शहरों की अगली दौड़ ‘एआई-रेडी इंफ्रा’ से तय होगी ‘मप्र एआई–डेटा–कंप्यूट मिशन’ घोषित हो — मनोज मीक


देश में चल रहे इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026 के बीच यह साफ हो गया है कि आने वाले वर्षों में निवेश और नौकरियां उसी जगह तेज़ होंगी जहाँ डेटा, कंप्यूट, एनर्जी और त्वरित अनुमतियों का भरोसेमंद सिस्टम जमीन पर मौजूद हो। समिट के दौरान देश में मेगा-स्केल एआई-डेटा-सेंटर निवेश और साझेदारियों की घोषणाएँ सामने आई हैं रिलायंस-जियो ने अगले वर्षों में एआई-डेटा इन्फ्रा पर बड़ा निवेश संकेत दिया, और ओपनएआई-टीसीएस, गूगल-अड़ानी जैसी पार्टनरशिप से भारत में स्केलेबल एआई इंफ्रा की दिशा दिखी है।
यूनियन बजट 2026–27 में एआई–कंप्यूट पर स्पष्ट केंद्रीय संकेत दिखाई देते हैं। इंडिया एआई मिशन पर ₹1000 करोड़ का प्रावधान। मिशन स्तर पर कुल कमिटमेंट ₹10,300 करोड़। भारतजेन को ₹235 करोड़ का सपोर्ट। कंप्यूट स्केलिंग के लिए मौजूदा 38,000 जीपीयू के आगे 20,000 हाई-एंड जीपीयू जोड़ने की बात; स्टार्टअप, इनोवेटर के लिए सब्सिडाइज़्ड कंप्यूट एक्सेस। क्लाउड और एआई डेटा सेंटर्स को 2047 तक टैक्स-हॉलिडे जैसे संकेत। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स में बढ़ी हुई अलोकेशन डिजिटल इंफ्रा और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को तेज़ करने का संकेत। इसलिए अब मध्यप्रदेश को भी मेट्रोपॉलिटन रीजन में ट्रंक एंड टेक इंफ्रा, ट्रांजिट इंटीग्रेशन के साथ-साथ एक “मप्र एआई–डेटा–कंप्यूट मिशन” घोषित करना चाहिए।
मप्र बजट 2026–27 में नगरीय विकास एवं आवास के लिए लगभग ₹20,088.64 करोड़ का प्रावधान स्वागतयोग्य है क्योंकि शहरों की सेवाएं, कनेक्टिविटी और रियल एस्टेट सप्लाई इसी से गति पकड़ती है। एनर्जी एआई की रीढ़ है, बजट में ऊर्जा विभाग को बड़ा आवंटन प्राप्त है, विभाग ग्रीन-पावर, ग्रिड अपग्रेड, इंडस्ट्रियल फीडर आदि पर फोकस करके डेटा सेंटर, कंप्यूट क्लस्टर से लिंक कर सकता है। एआई-युग में “डिजिटल-गवर्नेंस” कोई सहायक विषय नहीं, बेसिक-इंफ्रा है लेकिन फ़ाइनेंस पोर्टल पर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की अलग “अनुदान मांग” का दस्तावेज़ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं दिखता, यह पारदर्शिता और डिलिवरी दोनों दृष्टि से एक मिसिंग-लिंक है।
‘कमाल का भोपाल’ नागरिक अभियान की आधुनिक समय में स्पष्ट माँग है :
(1) आईटी/डिजिटल-गवर्नेंस की डिमांड-फॉर-ग्रांट्स सार्वजनिक हो और विभाग-वार टाइमलाइन घोषित हो।
(2) घोषित 3700 एकड़ नॉलेज एंड एआई सिटी, भोपाल के लिए कंप्यूट-रेडी रोडमैप पावर, फाइबर, पानी-कूलिंग, और सिंगल-विंडो की तय समय सीमा।
(3) मेट्रोपॉलिटन रीजन में ट्रंक इंफ्रा, ट्रांजिट इंटीग्रेशन और कोर सिटी रीडेवलपमेंट को केपीआई-आधारित डिलिवरी से जोड़ा जाए।
“अब प्रतिस्पर्धा “सिर्फ बजट-आउटले” की नहीं, डिजिटल-डिलिवरी और एआई-रेडी इंफ्रा की है। इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026 के बीच मप्र के लिए अवसर है कि वह टेक-इन्फ्रा को स्टेट ग्रोथ इंजन बनाए। शहरों के साथ-साथ डेटा, कंप्यूट और डिजिटल अप्रूवल सिस्टम मजबूत होंगे तो निवेश और जॉब्स तेज़ होंगे। नॉलेज एंड एआई सिटी भोपाल का कंप्यूट-रेडी प्लान तय समय में आए तो यह ख़ूबसूरत राजधानी इस नई अर्थव्यवस्था का राष्ट्रीय मॉडल बन सकती है”
— मनोज मीक
अध्यक्ष, क्रेडाई भोपाल | फाउंडर, ‘कमाल का भोपाल’ अभियान



