खबरमध्य प्रदेश

विकास कार्यों का लाभ जेनजी और जेन अल्फा को मिलेगा – उप मुख्यमंत्री शिक्षित होने के साथ संस्कारवान होना आवश्यक है – उप मुख्यमंत्री

भोपाल 05 सितम्बर 2026. अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में पंचकोष समग्र व्यक्त्वि विकास की भारतीय दृष्टि विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि संस्कारों के बिना सुगंध के फूल जैसी है। शिक्षित होने के साथ-साथ संस्कारवान होना आवश्यक है। आज जो विकास के प्रयास हो रहे हैं उनका पूरा लाभ जेनजी और जेन अल्फा को मिलेगा। भारत को 2047 तक विश्वगुरू और आर्थिक महाशक्ति बनाने का संकल्प देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने लिया है। इस संकल्प को पूरा करने की जिम्मेदारी युवाओं पर है। युवा शिक्षित होने के साथ-साथ संस्कारवान बने इसके लिए पंचकोष समग्र व्यक्तित्व विकास की भारतीय दृष्टि को अपनाना आवश्यक है। अच्छे संस्कार सांस्कृतिक मूल्य और सकारात्मक दृष्टिकोण युवाओं को सही लक्ष्यों की पूर्ति में सहायक होगा। कार्यशाला में जो गुरू ज्ञान दिया जा रहा है उसे विद्यार्थी अपने जीवन में उतारे तभी जीवन सफल होगा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन के उच्च लक्ष्य तय करने के साथ हमे जो प्राप्त है वहीं पर्याप्त है कि आत्मसंतुष्टि होनी चाहिए। जीवन को सही दिशा न मिलने पर युवा भटकर गलत रास्ते में चल पड़ते हैं। देश तेजी से विकास कर रहा है। देश विरोधीतत्व युवाओं को शाफ्टकॉर्नर बनाकर उनको पथ से विमुख करने का प्रयास कर रहे हैं। युवा इनसे सावधान रहें। देश का युवा सही राह पर चल पड़ा तो दुनिया में राज करने से उसे कोई नहीं रोक सकता है। अच्छे संस्कार और जीवन की सही दिशा ही हमे सफलता देगी। कार्यशाला में सांसद श्री जनार्दन मिश्रा ने कहा कि सनातन परंपरा के मूल्य और वैदिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान ने भी प्रमाणित किया है। शरीर और मन को संतुलित रखने पर पूरा जीवन संतुलित हो जाता है। इसके लिए योग, ध्यान और प्राणायाम आवश्यक है। पूरी दुनिया तनाव प्रबंधन के लिए इसका उपयोग कर रही है। युवा पीढ़ी प्राचीन ज्ञान के अच्छे मूल्यों को अपनाये। प्राचीन ग्रांथों में भी भ्रमित करने के लिए भी मिलावट कर दी गई है। सही ज्ञान को अपनाने पर ही आत्मबोध और आत्मचिंतन से आत्मसंतुष्टि होगी।
कार्यशाला में श्री शर्मा ने कहा कि समाज को बदलना है तो शिक्षा को बदलना होगा। आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लिए शिक्षा, संस्कृति का उत्थान आवश्यक है। कार्यशाला में विवेकानंद विश्वविद्यालय सागर के कुलगुरू डॉ. अजय तिवारी ने कहा कि गुरू ही शिष्य को सही मार्ग दिखलाते हैं। कबीरदास जी ने कहा है कि समुद्र की स्याही, धरती के सभी पेड़ों की कलम बनाकर धरती को किताब मानकर यदि गुरू का महात्म लिखा जाय वह भी कम होगा। जब शिष्य गुरू से श्रेष्ठ बन जाता है तभी गुरू को सच्चा सुख मिलता है। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुल गुरू श्री राजेन्द्र कुड़रिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने यह कार्यशाला विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के विकास के लिए नये द्वार खोलेगी। कार्यशाला के सहयोजक श्री रामभूषण मिश्र ने कार्यशाला के संबंध में जानकारी दी। कार्यशाला में गणमान्य नागरिक, प्राध्यापकगण तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यशाला का समापन कुल सचिव नीरजा नामदेव द्वारा आभार प्रदर्शन से हुआ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button