
शंकराचार्य के मुद्दे पर एक बार फिर से टकराहट हुई है। सीएम योगी ने सदन में कहा था कि कोई भी शंकराचार्य कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा था कि हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता। इस मामले में अखिलेश यादव ने पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा कि सीएम अपने नाम के सामने योगी लिखते हैं उन्हें यह लिखने का अधिकार किसने दिया है।
सीएम ने सदन में शंकराचार्य विवाद पर पहली बार अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कोई मुख्यमंत्री, मंत्री, सपा अध्यक्ष बनकर क्या प्रदेश में घूम सकता है? शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और सम्मानित है। लेकिन हर काम नियम से होता है। सदन भी नियमों और परंपराओं से चलता है। कानून सबके लिए बराबर होता है। हम सभी संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है। विद्वत परिषद द्वारा अधिकृत व्यक्ति ही शंकराचार्य बन सकता है। हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता।
माघ मेला में उस दिन 4.50 करोड़ श्रद्धालु आए थे। कोई कहीं भी जाकर माहौल खराब नहीं कर सकता है। वह माघ मेला के निकास द्वार से जाने का प्रयास कर रहे थे। यह श्रद्धालुओं के जीवन को खतरे में डाल सकता था। वहां भगदड़ मच सकती थी। कोई जिम्मेदार व्यक्ति ऐसा आचरण कैसे कर सकता है। हम मर्यादित लोग हैं। कानून का पालन करना और करवाना जानते हैं।सपा सदस्याें से पूछा कि यदि वह शंकराचार्य थे तो आपने वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज करने के साथ एफआईआर क्यों दर्ज कराई थी। सपा पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि एसआईआर और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के प्रकरण में भी आपने ऐसा ही किया। लोगों को गुमराह करने के बजाय देश के बारे में सोचना शुरू कीजिए।