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1 लाख करोड़ के अर्बन चैलेंज फंड में भोपाल को अलग विंडो मिले — मनोज मीक

राजधानी भोपाल के लिए केंद्र से रिडेवलपमेंट, एआई और लॉजिस्टिक्स आधारित शहरी विज़न की मांग

क्रेडाई भोपाल ने आज भारत सरकार की हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मिनिस्ट्री की तैयारियों संबंधी ऑनलाइन बैठक में अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के लिए विशेष कैपिटल रिडेवलपमेंट पैकेज की औपचारिक मांग रखी। यह बैठक ऐडिशनल सेक्रेटरी, मोहुआ, श्रीमती डी. थारा की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें क्रेडाई भोपाल की ओर से अध्यक्ष मनोज मीक ने लिखित रूप में विस्तृत सुझाव प्रस्तुत किए।

केंद्र सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये के अर्बन चैलेंज फंड की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की थी। इस फंड के अंतर्गत 25 प्रतिशत तक सेंट्रल असिस्टेंस केवल उन्हीं बैंकेबल प्रोजेक्ट्स को दी जानी है, जो कम-से-कम 50 प्रतिशत परियोजना लागत मार्केट फाइनेंस, जैसे बॉण्ड्स, बैंक लोन और पीपीपी के माध्यम से जुटा सकें। बाद में 14 फ़रवरी 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस फंड को औपचारिक मंजूरी भी दे दी। हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स के आधिकारिक एफएक्यू के अनुसार यह योजना 2025-26 से 2030-31 तक चलेगी और इसका उद्देश्य अगले 5 वर्षों में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के शहरी निवेश को गति देना है।

क्रेडाई भोपाल ने अपने लिखित आग्रह में कहा कि भोपाल जैसी राज्य राजधानी को सामान्य शहरों की श्रेणी में नहीं देखा जा सकता। राजधानी होने के कारण यहाँ प्रशासनिक, संस्थागत और जनसंख्या से जुड़ा दबाव अधिक है, जबकि शहरी पुनर्विकास लंबे समय से अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका है। ऐसे में अर्बन चैलेंज फंड के भीतर राज्य राजधानियों के लिए पृथक कैपिटल रिडेवलपमेंट विंडो या विशेष पैकेज बनाया जाना चाहिए।

हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मिनिस्ट्री की योजना के अनुसार यह फंड चैलेंज-मोड पर लागू होगा और इसके 3 प्रमुख वर्टिकल हैं सिटीज़ ऐज़ ग्रोथ हब्स, क्रिएटिव रिडेवलपमेंट ऑफ सिटीज़ तथा वॉटर एंड सैनिटेशन। योजना में डीपीआर प्रिपरेशन, ट्रांज़ैक्शन एडवाइजरी, फाइनेंशियल मॉडलिंग, प्रोजेक्ट पैकेजिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग जैसे प्रोजेक्ट प्रिपरेशन सपोर्ट का भी प्रावधान है। यही वह अवसर है, जिसके माध्यम से भोपाल जैसी राजधानी को नई परियोजनाओं के साथ व्यापक शहरी पुनर्निर्माण दृष्टि से जोड़ा जा सकता है।

क्रेडाई भोपाल ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्रीय बजट में नॉलेज इकॉनमी, एआई और लॉजिस्टिक्स को भविष्य की वृद्धि के प्रमुख स्तंभों के रूप में रेखांकित किया गया है। इस परिप्रेक्ष्य में राज्य सरकार द्वारा घोषित नॉलेज एंड एआई सिटी को केंद्रीय नीति-समर्थन और संसाधनों से जोड़ा जाना चाहिए। भारत के भौगोलिक केंद्र में स्थित भोपाल को लॉजिस्टिक्स, एआई, नॉलेज इन्फ्रास्ट्रक्चर और नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन जैसे राष्ट्रीय एजेंडा से जोड़कर एक रणनीतिक शहरी केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। बजट में जिस सिटी-बेस्ड ग्रोथ और क्रिएटिव रिडेवलपमेंट की बात कही गई है, भोपाल उसके लिए स्वाभाविक दावेदार है।

क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने कहा:
“हमने मीटिंग में स्पष्ट रूप से आग्रह किया है कि भोपाल को नई परियोजनाओं के साथ-साथ एक समग्र कैपिटल रिडेवलपमेंट विज़न की आवश्यकता है। यह शहर 1984 की औद्योगिक त्रासदी के बाद लंबे समय तक ठहराव से गुजरा है। दूसरी ओर, 1995 के बाद से नए मास्टर प्लान का अभाव भी राजधानी की नियोजित वृद्धि को प्रभावित करता रहा है। इसलिए भोपाल को विशेष पैकेज देना केवल सहायता नहीं, बल्कि ऐतिहासिक संतुलन और राष्ट्रीय शहरी न्याय का प्रश्न है।”
उन्होंने आगे कहा: “अगर देश में शहरों को ग्रोथ हब बनाया जाना है, तो राज्य राजधानियों को सामान्य तरीके से नहीं देखा जा सकता। भोपाल को मजबूत ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर, पब्लिक लैंड के बेहतर उपयोग, अर्बन रिडेवलपमेंट और नगर निकायों की राजस्व क्षमता बढ़ाने वाले उपायों के साथ पुनर्गठित करने की आवश्यकता है। यही अर्बन चैलेंज फंड का वास्तविक उद्देश्य भी होना चाहिए।”
मीक का मानना है कि यदि इंदौर, अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु जैसे शहर अपने-अपने विशेष आर्थिक और शहरी चरित्र के साथ आगे बढ़ सकते हैं, तो भोपाल को भी राजधानी, नॉलेज, एआई, लॉजिस्टिक्स और रिडेवलपमेंट के सम्मिलित मॉडल पर विशेष रूप से विकसित किया जाना चाहिए। अर्बन चैलेंज फंड इस दिशा में एक ऐतिहासिक अवसर है, जिसे भोपाल के हित में प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए।

क्रेडाई भोपाल ने बताया कि इस मांग की जानकारी मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन, आयुक्त नगर निगम भोपाल और मुख्य कार्यपालन अधिकारी, भोपाल विकास प्राधिकरण को भी प्रेषित कर दी गई है, ताकि राज्य स्तर पर भी राजधानी भोपाल के लिए एक समन्वित प्रस्ताव शीघ्र तैयार किया जा सके।

आज की ऑनलाइन बैठक में अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि 15 अप्रैल 2026 को इस विषय पर अगला महत्वपूर्ण कार्यक्रम केंद्रीय शहरी विकास मंत्री की उपस्थिति में आयोजित होगा। क्रेडाई भोपाल ने कहा कि इससे यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार अब इस फंड के क्रियान्वयन ढाँचे को तेजी से आगे बढ़ा रही है, और ऐसे समय में भोपाल के लिए एक सशक्त, सुविचारित और पूँजी-समर्थ प्रस्ताव सामने आना आवश्यक है।

क्रेडाई भोपाल का मानना है कि यदि राज्य की राजधानी भोपाल को विशेष कैपिटल रिडेवलपमेंट पैकेज के साथ नॉलेज, एआई, लॉजिस्टिक्स और शहरी पुनर्विकास के एकीकृत मॉडल पर विकसित किया जाए, तो यह केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को नई दिशा देगा।

 

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