नव दंपतियों को गायत्री परिवार द्वारा बताए गए सदगृहस्थ बनने के सूत्र


भोपाल /12- 4-26. अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा समाज के नवनिर्माण हेतु लिए चलाए जा रहे विश्व व्यापी अभियानों मे से एक आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी आंदोलन के तहत आज गायत्री प्रज्ञापीठ बरखेड़ा में 50 नव विवाहित जोड़ों को गृहस्थ जीवन के वे सूत्र बताए गए जिनसे घर परिवार में खुशहाली, सुख सौहार्द और समाज मे सम्मान प्राप्त होता है. इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ.शिखा गुप्ता ने परिवार में पति-पत्नी में परस्पर प्रेम, सहानुभूति कायम रखने और एक दूसरे का सम्मान करने की बात कही. श्रीमती मधु श्रीवास्तव एवं आशा पाठक ने कहा कि गर्भवती माता के गर्भ मे पल रहे भ्रूण पर गर्भिणी के विचार व्यवहार का प्रभाव पड़ता है वह तीन माह की अवधि से आकार और संस्कार दोनों से प्रभावित होता है अतः समय रहते गर्भिणी का गर्भ संस्कार अवश्य कराया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि विज्ञान भी इस बात की पुष्टि करता है कि आने वाली संतान माता की दिनचर्या, खानपान और मनोभूमि से प्रभावित होता है. डॉक्टर सुनीता गुप्ता ने गृहस्थ को एक आश्रम जैसा बनाने की बात कही जहाँ बच्चों को समय पर शिक्षा और संस्कार दोनों की बात कही. उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार गर्भ संस्कार को बहुत व्यापक रूप से सम्पन्न करा रहा है. कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती सुषमा बालदया ने से कार्यकर्त्ता भाई बहिनों कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु सभी का हार्दिक आभार व्यक्त किया. मंच संचालन श्रीमती रुचि श्रीवास्तव द्वारा किया गया. इस अवसर पर आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी आंदोलन समिति भोपाल की प्रभारी शांति बारपेटे उपस्थिति रहीं. आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी की प्रज्ञापीठ बरखेड़ा की टीम और सक्रिय कार्यकर्त्ता बहनों ने अपनी लगन और निष्ठा से कार्यक्रम को अभूतपूर्व रूप से सफल बनाया. युवा भाईयों की टीम ने अन्य सारी व्यवस्थाऐं जुटाईं और मार्गदर्शन गायत्री परिवार ट्रस्ट बरखेड़ा का प्राप्त हुआ.


