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मोहम्मद आरिफ खत्री ने श्रीलंका में किया बाग प्रिंट का प्रदर्शन, भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने सराही कला

कोलंबो में ‘सीलोन क्राफ्ट वीक 2026’ के दौरान धार जिले के बाग के शिल्पकार मोहम्मद आरिफ खत्री ने साझा की बाग प्रिंट की सदियों पुरानी परंपरा; उच्चायुक्त की पत्नी श्रीमती तनुजा झा ने भी दिखाई विशेष रुचि।

भोपाल 30 अक्टूबर 2026
हाथों से तराशे गए लकड़ी के ब्लॉक, प्राकृतिक रंगों की खूबसूरती और सदियों से संजोई गई छपाई की परंपरा—मध्यप्रदेश की बाग प्रिंट कला ने कोलंबो में अपनी अलग छाप छोड़ी। श्रीलंका के कोलंबो शहर में 29 अक्टूबर से 1 नवंबर तक आयोजित ‘इंडो-श्रीलंका सीलोन क्राफ्ट वीक 2026’ के दौरान धार जिले के बाग के शिल्पकार मोहम्मद आरिफ खत्री ने अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन करते हुए भारतीय हस्तशिल्प की विशिष्टता को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया।

इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग के उच्चायुक्त श्री संतोष झा की उपस्थिति ने भारतीय पारंपरिक शिल्पकला के इस प्रदर्शन को विशेष महत्व प्रदान किया। इस अवसर पर बाग प्रिंट शिल्पकार मोहम्मद आरिफ खत्री ने उच्चायुक्त, भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों एवं अन्य अतिथियों को बाग प्रिंट की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक हाथ से ब्लॉक छपाई की तकनीक, प्राकृतिक रंगों के उपयोग तथा पीढ़ियों से चली आ रही इस समृद्ध शिल्प परंपरा के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

बाग प्रिंट के प्रति श्रीमती तनुजा झा ने भी दिखाई विशेष रुचि

भारतीय उच्चायुक्त श्री संतोष झा की पत्नी श्रीमती तनुजा झा ने भी बाग प्रिंट की पारंपरिक कला और इसके हस्तनिर्मित वस्त्रों में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने बाग प्रिंट की बारीकियों और इसकी पारंपरिक विशेषताओं को समझा तथा इस कला से तैयार साड़ियों को पसंद करते हुए उनकी खरीदारी भी की। यह प्रसंग भारतीय पारंपरिक हस्तशिल्प के प्रति उनकी रुचि और बाग प्रिंट की विशिष्ट कलात्मक अपील के को रेखांकित करता है।

बाग प्रिंट की साड़ियों और वस्त्रों की विशेषता उनके पारंपरिक डिजाइन, प्राकृतिक रंगों की गहराई और हाथ से की जाने वाली छपाई में निहित है। प्रत्येक वस्त्र में कारीगर का कौशल, धैर्य और पारंपरिक ज्ञान दिखाई देता है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर इन वस्त्रों का प्रदर्शन भारतीय हस्तनिर्मित उत्पादों की विशिष्ट पहचान को सामने लाने का महत्वपूर्ण अवसर बना।

यूनेस्को और विश्व शिल्प परिषद के प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित हैं आरिफ खत्री

बाग प्रिंट की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मोहम्मद आरिफ खत्री का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे यूनेस्को तथा विश्व शिल्प परिषद के प्रतिष्ठित अवार्ड ऑफ़ एक्सीलेंस से सम्मानित हो चुके हैं। वे थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी अपनी पारंपरिक बाग प्रिंट कला का प्रदर्शन कर चुके हैं।

पीढ़ियों की विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का प्रयास

मोहम्मद आरिफ खत्री बाग की पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग कला को देश-विदेश में पहचान दिलाने तथा नई पीढ़ी तक इस विरासत का ज्ञान पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। ‘सीलोन क्राफ्ट वीक 2026’ में उनकी सहभागिता ने मध्यप्रदेश की पारंपरिक कला को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर दिया।

इस आयोजन का संयुक्त आयोजन श्रीलंका सरकार के उद्योग एवं उद्यमिता विकास मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय शिल्प परिषद तथा कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग के स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र द्वारा किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारत और श्रीलंका के बीच पारंपरिक शिल्पकला, हस्तनिर्मित उत्पादों और सांस्कृतिक विरासत के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना है।

बाग प्रिंट की यह अंतरराष्ट्रीय सहभागिता केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, भारतीय शिल्पकारों के कौशल और भारत-श्रीलंका के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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