आयुष्मान योजना के अंतर्गत निजी अस्पतालों का सात माह से भी अधिक समय से लंबित भुगतान किया जाए
एन ए बी एच की अनिवार्यता समाप्त की जाए -डा. विशाल सिंह

भोपाल, 27 सितंबर 2026 | प्रदेश के निजी अस्पतालों, चिकित्सकों एवं चिकित्सा संगठनों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर आज भोपाल में विभिन्न प्रमुख चिकित्सा एवं अस्पताल संगठनों की संयुक्त प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बडी संख्या में अस्पताल संचालकों, चिकित्सकों तथा विभिन्न संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में सर्वसम्मति से यह स्पष्ट किया गया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अस्पतालों का महीनों से लंबित भुगतान तथा NABH की अनिवार्यता वर्तमान में चिकित्सा संस्थानों के सामने सबसे गंभीर मुद्दे हैं। इन दोनों विषयों पर अब स्पष्ट और समयबद्ध समाधान आवश्यक है।
सात माह से अधिक की पेंडेंसी स्वीकार्य नहीं
संगठन के पदाधिकारी डॉक्टर विशाल सिंह ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में अस्पतालों का भुगतान सात माह से भी अधिक समय से लंबित है। अस्पताल मरीजों का उपचार, दवाइयां, जांच, ऑपरेशन, चिकित्सकों एवं कर्मचारियों का वेतन तथा अन्य सभी खर्च अपने संसाधनों से वहन कर चुके हैं। सेवा प्रदान किए जाने के महीनों बाद भी भुगतान लंबित रहना अस्पतालों की आर्थिक व्यवस्था और योजना की स्थिरता, दोनों के लिए गंभीर समस्या बन चुका है।
संयुक्त संगठनों की प्रमुख मांग है कि वर्तमान पोर्टल, पुराने पोर्टल, सी पी डी रिजेक्ट तथा अन्य कारणों से लंबित सभी पात्र क्लेम और भुगतान का एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पूर्ण निपटारा किया जाए। भविष्य के लिए भी भुगतान एम ओ यु के अनुसार हो और अनावश्यक विलंब होने पर जवाबदेही तय हो। संगठन के संयुक्त सचिव पंकज कुमार शर्मा ने कहा कि किसी वास्तविक उपचार पर अस्पताल द्वारा खर्च किए जाने के बाद केवल तकनीकी, प्रक्रियात्मक अथवा व्याख्या संबंधी कारणों से उसका पूरा भुगतान रोक देना न्यायसंगत नहीं है।
संयुक्त बैठक में स्पष्ट किया गया कि NABH accreditation को अनिवार्य बनाने की किसी भी व्यवस्था को चिकित्सा एवं अस्पताल संगठन स्वीकार नहीं करेंगे।
NABH को स्वैच्छिक एवं incentive-based रखा जाना चाहिए। अस्पतालों के लिए गुणवत्ता एवं patient-safety standards आवश्यक है. लेकिन ये मानक अस्पताल की श्रेणी, बेड क्षमता, उपलब्ध संसाधनों, भौगोलिक स्थिति और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप व्यावहारिक होने चाहिए।
बैठक में सर्वसम्मति से यह स्पष्ट किया गया कि लंबित आयुष्मान भुगतान का समयबद्ध पूर्ण निपटारा और NABH की अनिवार्यता समाप्त करना संयुक्त संगठनों की प्रमुख और non-negotiable demands हैं।
इसके अतिरिक्त अस्पतालों पर अलग-अलग विभागों द्वारा बार-बार लाइसेंस इशू करवाने की बजाये सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया जाए।
संगठनों ने कहा कि किसी अस्पताल का पंजीयन निलंबित अथवा निरस्त करने, अस्पताल बंद कराने या किसी अन्य गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई से पहले पर्याप्त नोटिस, जवाब प्रस्तुत करने का अवसर, निष्पक्ष सुनवाई और कारणयुक्त आदेश सुनिश्चित होना चाहिए।
बैठक में डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों एवं अस्पतालों के विरुद्ध हिंसा, धमकी, तोड़फोड़ और intimidation की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए Doctors Protection Act सहित मौजूदा कानूनी प्रावधानों के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन की मांग की गई।
डॉक्टरों, विशेषज्ञों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स की वास्तविक उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक नियम बनाए जाएं।
सरकारी चिकित्सकों एवं मेडिकल कॉलेज फैकल्टी से संबंधित रिक्त पदों, अत्यधिक कार्यभार, पदोन्नति, स्थानांतरण, workplace safety, service conditions तथा अनावश्यक non-clinical duties जैसे विषयों के समाधान के लिए भी प्रभावी एवं समयबद्ध व्यवस्था की मांग की गई।
स्वास्थ्य नीति डॉक्टरों और अस्पतालों से संवाद के बिना न बने
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि डॉक्टरों और अस्पतालों को प्रभावित करने वाली किसी भी महत्वपूर्ण नीति, योजना अथवा regulatory change को लागू करने से पहले मान्यता प्राप्त चिकित्सा एवं अस्पताल संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।




