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इंजीनियर की मौत: युवराज मरा नहीं सिस्टम ने मारा, हादसे की गंभीरता नहीं समझे अधिकारी; सामने आईं कई कमियां

बीते शुक्रवार रात को ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 के पास हुए दर्दनाक हादसे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार समेत डूबने से मौत हो गई थी। जिस कार में मृतक युवराज मेहता थे उसे एनडीआरएफ की टीम ने हादसे के करीब तीन दिन बाद पानी से बाहर निकाल लिया है। इस मामले में अब जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही वैसे-वैसे अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है।

ग्रेटर नोएडा सेक्टर-150 में इंजीनियर की मौत की घटना में विभागीय तालमेल की कमी दिखी है। कोई वरिष्ठ स्तर का अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इस कारण करीब दो घंटे के समय में जरुरी इंतजाम नहीं कर सके। तब तक इंजीनियर पानी में डूब गया।

टायर व ट्यूब तक का इंतजाम नहीं कर सके
अगले दिन भी अफसरों ने घटना को गंभीरता से नहीं मिला, लेकिन अब जब घटना में लापरवाही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है तो विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने का प्रयास कर रहे हैं। लोगों का भी कहना है कि टायर व ट्यूब तक का इंतजाम नहीं कर सके। हादसे का सही आकलन नहीं होने पाने से यह स्थिति बनी।

पिता करते रहे रेस्क्यू का इंतजार
नोएडा की टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी निवासी युवराज की कार 16 जनवरी की रात सेक्टर-150 स्थित एक बिल्डर प्रोजेक्ट के गड्ढे में भरे पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई थी। कार करीब 12 बजे पानी में गिरी थी, उसके बाद मृतक करीब दो घंटे तक मदद का इंतजार करता रहा। पिता भी बाहर बैठकर रेस्क्यू करने का इंतजार किया। पुलिस और दमकल विभाग मौके पर पहुंच चुके थे, लेकिन उनके पास कोई ऐसा साधन नहीं था, जिससे इंजीनियर को पानी से बाहर निकाला जा सके। एसडीआरएफ व एनडीआरएफ का इंतजार किया गया, लेकिन तब तक इंजीनियर पानी में डूब चुका था और उसने हाईटेक जिले की व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया।

दिखी तालमेल की कमी
घटना में मृतक को बचाने में विभागीय तालमेल की कमी दिखी। इसकी चर्चा अफसरों के साथ-साथ लोगों में भी काफी है। सभी का कहना है कि पुलिस से लेकर प्रशासन और प्राधिकरण को कोई अफसर घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था। अगर डीएम, डीसीपी जैसे अधिकारी मौके पर पहुंचते तो जरूर कोई न कोई रास्ता युवक को बचाने के लिए निकाला जा सकता था। सही फैसला नहीं होने की वजह से किसी ने समय रहते पानी में उतरकर इंजीनियर को बचाने का प्रयास तक नहीं किया। 

Noida engineer dies Officials fail to grasp severity of accident district administration and police remain neg
किसी अधिकारी ने पहुंचना जरूरी नहीं समझा
इस लापरवाही से लोगों में पुलिस से लेकर प्रशासन और प्राधिकरण के अफसरों के प्रति रोष है। लोगों का कहना है कि घटना के अगले दिन भी किसी उच्च अधिकारी ने मौके पर पहुंचना जरुरी नहीं समझा, लेकिन जब मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छा गया तो अफसर तीसरे दिन मौके पर पहुंचे।

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