SOS चिल्ड्रन्स विलेज में पली-बढ़ीं बेंगलुरु की जुड़वाँ बहनें बनीं भारत की सांस्कृतिक राजदूत, अपने नृत्य से जीता दिल



नई दिल्ली, 22 जनवरी 2026: 39 वर्षीय अर्चना और चेतना आज भरतनाट्यम की स्थापित नृत्यांगनाएँ हैं और उनका अपना संस्थान नृत्यार्पणम स्कूल ऑफ डांस है। हालांकि, यह यात्रा हमेशा इतनी सहज नहीं रही। भारत के कई नृत्य कलाकारों के लिए जो सपना लगता है, उसकी शुरुआत बेहद साधारण रही और इस मुकाम तक पहुँचने के लिए इन दोनों बहनों को कई त्याग करने पड़े और कठिन रास्तों से गुजरना पड़ा।
बेंगलुरु की जुड़वाँ बहनें अर्चना और चेतना ने मात्र तीन वर्ष की उम्र में अपनी माँ को खो दिया। अचानक दो छोटे बच्चों की परवरिश की बड़ी जिम्मेदारी अकेले उठाने में असमर्थ उनके पिता ने SOS चिल्ड्रन्स विलेजेज इंडिया का सहारा लिया। जल्द ही दोनों बहनों को SOS चिल्ड्रन्स विलेजेज बेंगलुरु में एक सुरक्षित घर मिला, जहाँ वे एक SOS माँ की देखरेख में पली-बढ़ीं। यही देखभाल और पारिवारिक वातावरण आगे चलकर उनके जीवन और करियर की नींव बना।
SOS चिल्ड्रन्स विलेजेज इंडिया के सीईओ सुमंताकर कहते हैं, “कम उम्र से ही SOS चिल्ड्रन्स विलेजेज इंडिया ने उनकी शैक्षणिक क्षमता के साथ-साथ उनकी कला के प्रति रुचि को भी पहचाना। औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ जुड़वाँ बहनों को भरतनाट्यम की कक्षाओं में दाखिला दिलाया गया, जिसने आगे चलकर उनके जीवन का उद्देश्य तय किया। हमने यह सुनिश्चित किया कि अर्चना और चेतना एक सुरक्षित, स्नेहपूर्ण पारिवारिक माहौल में बड़ी हों, जहाँ शिक्षा, मूल्य और भावनात्मक कल्याण को प्राथमिकता दी जाती है।”
SOS इंडिया के निरंतर सहयोग से दोनों बहनों ने इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद कॉर्पोरेट क्षेत्र में करियर की शुरुआत की। हालांकि, बचपन से संजोई गई नृत्य की गहरी लगन ने उन्हें एक साहसिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने कॉर्पोरेट करियर को छोड़कर पेशेवर रूप से भरतनाट्यम को अपनाने का फैसला किया। इस बदलाव के दौरान SOS चिल्ड्रन्स विलेजेज इंडिया ने उनका पूरा समर्थन किया। आगे चलकर अर्चना और चेतना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान पाने वाली सफल भरतनाट्यम कलाकार बनीं।
उनकी उपलब्धियों में भारत की सांस्कृतिक राजदूत के रूप में चयन, वर्ष 2004 में समीक्षकों द्वारा सराहा गया अरंगेत्रम (पहला मंचीय प्रदर्शन), भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के कलाकारों के रूप में पैनल में शामिल होना और कई प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं। इनमें चेन्नई का नाट्य मयूरी पुरस्कार, कर्नाटक का यूएस कृष्णा राव और चंद्रा भगदेवी एंडोमेंट अवॉर्ड, अमेरिका के शिकागो से अक्का अवॉर्ड और रोटरी नचले 2017 शामिल हैं। वे दूरदर्शन की ग्रेडेड कलाकार भी हैं।
अर्चना कहती हैं, “हम नृत्य समुदाय को कुछ लौटाना चाहते थे, जिसने हमें इतना कुछ दिया और हमें वह बनाया जो हम आज हैं। नृत्य के बिना हमारा बचपन अधूरा होता। यही कला थी जिसने हमें पिता से दूर रहने, माँ को खोने और घर छोड़ने के दर्द से उबरने में मदद की। हमें नहीं पता कि अगर हमारे जीवन में नृत्य न होता तो हम कहाँ होते। इसी सोच के साथ हमने नृत्यार्पणम स्कूल ऑफ डांस की शुरुआत की। अगर नृत्य के ज़रिए हम एक भी जीवन को बेहतर बना पाते हैं, तो हमारा प्रयास सफल होगा। हम आज के बच्चों के लिए वही बनना चाहते हैं, जो नृत्य हमारे लिए हमारे बचपन में था।”
चेतना कहती हैं, “हम अपनी SOS माँ के हमेशा आभारी रहेंगे, जिन्होंने हमारे जीवन में नृत्य को जगह दी और हमें इसे आज़माने के लिए प्रेरित किया। जब हम पहली बार SOS बेंगलुरु आए थे, तब हमारे लिए यह समय बेहद कठिन था। जैसे-जैसे हमने नृत्य सीखना शुरू किया, वह हमारे दिन का सबसे खास हिस्सा बन गया और हम हर दिन इसका बेसब्री से इंतज़ार करते थे।”
अपने SOS परिवार में सबसे बड़ी होने के नाते, अर्चना और चेतना ने स्वाभाविक रूप से नेतृत्व की भूमिका निभाई। उन्होंने घर की जिम्मेदारियाँ साझा कीं और अपने SOS भाई-बहनों के साथ गहरे रिश्ते बनाए। देखभाल, जिम्मेदारी और साथ-साथ रहने के यही मूल्य आज भी उनके जीवन का मार्गदर्शन करते हैं।
उनकी यात्रा इस बात का सशक्त प्रमाण है कि परिवार-जैसी देखभाल, समग्र शिक्षा और निरंतर भावनात्मक समर्थन कैसे विपरीत परिस्थितियों को उपलब्धियों में बदल सकता है। अर्चना और चेतना की कहानी यह दर्शाती है कि SOS चिल्ड्रन्स विलेजेज इंडिया बच्चों को सिर्फ जीवित रहने में ही नहीं, बल्कि वास्तव में आगे बढ़ने और सफल होने में सक्षम बनाता है।



