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कैबिनेट ने की थी स्वीकृति जारी, सात साल से कुंभकरणी निद्रा में अधिकारी

– स्टेट गैरेज में पद संरचना के अनुसार भर्ती करने की फिर उठी मांग
भोपालभोपाल 15 जुलाई। गृह विभाग के अधीन संचालित स्टेट गैरेज में पिछले सात साल बाद भी स्वीकृत पदों को नहीं भरा गया है। कर्मचारियों की निरंतर हो रही कमी के बीच मौजूदा बल का दर्द सामने आया है। मांग उठाई गई है कि तत्काल पदपूर्ति की जाए। चालकों ने सवाल उठाया है कि जब 2018 में मंत्री परिषद ने 34 पदों को भरने की स्वीकृति दी थी तो आखिर इस कार्य में विलंब क्यों हो रहा है। आरोप लगाया गया है कि एक तरफ जहां बेरोजगारों का भविष्य दफन करने की चाल चली जा रही है। वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारी व्यवस्थाओं को चौपट कर रहे हैं।

– वर्ष 2018 में मिली थी पद भरने की मंजूरी- मोहम्मद जफर
– शासकीय अर्धशासकीय वाहन चालक यांत्रिक कर्मचारी कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद जफर का कहना है कि वर्ष 2018 में सरकार की कैबिनेट ने रिक्त पड़े 33 वाहन चालकों के पद भरने की मंजूरी प्रदान की थी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट का निर्णय होने के बाद निरंतर अधिकारियों से मांग की गई। इसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब पद नहीं भरने के कारण हर दिन वाहन चालक परेशानी उठा रहे हैं। क्योंकि मंत्रियों की गाड़ियां चलाने में दिन-रात काम करना पड़ रहा है। जबकि बल की कमी है। बेरोजगार भी प्रतीक्षा मित्र के यहां भर्ती होगी तो उन्हें रोजगार मिलेगा लेकिन इन उम्मीदों पर भी पानी फेर कर रख दिया गया है।
– – तत्काल की जाए गैराज में पद पूर्ति- प्रताप सिंह
– संगठन में स्टेट गैरेज विभागीय समिति के अध्यक्ष प्रताप सिंह का कहना है कि निरंतर संघर्ष करने के बाद मंत्रिपरिषद ने खाली पदों को भरने की मंजूरी प्रदान की थी। इसके लिए कई बार आंदोलन किए गए। मंत्रियों से लेकर अधिकारियों तक को ज्ञापन के माध्यम से गुहार लगाई गई। उम्मीद थी कि कैबिनेट का निर्णय होने के तत्काल बाद गृह विभाग के अधीन स्टेट गैरेज में खाली पद भरे जाएंगे। लेकिन साथ साल बाद भी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है। जबकि दिन-रात मंत्रियों की गाड़ियां चलानी पड़ रही। इस कारण मौजूदा वाहन चालकों के कंधों पर दोहरा भार आ रहा है। इस संदर्भ में सीएम एवं प्रमुख सचिव से मुलाकात करने जा रहे हैं। मांग की जाएगी कि तत्काल पदों को भरा जाए।
– आचार संहिता हटते ही भरना चाहिए पद- सुरेंद्र मालवीय
– संगठन के सदस्य सुरेंद्र मालवीय का कहना है कि कैबिनेट का निर्णय है। इसलिए शासन को किसी से मंजूरी की जरूरत नहीं है। तत्काल राज्य सरकार को पद भरने की प्रक्रिया अपनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जब पर्याप्त अमला रहेगा तो काम को गति मिलेगी। अब मौजूदा समय में यदि कोई वाहन चालक बीमार होता है तो उसकी जगह दूसरे की भरपाई करना मुश्किल हो रहा है। क्योंकि कर्मचारी फिक्स है जबकि मंत्रियों के इधर गाड़ी चलाने का काम अधिक है। सरकार को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए।

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