एआई के दौर में युवा दबाव को समझना होगा


मनोज मीक, क्रेडाई भोपाल अध्यक्ष
युवा बेचैनी को आज एआई के दौर के दबाव से अलग करके नहीं पढ़ा जा सकता। रोजगार, परीक्षा और महँगाई के साथ अब एक नया डर जुड़ गया है कि क्या शुरुआती नौकरियाँ, कोडिंग, डेटा एंट्री, सपोर्ट, कंटेंट और ज्ञान-आधारित काम एआई से प्रभावित हो जाएंगे? हालिया अंतरराष्ट्रीय सर्वे में जेन ज़ी में एआई को लेकर उत्साह घटने और चिंता बढ़ने के संकेत मिले हैं; गैलप के अनुसार जेन ज़ी में एआई को लेकर चिंता 42% पर बनी हुई है और एआई के प्रति गुस्सा 31% तक बढ़ा है। डेलॉइट इंडिया के 2026 सर्वे में 93% जेन ज़ी और 95% मिलेनियल्स द्वारा रोज़मर्रा के काम में एआई के उपयोग की बात सामने आई है, पर साथ ही आवास, खर्च और करियर फैसलों पर आर्थिक दबाव भी स्पष्ट है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक नया पहलू यह भी है कि यह युवा प्रतिक्रिया डेटा, सोशल मीडिया एल्गोरिदम और एआई-सहायता प्राप्त कंटेंट संस्कृति के दौर में पैदा हुई और बहुत तेजी से फैल गई। अब असंतोष को संगठन, पोस्टर और मंच बनने में महीनों नहीं लगते; एक विचार कुछ घंटों में मीम, वेबसाइट, घोषणापत्र, फॉलोअर नेटवर्क और डिजिटल सदस्यता में बदल सकता है। इसलिए शासन, शहरों, शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत को यह समझना होगा कि एआई युग में युवा दबाव भी तेज, दृश्य और संगठित रूप में सामने आएगा। इसका समाधान समय पर संवाद, कौशल, अवसर और सम्मानजनक भागीदारी है।



