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विद्युत क्षेत्र का पूर्ण निजीकरण देश की सुरक्षा के लिए खतरा : अ.भा. विद्युत मजदूर महासंघ।

भोपाल/नई दिल्ली। अखिल भारत विद्युत मजदूर महासंघ (ABVMMS) ने विद्युत क्षेत्र के पूर्ण निजीकरण को देश की ऊर्जा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। महासंघ के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रमेश नागर ने बताया कि 9 एवं 10 जनवरी 2026 को हैदराबाद (तेलंगाना) में आयोजित महासंघ की राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक में लिए गए निष्कर्षों एवं निर्णयों से केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को अवगत कराया गया।
इसी परिप्रेक्ष्य में 12 जनवरी 2026 को केंद्रीय विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित ट्रेड यूनियनों की ऑनलाइन परामर्श बैठक में ABVMMS ने अपना पक्ष प्रमुखता से रखा। बैठक में महासंघ के अध्यक्ष श्री मधुसूदन जोशी एवं महामंत्री श्री डी. राजामुरुगन ने भाग लिया। बैठक में महासंघ को सर्वप्रथम अपनी बात रखने का अवसर प्रदान किया गया।
महामंत्री श्री डी. राजामुरुगन ने कहा कि यदि विद्युत क्षेत्र का पूर्ण निजीकरण किया गया, तो देश में विमान सेवाओं जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जहां अत्यधिक शुल्क, सेवाओं में अनिश्चितता और आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बिजली देश की जीवनरेखा है और इसे केवल निजी लाभ के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
महासंघ ने मांग की कि प्रत्येक राज्य में कम से कम एक सरकारी विद्युत वितरण कंपनी (DISCOM) का होना अनिवार्य किया जाए तथा ट्रांसमिशन प्रणाली को पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रखा जाए, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय है। साथ ही ABVMMS ने विद्युत संशोधन विधेयक–2025 के सकारात्मक प्रावधानों—जैसे साइबर सुरक्षा को मजबूत करना, डिजिटल सुधार एवं प्रशासनिक पारदर्शिता—का स्वागत भी किया।
बैठक के अंत में केंद्रीय विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल ने कहा कि ABVMMS द्वारा प्रस्तुत सुझावों तथा सरकारी विद्युत संस्थाओं को बनाए रखने की मांग पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी।
इसी क्रम में महासंघ की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक हैदराबाद में 9 एवं 10 जनवरी को संपन्न हुई, जिसमें देशभर से पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल हुए। बैठक में बिजली क्षेत्र में बढ़ते निजीकरण, संविदा कर्मियों के नियमितीकरण, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, वेतन विसंगतियां, कार्यस्थल सुरक्षा एवं श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
महामंत्री श्री डी. राजामुरुगन ने चेतावनी दी कि यदि विद्युत कर्मियों की लंबित मांगों की अनदेखी की गई, तो महासंघ राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
श्री राम विलास टाले राष्ट्रीय मंत्री ने बताया कि बैठक में आगामी आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई तथा संगठन को और अधिक सशक्त बनाने, सदस्यता बढ़ाने एवं युवाओं को संगठन से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।
राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक का समापन एकजुटता के संकल्प के साथ हुआ।

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