‘जागृति’ के दिव्य प्रकाश और एकत्व के संदेश से आलोकित हुआ 79वाँ वार्षिक निरंकारी संत समागम
देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हुए शामिल, भोपाल जोन से हजारों भक्तों ने की सहभागिता

भोपाल, 30 अक्टूबर 2026आध्यात्मिक जागृति, प्रेम, भक्ति और मानव एकत्व के दिव्य संदेश से ओतप्रोत 79वाँ वार्षिक निरंकारी संत समागम 23 से 26 अक्टूबर तक समालखा (हरियाणा) स्थित निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ आयोजित हुआ। परम श्रद्धेय सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन छत्रछाया में संपन्न इस चार दिवसीय समागम में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं सहित भोपाल जोन से हजारों भक्तों ने सहभागिता कर सतगुरु के दिव्य दर्शन एवं पावन संदेशों का लाभ प्राप्त किया।
इस वर्ष समागम का केंद्रीय विषय ‘जागृति’ रहा। प्रथम दिवस ‘मानवता के नाम संदेश’ में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने प्रेरित करते हुए फरमाया कि वास्तविक जागृति तभी आती है, जब मनुष्य प्रत्येक पल परमात्मा की उपस्थिति का एहसास करते हुए आध्यात्मिकता को अपने जीवन में धारण करता है। ब्रह्मज्ञान जागृति का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि उसकी शुरुआत है। सत्संग से प्राप्त शिक्षाओं को अपने व्यवहार में अपनाना, प्रेम एवं विनम्रता से जीवन जीना तथा अहंकार और निंदा से दूर रहना ही सच्ची आध्यात्मिकता की पहचान है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस एवं आध्यात्मिक संदेश
समागम के प्रथम दिवस ‘मानवता के नाम संदेश’ कार्यक्रम से पूर्व विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें देशभर से आए पत्रकारों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने सहभागिता की तथा समागम की आध्यात्मिक विचारधारा, उद्देश्यों और जनकल्याणकारी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।
दूसरा दिन
सेवादल रैली –
दूसरे दिन भव्य सेवादल रैली का आयोजन हुआ, जिसमें देश-विदेश से आए हजारों सेवादल भाई-बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शारीरिक व्यायाम, खेलकूद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं लघु नाटिकाओं के माध्यम से अनुशासन, सहयोग और निःस्वार्थ सेवा की भावना को प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर मिशन के शांति एवं एकत्व के प्रतीक श्वेत ध्वज का ध्वजारोहण भी किया गया।
सेवादल को आशीर्वाद देते हुए सतगुरु माता जी ने संदेश दिया कि सेवा केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न अंग है। सच्चा सेवादार वही है, जो निरंकार को हृदय में बसाकर हर परिस्थिति में मानवता के कल्याण के लिए तत्पर रहे।
इसी दिन सतगुरु माता जी ने जागृति के वास्तविक स्वरूप को स्पष्ट करते हुए कहा कि जागरूकता केवल बाहरी सजगता तक सीमित नहीं, बल्कि विचारों, भावनाओं और व्यवहार में भी चेतना आवश्यक है। इससे पूर्व निरंकारी राजपिता रमित जी ने दृष्टिहीन व्यक्ति और लालटेन के उदाहरण से समझाया कि केवल बाहरी स्वरूप अपनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि जीवन में ब्रह्मज्ञान, प्रेम और समर्पण का प्रकाश निरंतर जागृत रहना चाहिए। इस अवसर पर चिश्ती फाउंडेशन द्वारा सतगुरु माता जी को ग्लोबल पीस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
निरंकारी प्रदर्शनी
समागम में आधुनिक तकनीक एवं आकर्षक प्रस्तुतियों से सुसज्जित निरंकारी प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। इसे मुख्य प्रदर्शनी, बाल प्रदर्शनी तथा संत निरंकारी चौरिटेबल फाउंडेशन (एस.एन.सी.एफ.) प्रदर्शनी सहित तीन भागों में विभाजित किया गया था। इन माध्यमों से मिशन की आध्यात्मिक शिक्षाओं, सामाजिक सेवाओं और मानव कल्याण के कार्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
तीसरा दिन
समागम के तीसरे दिन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने प्रवचनों में संदेश दिया कि हर परिस्थिति में परमात्मा के प्रेम में स्थिर रहना ही सच्ची जागृति है। निरंकारी राजपिता रमित जी ने भी प्रेरित किया कि जहाँ परिस्थितियों में परिवर्तन संभव हो, वहाँ सकारात्मक प्रयास करने चाहिए और जहाँ परिवर्तन संभव न हो, वहाँ उन्हें सहजता से स्वीकार करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
इस अवसर पर हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सतगुरु माता जी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। अनेक जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने भी सतगुरु माता जी और निरंकारी राजपिता जी के दर्शन किए।
