उप मुख्यमंत्री ने बसामन मामा गौवंश वन्य विहार का किया निरीक्षण अति वर्षा से उत्पन्न जलभराव का लिया जायजा, व्यवस्था दुरुस्त करने के दिए निर्देश

भोपाल 28 अगस्त 2026. उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने आज प्रातः प्रसिद्ध बसामन मामा गौवंश वन्य विहार का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने गौ माता की पूजा-अर्चना कर उन्हें अपने हाथों से गुड़ एवं भूसा खिलाया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने गौवंश वन्य विहार में चल रही प्राकृतिक खेती की गतिविधियों, नए गौ-शेड्स के निर्माण तथा हाल ही में हुई अति वर्षा के कारण परिसर में निर्मित जलभराव की स्थिति का बारीकी से जायजा लिया तथा आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इरीक्षण के दौरान पूर्व विधायक श्री केपी त्रिपाठी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारीगण तथा गौ सेवक उपस्थित रहे।
गौवंश की देखभाल और स्वच्छता के दिए निर्देश – परिसर का भ्रमण करते हुए उप मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए कि गौ माता के रहन-सहन, हरे चारे, स्वच्छ पानी और संपूर्ण परिसर की स्वच्छता की समुचित व्यवस्था हर हाल में सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बारिश और जलभराव के कारण गौवंश को किसी भी प्रकार की बीमारी या असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके लिए सभी आवश्यक सुधार कार्य तत्काल प्रभाव से पूरे किए जाएं।
गौ-संवर्धन और प्राकृतिक कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए वरदान – उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने गौवंश संवर्धन के साथ-साथ गौवंश वन्य विहार परिसर में की जा रही प्राकृतिक खेती के मॉडल का अवलोकन कर सराहना की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गौवंश की रक्षा और संवर्धन के साथ-साथ प्राकृतिक खेती का यह मॉडल न केवल पर्यावरण के लिए आवश्यक है, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए वरदान है। श्री शुक्ल ने कहा कि बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में जिस प्रकार गोबर और गोमूत्र के माध्यम से जैविक खाद एवं प्राकृतिक कीटनाशक तैयार कर खेती की जा रही है, वह पूरे विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है। यहाँ गौ-आधारित खादों से उपजाए जा रहे उत्पाद न केवल गुणवत्तापूर्ण हैं, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी हैं। उन्होंने मौके पर मौजूद कृषि एवं प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि बसामन मामा में किए जा रहे प्राकृतिक खेती के सफल प्रयोगों का प्रचार-प्रसार आस-पास के गांवों में किया जाए, ताकि स्थानीय किसान भी इससे प्रेरणा लेकर प्राकृतिक कृषि को अपना सकें।




