अध्यात्मखबर

सच्चे गहने सुंदर कपड़े, सब केवल श्रृंगार है, इंसान की असली मूरत तो, उसके ही व्यवहार है। — कवि लायन अरुण कुमार सोनी

प्रभात साहित्य परिषद’ द्वारा ‘व्यवहार’ विषय पर हिंदी भवन भोपाल में भव्य काव्य गोष्ठी आयोजित हुई।

भोपाल/ राजधानी भोपाल की प्रतिष्ठित एवं चर्चित राष्ट्रीय स्तर की संस्था ‘प्रभात साहित्य परिषद भोपाल’ द्वारा ‘व्यवहार’ विषय पर एक भव्य एवं गरिमामय काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। यह साहित्यिक आयोजन भोपाल स्थित हिन्दी भवन के नरेश मेहता कक्ष में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में साहित्यकारों, गीतकारों एवं प्रबुद्ध श्रोताओं ने सहभागिता की।
​कार्यक्रम का आयोजन वरिष्ठ गीतकार अशोक निर्मल के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में हुआ। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार महेश प्रसाद सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार बलराम गुमाश्ता और विशेष अतिथि के रूप में वरिष्ठ गीतकार डॉ. प्रतिभा द्विवेदी मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का बहुत ही सुव्यवस्थित एवं प्रभावपूर्ण संचालन डॉ. अनीता तिवारी द्वारा किया गया।

​सरस्वती वंदना और काव्य पाठ

समारोह का शुभारंभ मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके उपरांत डॉ. अनीता तिवारी ने मधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। काव्य गोष्ठी के प्रारंभ में आमंत्रित कवियों ने ‘व्यवहार’ विषय के विविध आयामों पर अपनी-अपनी संवेदनशील और विचारोत्तेजक रचनाएं प्रस्तुत कीं:
दिनेश मोहन श्रीवास्तव (विदिशा) ने सकारात्मक सोच का संदेश देते हुए पढ़ा:
“चलो अपना व्यवहार कुछ ऐसा बना लेते हैं…”
​कवि लायन अरुण कुमार सोनी (विदिशा) ने व्यवहार को मनुष्य का वास्तविक आभूषण बताते हुए कहा:
“सच्चे गहने सुंदर कपड़े, सब केवल श्रृंगार है,
इंसान की असली मूरत तो, उसके ही व्यवहार हैं।”
​प्रदीप कश्यप ने व्यवहार में आचरण के महत्व को रेखांकित करते हुए पढ़ा:
“आचरण हैं गलत सभी, ठीक नहीं व्यवहार,
उससे आश भलाई की रखना है बेकार।”
​चरणजीत सिंह कुकरेजा ने अपने विचार रखते हुए कहा:
“व्यवहार अपना रखना सद् ही सदा,
चाहे कोई अपना हो या कोई सगा।”
​डॉ. प्रतिभा द्विवेदी ने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए पंक्तियाँ पढ़ीं:
“सामाजिक सद्भाव का यही एक आधार,
मानव-मानव में रहे प्रेम का व्यवहार।”
​महेश प्रसाद सिंह (अध्यक्ष) ने व्यावहारिक जीवन में सोच-समझकर कदम उठाने की प्रेरणा देते हुए कहा:
“व्यवहार बनाने से पहले सार्थक चिन्तन किया करें,
फसल उगाने से पहले बीज परिक्षण किया करें।”
​कमल सिंह कमल ने आधुनिक समय में घटते मानवीय मूल्यों पर चोट करते हुए पढ़ा:
“देखो तो होने लगा रिश्तों का व्यापार,
लाभ-हानि को देखकर सब करते व्यवहार।”
​​इसी क्रम में लगभग 40 अन्य रचनाकारों ने भी व्यवहार, नैतिकता और सामाजिक मूल्यों पर केंद्रित अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ कर समां बांधा।

​संस्था को मिला आर्थिक संबल एवं आजीवन संरक्षक

साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर बढ़ावा देने वाली राष्ट्रीय स्तर की संस्था ‘प्रभात साहित्य परिषद, भोपाल’ को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम के दौरान ₹5,100/- (पाँच हज़ार एक सौ रुपये) की सहयोग राशि दान स्वरूप कवि लायन अरुण कुमार सोनी की ओर से भेंट की गई। इसके साथ ही उन्होंने संस्था की आजीवन संरक्षकता भी ग्रहण की। जिससे संस्था के सदस्यों एवं उपस्थित साहित्यकारों में अपार हर्ष व्याप्त रहा।

​आभार प्रदर्शन

कार्यक्रम के अंतिम चरण में संरक्षक वरिष्ठ गीतकार अशोक निर्मल ने पधारे सभी अतिथियों, विद्वान साहित्यकारों, काव्य पाठ करने वाले रचनाकारों तथा उपस्थित श्रोताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को सही दिशा देने और साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के अंत में विदिशा के राष्ट्रीय कवि स्वर्गीय जगदीश श्रीवास्तव जी को सभा द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस कार्यक्रम के सफल संपादन में संस्थापक अध्यक्ष रमेश नंद जी की विशेष भूमिका रही। जलपान के साथ इस गरिमामय काव्य गोष्ठी का समापन हुआ।

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