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दूध के नाम पर ‘सफेद जहर’: नूंह कर रहा पूरे NCR को बीमार, कारोबारियों के हौसले क्यों हैं बुलंद? ये रही सच्चाई

जिस दूध को बच्चे की सेहत और परिवार के पोषण का आधार माना जाता है, वही अगर मिलावटी हो तो यह सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। नूंह जिले में मिलावटी दूध, पनीर और घी के कारोबार के आरोप लंबे समय से सामने आते रहे हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि जिले में यह धंधा चोरी-छिपे नहीं, बल्कि कई जगहों पर संगठित तरीके से चल रहा है। इतना ही नहीं, यहां तैयार होने वाले मिलावटी दूध और इससे बने उत्पादों की आपूर्ति गुरुग्राम, फरीदाबाद, दिल्ली, नोएडा और मानेसर तक किए जाने के आरोप हैं।

कहां से आ रहा है इतना दूध?
नूंह में पशुपालन बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका का हिस्सा है। इसके बावजूद जानकारों का तर्क है कि जिले में जितना दूध बाहर भेजे जाने की बात सामने आती है, उतना उत्पादन होना संभव नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह अतिरिक्त दूध कहां से आ रहा है? आरोप है कि इसी मांग और आपूर्ति के अंतर का फायदा उठाकर कुछ लोग मिलावटी दूध तैयार कर बाजार में खपा रहे हैं।छापेमारी में पहले भी सामने आया मामला
मिलावटी दूध तैयार करने और बाहर भेजे जाने की शिकायतों पर समय-समय पर छापेमारी होती रही है। कई बार ऐसे मामले सामने आने का दावा किया गया है, जिनमें दूध या दूध से बने उत्पाद संदिग्ध पाए गए। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई लगातार और प्रभावी नहीं होने से इस कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है।

कैसे तैयार किया जाता है नकली दूध?
जानकारों के मुताबिक कुछ मामलों में पानी, दूध पाउडर, खाद्य तेल या अन्य पदार्थों का इस्तेमाल कर दूध जैसा मिश्रण तैयार किया जाता है। कुछ लोग इसमें अन्य रसायनों के इस्तेमाल की भी बात कहते हैं। हालांकि किसी भी उत्पाद में क्या मिलाया गया है, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद ही हो सकती है। यही कारण है कि बिना जांच किसी खास दूध या उत्पाद को मिलावटी घोषित करना उचित नहीं है।

रोजमर्रा की जरूरत के कारण मजबूरी
मिलावटी दूध की समस्या का एक पहलू यह भी है कि आम उपभोक्ता के पास हर बार दूध की शुद्धता जांचने का कोई आसान तरीका नहीं होता। शादी-विवाह और अन्य आयोजनों में बड़ी मात्रा में दूध, पनीर और घी की जरूरत होती है। ऐसे में कम कीमत या आसानी से उपलब्धता के कारण उपभोक्ता कई बार ऐसे उत्पाद खरीद लेते हैं।

क्या होना चाहिए
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को केवल शिकायत या विशेष अभियान तक सीमित कार्रवाई के बजाय नियमित सैंपलिंग, प्रयोगशाला जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

नामी कंपनियों की सप्लाई पर भी सवाल
नूंह से दूध खरीदने वाली कुछ नामी कंपनियों की सप्लाई को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। हालांकि किसी कंपनी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित दूध के नमूने और दस्तावेजों की जांच जरूरी है। प्रशासन को ऐसे मामलों में भी पारदर्शी जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए।

लोगों की सेहत से सीधा खिलवाड़
मेवात विकास मंच के महासचिव आसिफ अली चंदेनी का कहना है कि मेवात में मिलावटी दूध का खेल गंभीर चिंता का विषय है। उनके अनुसार प्रशासन को इस मामले में लगातार अभियान चलाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उनका कहना है कि मिलावट केवल खाद्य पदार्थों में धोखाधड़ी नहीं, बल्कि लोगों की सेहत से सीधा खिलवाड़ हैसमय-समय पर होती है जांच 
सिविल सर्जन नूंह ज्योत्सना ने कहा कि विभाग की ओर से समय-समय पर खाद्य पदार्थों की जांच कराई जाती है। कई मामले दर्ज हैं और कुछ मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि विभाग की कोशिश है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट न हो। इसके बावजूद यदि कहीं मिलावट का मामला सामने आता है तो जांच और कार्रवाई की जाएगी।

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