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टेक, टैलेंट और ट्रांसफॉर्मेशन की ओर ‘कमाल’ का कदम: मनोज मीक

भोपाल नॉलेज एंड एआई सिटी के लिए मास्टर प्लान चरण शुरू

भोपाल में प्रस्तावित नॉलेज एंड एआई सिटी की प्रक्रिया अब अगले प्रशासनिक चरण में प्रवेश कर गई है। ‘कमाल का भोपाल’ अभियान के तहत लंबे समय से उठाए गए इस विजन को राज्य ने 13 नवंबर 2025 को औपचारिक गति दी, तथा भोपाल में नॉलेज एंड एआई सिटी विकसित करने की घोषणा की गई। इसके बाद भोपाल विकास प्राधिकरण ने भौंरी, एयरपोर्ट क्षेत्र के पास, लगभग 3700 एकड़ में प्रस्तावित “नॉलेज एंड एआई सिटी” के लिए ईओआई जारी किया, जिसमें शहरी नियोजन, डिज़ाइन, इंफ्रास्ट्रक्चर, अकादमिक संस्थानों और कंसोर्टियम्स से भागीदारी आमंत्रित की गई।

क्रेडाई का कहना है कि ताज़ा जारी ई-निविदा इस बात का संकेत है कि परियोजना की अवधारणा एआई सिटी के मास्टर प्लान निर्माण के ठोस चरण में पहुँच चुकी है। भौंरी स्थित नॉलेज एंड एआई सिटी के लिए मास्टर प्लान तैयार करने हेतु सलाहकार चयन के लिए आरएफपी आमंत्रित किया गया है। इससे यह साफ़ है कि अब परियोजना को विजन से आगे बढ़ाकर योजना, सर्वे, व्यवहार्यता, डीपीआर और क्रियान्वयन संरचना की दिशा में ले जाया जा रहा है।

यह प्रगति ऐसे समय में हो रही है जब देश में समान प्रकृति की टेक-आधारित शहरी परियोजनाओं की दौड़ तेज़ है। कर्नाटक ने बिदादी में एआई-आधारित नई आईटी इंटीग्रेटेड सिटी की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जबकि विशाखापट्टनम में गूगल एआई हब की घोषणा के साथ एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर क्षमता, ऊर्जा और फाइबर नेटवर्क को एकीकृत मॉडल में आगे बढ़ाया जा रहा है। आंध्रप्रदेश की राजधानी अमरावती अब क्वांटम इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है। इसी बीच इंडियाएआई मिशन के तहत 38,000 से अधिक जीपीयू कॉमन कम्प्यूट सुविधा के लिए ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं। इसका सीधा अर्थ है कि अब प्रतिस्पर्धा कम्प्यूट, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, टैलेंट और संस्थागत तैयारी की है।

‘कमाल का भोपाल’ अभियान के फाउंडर मनोज मीक का मानना है कि इस परियोजना को शिक्षा, शोध, स्टार्टअप, एआई, क्वांटम इंफ्रा, जीसीसी, डेटा और गवर्नेंस-टेक के इंटीग्रेटेड मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट मॉडल के रूप में देखना चाहिए। अब अगला फोकस समयबद्ध सलाहकार चयन, ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर पहले, एंकर संस्थानों की पहचान, हरित ऊर्जा, जल सुरक्षा, फाइबर नेटवर्क और मासिक समीक्षा तंत्र पर होना चाहिए। यदि अपेक्षित प्रगति बनी रही तो भोपाल भारत के उभरते नॉलेज-एंड-एआई लैंडस्केप में एक गंभीर और विश्वसनीय केंद्र के रूप में स्थापित हो सकता है।

 

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