछे गए जिसका समुचित उत्तर श्रीमती बसंत ने दिया। उन्होंने अपनी रचना “चूहे चुहिया की शादी” एवं बाल उपन्यास “ज्ञान के अनमोल हीरे” सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग एवं मीडिया, वागर्थ, शब्द शक्ति अंतरा, तरंग तथा यू ट्यूब के माध्यम से प्रचार व्यवस्था सुप्रसिद्ध गीतकार मनोज जैन मधुर, बी एल गोहिया एवं सुनील चतुर्वेदी, ने संभाली।
श्रीमति बसंत से जब पूछ गया कि सरकार से इस क्षेत्र में उनकी क्या अपेक्षाएं हैं? तब उन्होंने बताया कि कोर्स की किताबों में नैतिक बालसाहित्य का पर्याप्त समावेश हो, तभी बच्चों का सर्वांगीण विकास किया जा सकेगा, क्योंकि बच्चे ही देश का भविष्य होते हैं। उनमें अच्छे संस्कारों के बीजारोपण से ही देश को अच्छे और जिम्मेदार नागरिक मिलेंगे। अंत में श्री मनोज जैन मधुर ने सभी का आभार माना। कार्यक्रम की लाइव स्ट्रीमिंग श्री हेमराज कुर्मी ने की। कार्यक्रम में हरिवल्लभ शर्मा, श्रीमती सीमा हरि शर्मा, अशोक निर्मल, हरिओम श्रीवास्तव, अशोक धमेंनियां, राजेंद्र गट्टानी, राजकुमार बरुआ, वर्षा ढोबले, मृदुल त्यागी, नीना सिंह सोलंकी एवं अन्य साहित्यकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।




