रोते हुए जो बोली हरीश की मां, सुन कलेजा फट जाए: 13 साल से सोते-सोते हो गए बेडसोर, बेटे की तकलीफ देखी नहीं जाती


‘हरीश बचपन में बहुत शरारती था। मैं उसे डांटती तो किसी कोने में जाकर छिप जाता। थोड़ी देर बाद फिर आकर चुपचाप मेरे गले लग जाता। मेरे चेहरे को सहलाने लगता। पहला बच्चा था, इसलिए घर में सबसे ज्यादा लाड़-प्यार उसी को मिला।’ यह कहना है उनकी मां निर्मला देवी काहरीश राणा को दिल्ली एम्स शिफ्ट किए जाने के बाद परिवार भी उनके साथ चला गया है। इससे पहले अमर उजाला से बातचीत में निर्मला देवी ने बेटे की बचपन की यादें साझा कीं। इस दौरान कई बार उनकी आवाज भर्रा गई और आंखों से आंसू छलक पड़े।जिस दिन पैदा हुआ उस दिन पूरा घर झूम उठापढ़ाई में शुरू से था होनहार21 अगस्त 2013 को हमारी दुनिया उजड़ गईसिविल इंजीनियर बनना चाहता था
बेटे की इच्छाओं को याद करते हुए निर्मला देवी ने कहा कि हरीश बहुत हंसमुख स्वभाव का था। हमेशा खुद भी हंसता था और दूसरों को भी हंसाता रहता था। वह सिविल इंजीनियर बनना चाहता था। उन्होंने बताया कि हादसे के अगले महीने ही उसका जन्मदिन था। वह घर आने वाला था, लेकिन ऐसी हालत में लौटा कि फिर कभी जा नहीं सका।अब उसकी तकलीफ देखी नहीं जाती
उन्होंने बताया कि वर्षों से बिस्तर पर लेटे रहने के कारण उसके शरीर पर जगह-जगह बेडसोर (जख्म) हो गए हैं। हम रोज उसकी सफाई करते रहे, लेकिन अब उसकी तकलीफ देखी नहीं जाती। भगवान से यही प्रार्थना है कि उसे इस पीड़ा से मुक्ति मिल जाए। बातचीत के दौरान घर में मौजूद बहन भावना, भाई आशीष और पिता अशोक राणा भी भावुक हो गए और नम आंखों से निर्मला देवी को ढांढस बंधाते रहे।