समागम में दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी प्रवेश द्वारों पर व्हीलचेयर, आवास, भोजन एवं पेयजल की विशेष व्यवस्था की गई। कार्यक्रमों के सुगम अवलोकन के लिए स्क्रीन भी लगाई गईं।
स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत परिसर में 8 एलोपैथिक एवं 6 होम्योपैथिक डिस्पेंसरी, 15 प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, एक कायरोप्रैक्टिक शिविर तथा 15 आईसीयू सुविधाओं से युक्त 120 बिस्तरों वाला अस्थायी अस्पताल स्थापित किया गया। आपातकालीन सेवाओं के लिए मिशन की 12 और हरियाणा सरकार की 30 एम्बुलेंस उपलब्ध रहीं, जिनमें 15 वेंटिलेटर युक्त थीं। कायरोप्रैक्टिक शिविर में भारत एवं विदेशों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सेवाएँ प्रदान कीं।
श्रद्धालुओं के लिए परिसर में चार स्थानों पर विशाल लंगर व्यवस्था की गई, जहाँ दिन-रात भोजन उपलब्ध कराया गया। इसके अतिरिक्त 22 कैंटीनों में रियायती दरों पर अल्पाहार, चाय, कॉफी एवं पेयजल की सुविधा प्रदान की गई। सामूहिक रूप से लंगर ग्रहण करते श्रद्धालुओं के माध्यम से समानता और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना साकार होती दिखाई दी।
चौथा दिन
समापन दिवस पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि ब्रह्मज्ञान की वास्तविक सार्थकता उसे जीवन में अपनाने तथा विचारों, व्यवहार और कर्मों में उतारने में है। चार दिनों तक चले इस आध्यात्मिक आयोजन का समापन प्रेम, भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत वातावरण में हुआ। श्रद्धालु सतगुरु के संदेशों से प्रेरणा एवं मधुर स्मृतियाँ लेकर अपने-अपने गंतव्यों की ओर प्रस्थान करने लगे।
इस वर्ष समागम के चारों दिन आयोजित कवि दरबार भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें बाल कवियों सहित महिला एवं पुरुष कवियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कुल 80 कवियों ने ‘जागृति’ विषय पर हिंदी, राजस्थानी, पंजाबी, अंग्रेजी, हरियाणवी, मुल्तानी, मराठी, भोजपुरी एवं संस्कृत सहित विभिन्न भाषाओं में अपनी स्वरचित कविताओं का भावपूर्ण प्रस्तुतिकरण किया।
सामूहिक सादे विवाह में 126 नवयुगल परिणय सूत्र में बंधे
79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के समापन उपरांत समालखा में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन उपस्थिति में सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर 126 नवयुगलों ने सादगीपूर्ण समारोह में परिणय सूत्र में बंधकर अपने नवजीवन का शुभारंभ किया और सतगुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया।
समारोह का शुभारंभ पारंपरिक जयमाला एवं निरंकारी सांझा-हार से हुआ। मिशन की प्रधान आदरणीय राजकुमारी जी एवं अन्य कार्यकारिणी सदस्यों ने नवविवाहित जोड़ों को सांझा-हार पहनाकर उनके सुखमय दांपत्य जीवन की मंगलकामना की। इसके पश्चात हिंदी में भक्तिमय निरंकारी लावों का गायन हुआ, जिनमें प्रेम, विश्वास, सम्मान और समर्पणपूर्ण गृहस्थ जीवन की शिक्षाएँ समाहित थीं। अंत में सतगुरु माता जी एवं निरंकारी राजपिता जी ने नवयुगलों पर पुष्पवृष्टि कर उन्हें सुख, शांति एवं आनंदमय जीवन का आशीर्वाद दिया।
सतगुरु माता जी ने नवविवाहित जोड़ों को प्रेरित करते हुए कहा कि सामूहिक विवाह का भाव केवल एक आयोजन तक सीमित न रहकर जीवन जीने का आदर्श बनना चाहिए। पति-पत्नी समान रूप से अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हुए प्रेम, विश्वास और आपसी तालमेल के साथ जीवन की हर परिस्थिति का सामना करें तथा एक-दूसरे के पूरक बनकर आगे बढ़ें।
संत निरंकारी मंडल के सचिव आदरणीय श्री जोगिंदर सुखीजा जी ने जानकारी दी कि समाज कल्याण विभाग के सहयोग से आयोजित इस समारोह में बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड एवं पश्चिम बंगाल सहित ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा से आए नवयुगलों ने सहभागिता की। विभिन्न भाषाओं, क्षेत्रों और संस्कृतियों से आए 126 जोड़ों का एक साथ विवाह बंधन में बंधना समानता, एकत्व और वैश्विक भाईचारे का सुंदर उदाहरण बना।
इस प्रकार 79वाँ वार्षिक निरंकारी संत समागम आध्यात्मिक जागृति, प्रेम, सेवा, समर्पण और मानवता के संदेश के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन अनेकता में एकता और संपूर्ण मानव परिवार को प्रेम के सूत्र में बाँधने की प्रेरणादायी मिसाल बना।



