श्रीगंगानगर गैंगरेप केस: होटलों में हैवानियत, चंद पैसे देकर नोंचते रहे बचपन, घिनौने कांड का ऐसे हुआ पर्दाफाश

राजस्थान के सीमावर्ती शहर श्रीगंगानगर में 13 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई घिनौनी हरकत से हर एक व्यक्ति के दिल में आक्रोश है। 13 साल की मासूम, जिसे चंद रुपयों के लालच में देह व्यापार के उस दलदल में धकेल दिया गया, जहां दरिंदगी का हर खेल बेहद शातिराना ढंग से खेला जा रहा था। इस पूरे मामले में पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ी, खाकी के भी होश उड़ गए। रसूखदारों के चेहरों से नकाब उतरे, नामी होटलों पर बुलडोजर चले और आखिरकार इस काले धंधे के तार सात समंदर पार न्यूजीलैंड तक जा पहुंचे।इस खौफनाक खेल की शुरुआत 18 जून के आसपास हुई थी, जब वह मासूम अपने घर से अचानक लापता हो गई। एक रिक्शा चालक ने उसकी लाचारी का फायदा उठाया और उसे बहला-फुसलाकर शहर के एक होटल में ले गया। उसे अंदाजा भी नहीं था कि वहां उसे महज एक वस्तु की तरह दूसरों के हवाले कर दिया जाएगा। इसके बाद शहर के तीन बड़े और नामी होटल सुखाड़िया मार्ग स्थित होटल जॉय इन, बीरबल चौक का होटल ड्रीम इन और मोटर मार्केट का होटल सैफ फायर इन, दरिंदगी के मुख्य ठिकाने बन गए।होटल के मैनेजरों और ठेकेदारों ने इस घिनौने धंधे को चलाने के लिए कानून की आंखों में धूल झोंकने का एक बेहद सुरक्षित रास्ता खोज निकाला था कि वे आम लोगों या अनजान ग्राहकों को इस घिनौने खेल से दूर रखते थे। शिकार के लिए सिर्फ अपने पुराने और ‘भरोसेमंद’ ग्राहकों को चुना जाता था।सोशल मीडिया ग्रुप्स के जरिए मासूम की तस्वीरें इन खास ग्राहकों को भेजी जातीं और वहीं पर सौदेबाजी होती थी। सौदा तय होते ही होटल के कमरों को महज एक-एक घंटे के लिए 1500 से 2500 रुपये के किराए पर दिया जाता और उस बच्ची को उन भेड़ियों के आगे फेंक दिया जाता था। पकड़े जाने के डर से कोई भी ऑनलाइन पेमेंट नहीं ली जाती थी; पूरा खेल सिर्फ नकद यानी कैश के दम पर चल रहा था। यहां तक कि होटल के विजिटर रजिस्टर में भी इन ग्राहकों की कोई एंट्री नहीं की जाती थी, ताकि पुलिस के हाथ कभी कोई डिजिटल या दस्तावेजी सबूत न लग सके।लेकिन पाप का यह घड़ा ज्यादा दिन नहीं टिक सका। 22 जून को सदर थाना पुलिस की एक टीम जब होटलों की रूटीन चेकिंग पर निकली, तो पांच दिनों के कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उस मासूम को इन दरिंदों के चंगुल से मुक्त करा लिया गया। बच्ची ने जब पुलिस के सामने अपने बयान दर्ज कराए तो इस रैकेट की भयावहता सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसपी हरीशंकर ने तुरंत एक विशेष जांच दल का गठन कर दिया। शुरुआती कार्रवाई में पुलिस ने मौके से 6 आरोपियों को दबोचा लेकिन जैसे-जैसे सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, इस काले नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं।
इस घटना के सामने आते ही श्रीगंगानगर की सड़कों पर जन-आक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ा। छात्र संगठनों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों ने इंसाफ की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट और एसपी ऑफिस का घेराव किया। शहर में मौन जुलूस निकाले गए और अवैध रूप से चल रहे इन होटलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठी। जनता के इस भारी गुस्से के बीच जिला प्रशासन ने एक बड़ा नजीर पेश करने वाला कदम उठाया। 1 जुलाई की तड़के सुबह करीब 3 बजे, भारी पुलिस जाब्ते के बीच प्रशासन के पीले पंजे यानी बुलडोजर ने उन होटलों पर धावा बोल दिया, जहां मासूम की चीखें दबाई गई थीं। होटल जॉय इन, ड्रीम इन और सैफ फायर इन के अवैध निर्माणों को आंशिक रूप से ध्वस्त कर जमींदोज कर दिया गया।प्रशासन का बुलडोजर शांत भी नहीं हुआ था कि इस केस में एक ऐसा नया मोड़ आया जिसने सबको चौंका दिया। 8 जुलाई की देर शाम पुलिस ने एक हाई-प्रोफाइल आरोपी को गिरफ्तार किया, जो एक एनआरआई था। 25 साल का यह युवक न्यूजीलैंड में रहता था और वहां की परमानेंट रेसिडेंसी भी हासिल कर चुका था। वह करीब डेढ़ महीने पहले केवल अपनी शादी के लिए भारत आया था। घर में शहनाइयां बजने वाली थीं, 14 जुलाई को उसकी शादी तय थी और पूरा परिवार जश्न की तैयारियों में डूबा था लेकिन महिला अपराध अनुसंधान सेल ने जब होटल जॉय इन की सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की तो 18 से 22 जून के बीच तीन अलग-अलग होटलों में नाबालिग के यौन शोषण में उसकी संलिप्तता के पक्के सबूत मिल गए। शादी के महज छह दिन पहले उसे उसके घर से हथकड़ी लगाकर ले गई।मामला इतना संवेदनशील था कि इसकी गूंज दिल्ली में राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंची, जिसने खुद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एसपी से जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी। समाज में इस कदर गुस्सा था कि श्रीगंगानगर बार एसोसिएशन के वकीलों ने एक स्वर में एलान कर दिया कि इस घिनौने कृत्य के आरोपियों की पैरवी अदालत में कोई भी स्थानीय निजी वकील नहीं करेगा। मामले में बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने अपराधियों के लिए बिना किसी दया और देरी के कड़ी सजा की मांग की। सोनू के अलावा मीरा चोपड़ा और फिल्म मेकर संजय गुप्ता ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।अब तक इस मामले में एनआरआई समेत कुल 20 आरोपी सलाखों के पीछे भेजे जा चुके हैं, जिनकी मजिस्ट्रेट के सामने शिनाख्त परेड कराने की तैयारी चल रही है। हालांकि इस पूरे खेल का एक मुख्य किरदार यानी होटलों का मुख्य ठेकेदार हरदीप सिंह अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है, जिसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। श्रीगंगानगर का यह वाकया इस बात का गवाह है कि जब सिस्टम और समाज एक साथ खड़े हो जाएं, तो रसूख की दीवारें कितनी भी ऊंची क्यों न हों, कानून के शिकंजे से नहीं बच सकतीं।



