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अफोर्डेबल हाउसिंग की हिस्सेदारी 18% से घटकर 12% होने की आशंका — क्रेडाई भोपाल

अर्बन चैलेंज फंड के तहत भोपाल के लिए विशेष विंडो की ज़रूरत — मनोज मीक

अर्बन चैलेंज फंड के तहत भोपाल के लिए विशेष विंडो की ज़रूरत — मनोज मीक

केंद्रीय बजट 2026 पर CREDAI भोपाल की प्रतिक्रिया

अफोर्डेबल हाउसिंग की हिस्सेदारी 18% से घटकर 12% होने की आशंका — क्रेडाई भोपाल
अर्बन चैलेंज फंड के तहत भोपाल के लिए विशेष विंडो की ज़रूरत — मनोज मीक

क्रेडाई भोपाल केंद्रीय बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के निरंतर फोकस का स्वागत करता है। हाईवे, मेट्रो, लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, रेलवे और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से कनेक्टिविटी बेहतर होगी, नए ग्रोथ कॉरिडोर खुलेंगे और रियल एस्टेट सेक्टर को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। इसका सीधा सकारात्मक असर भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन पर पड़ेगा, जहां आवास, रोजगार और सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है।

हम बजट में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस पर दिए गए जोर की भी सराहना करते हैं। तेज़ अनुमतियाँ, सरल प्रक्रियाएँ और डिजिटलीकरण से प्रोजेक्ट की समय-सीमा और लागत दोनों घटेंगी, जिससे मेट्रोपॉलिटन रीजन में संगठित और नियोजित विकास को गति मिलेगी।

हालांकि क्रेडाई इस बात से गंभीर रूप से निराश है कि बजट में अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। मौजूदा, पुरानी परिभाषा के कारण यह सेगमेंट पहले ही दबाव में है। क्रेडाई के आकलन के अनुसार कुल हाउसिंग सप्लाई में अफोर्डेबल हाउसिंग की हिस्सेदारी 18% से घटकर लगभग 12% तक जा सकती है। इसका सीधा असर भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन में कामगारों, युवा परिवारों और मिडिल क्लास पर पड़ेगा।

क्रेडाई का मानना है कि अफोर्डेबल हाउसिंग कोई वेलफेयर स्कीम नहीं, बल्कि इकोनॉमिक इंफ्रास्ट्रक्चर है। यदि इसकी सप्लाई कमजोर होती है, तो मेट्रोपॉलिटन रीजन में किराये बढ़ेंगे, रोज़ाना का सफर लंबा होगा और अनियोजित बस्तियों का विस्तार होगा।

क्रेडाई भोपाल की अपेक्षा है कि सरकार भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए एक स्पष्ट नीति ढांचा बनाए जिसमें ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर, मेट्रो-आधारित विकास, अफोर्डेबल हाउसिंग और कैपिटल रिडेवलपमेंट को एक साथ जोड़ा जाए ताकि राजधानी क्षेत्र का विकास समावेशी, संतुलित और टिकाऊ बन सके।

राजधानी भोपाल के लिए बजट से अपेक्षाएँ:

क्रेडाई भोपाल की स्पष्ट अपेक्षा है कि बजट स्पीच में घोषित अर्बन चैलेंज फंड को जल्द से जल्द व्यावहारिक रूप दिया जाए। इसके अंतर्गत भोपाल जैसी राजधानी के लिए एक विशेष कैपिटल रिडेवलपमेंट पैकेज की व्यवस्था की जानी चाहिए। राजधानी होने के कारण भोपाल पर प्रशासनिक, संस्थागत और जनसंख्या से जुड़ा दबाव अधिक है, जबकि लंबे समय से यहां का शहरी पुनर्विकास अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका है।

बजट स्पीच में नॉलेज इकोनॉमी, एआई और लॉजिस्टिक्स को भविष्य की ग्रोथ के प्रमुख स्तंभ बताया गया है। इस संदर्भ में राज्य सरकार द्वारा घोषित नॉलेज एंड एआई सिटी को केंद्रीय स्तर पर नीति समर्थन और संसाधनों से जोड़ना आवश्यक है। देश के भौगोलिक केंद्र में स्थित भोपाल को लॉजिस्टिक्स, एआई और नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन से जोड़कर एक रणनीतिक शहरी केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।

विशेष पैकेज की आवश्यकता क्यों:

भोपाल एक शांत और सुव्यवस्थित राजधानी है, लेकिन 1984 की औद्योगिक त्रासदी के बाद यह शहर लंबे समय तक ठहराव और अवसरों की कमी से गुजरा। राजधानी में 1995 के बाद से नये मास्टर प्लान का अभाव दूसरी बड़ी त्रासदी है। बजट स्पीच में जिस “शहर-आधारित ग्रोथ” की बात की गई है, उसके लिए भोपाल को केवल नई परियोजनाओं की नहीं, बल्कि एक समग्र पुनर्निर्माण दृष्टि की आवश्यकता है जिसमें शहरी रिडेवलपमेंट, मजबूत ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर, सार्वजनिक भूमि का बेहतर उपयोग और नगर निकायों की आय बढ़ाने के उपाय शामिल हों।

— मनोज मीक
अध्यक्ष, क्रेडाई भोपाल
फाउंडर, ‘कमाल का भोपाल’ अभियान

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