

कब्ज ऐसी परेशानी है जिससे कभी न कभी लगभग हर उम्र के लोगों को जूझना पड़ सकता है। इसमें मल कड़ा होने के साथ मलत्याग करने में परेशानी होती है। कई बार टॉयलेट में काफी देर बैठने के बावजूद पेट ठीक से साफ नहीं हो पाता और पूरे दिन पेट में भारीपन या असहजता महसूस होती रहती है। खानपान का कब्ज से सीधा संबंध हो सकता है और डाइट में फाइबर की कमी इसके कारणों में से एक मानी जाती है। ऐसे में रोज के खाने में फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करना मददगार हो सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भी कई ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताया है जो फाइबर के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।

नारी डेस्क: कब्ज ऐसी परेशानी है जिससे कभी न कभी लगभग हर उम्र के लोगों को जूझना पड़ सकता है। इसमें मल कड़ा होने के साथ मलत्याग करने में परेशानी होती है। कई बार टॉयलेट में काफी देर बैठने के बावजूद पेट ठीक से साफ नहीं हो पाता और पूरे दिन पेट में भारीपन या असहजता महसूस होती रहती है। खानपान का कब्ज से सीधा संबंध हो सकता है और डाइट में फाइबर की कमी इसके कारणों में से एक मानी जाती है। ऐसे में रोज के खाने में फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करना मददगार हो सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भी कई ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताया है जो फाइबर के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।
फाइबर से भरपूर कौन-कौन से फूड्स खाएं
फाइबर की कमी को पूरा करने के लिए बहुत मुश्किल या महंगी चीजों की जरूरत नहीं है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले कई अनाज, दालें, फल और सब्जियां फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। साबुत अनाज की बात करें तो जौ, ब्राउन राइस और गेहूं को डाइट में शामिल किया जा सकता है। वहीं दालों और लेगुम्स में राजमा और छोले जैसे विकल्प फाइबर के साथ दूसरे पोषक तत्व भी देते हैं। फलों में सेब, नाशपाती, एप्रिकॉट्स और बेरीज को फाइबर युक्त विकल्पों में शामिल किया जा सकता है। सब्जियों में गाजर, ब्रोकली और हरी पत्तेदार सब्जियां रोज के खाने का हिस्सा बनाई जा सकती हैं। इसके अलावा बादाम, अखरोट, चिया सीड्स और अलसी के बीज भी फाइबर पाने के अच्छे विकल्प हो सकते हैं। इन्हें स्नैक्स या भोजन के साथ सीमित मात्रा में शामिल करना आसान है।

आखिर फाइबर शरीर के लिए क्यों जरूरी है
फाइबर भोजन का एक जरूरी हिस्सा है, जो पाचन तंत्र को ठीक तरह से काम करने में मदद करता है। यह आंतों में मौजूद माइक्रोबायोम के लिए भी उपयोगी माना जाता है। माइक्रोबायोम पाचन तंत्र में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को सपोर्ट करता है। फाइबर पर्याप्त मात्रा में मिलने पर गट मोटिलिटी यानी आंतों की सामान्य गतिविधि को सपोर्ट करने में मदद मिल सकती है। इससे आंतों की मांसपेशियों के संकुचन और उनके तालमेल को भी बेहतर सपोर्ट मिलता है, जिससे भोजन और मल को पाचन तंत्र के जरिए आगे बढ़ने में मदद मिलती है।
कब्ज से बचने में कैसे मदद करता है फाइबर
फाइबर युक्त भोजन को डाइट में शामिल करने से मल का टेक्सचर बेहतर रखने और नियमित मलत्याग को सपोर्ट करने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि कब्ज की समस्या से परेशान लोगों को अक्सर डाइट में पर्याप्त फाइबर लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि, सिर्फ फाइबर बढ़ा देना ही काफी नहीं है। फाइबर के साथ पर्याप्त पानी और संतुलित खानपान भी जरूरी है। अगर अचानक बहुत ज्यादा फाइबर खाना शुरू कर दिया जाए और पानी पर्याप्त न लिया जाए, तो कुछ लोगों को गैस या पेट फूलने की समस्या भी हो सकती है।
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फाइबर के और भी हैं कई फायदे
फाइबर का फायदा केवल कब्ज तक सीमित नहीं माना जाता। फाइबर से भरपूर भोजन को संतुलित डाइट का हिस्सा बनाने से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा फाइबर युक्त भोजन हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करने, हेल्दी वजन मैनेजमेंट में मदद करने और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी भूमिका निभा सकता है। हालांकि, इन फायदों के लिए पूरी डाइट और लाइफस्टाइल भी महत्वपूर्ण होती है।

कब्ज होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं
कब्ज सिर्फ फाइबर की कमी के कारण ही नहीं होता। अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, कई अलग-अलग कारण कब्ज की समस्या से जुड़े हो सकते हैं। डाइट में फाइबर की कमी और खराब खानपान के अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी या अन्य तरल पदार्थ न लेना भी कब्ज की वजह बन सकता है। जरूरत से ज्यादा कैफीन का सेवन, कुछ दवाओं का प्रभाव और अधिक शराब पीना भी समस्या को बढ़ा सकता है। कुछ स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी कब्ज से जुड़ी हो सकती हैं। इनमें हाइपोथायराइड, न्यूरोपैथी और कुछ मनोवैज्ञानिक समस्याएं शामिल हैं। इसलिए अगर कब्ज लंबे समय तक बना रहता है या बार-बार परेशानी होती है, तो इसे केवल खानपान की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पेट को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में रखें संतुलन
कब्ज से बचने के लिए रोज के भोजन में फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को धीरे-धीरे शामिल किया जा सकता है। साबुत अनाज, दालें, फल, सब्जियां, नट्स और बीज इसके आसान विकल्प हैं। साथ ही दिनभर पर्याप्त पानी पीना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और मलत्याग की इच्छा को बार-बार न रोकना भी पाचन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी आदतें हैं। अगर कब्ज के साथ तेज पेट दर्द, खून आना, लगातार उल्टी या बिना वजह वजन कम होना जैसी समस्या हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। कुल मिलाकर, पेट को स्वस्थ रखने के लिए किसी एक ‘मैजिक फूड’ पर निर्भर रहने के बजाय रोज के खाने में पर्याप्त फाइबर, तरल पदार्थ और संतुलित भोजन को जगह देना ज्यादा बेहतर तरीका है।



