महिलाओं की मानसिक शक्ति पुरुषों से ज्यादा मजबूत-” श्री रघुनंदन शर्मा शासकीय सरोजिनी नायडू कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर आयोजित हुआ संभाग स्तरीय एक दिवसीय फैकल्टी सेंसिटाइजेशन कार्यशाला।

शासकीय सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एकदिवसीय संभाग स्तरीय फैकल्टी सैनिटाइजेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में तुलसी मानस प्रतिष्ठान मानस भवन के कार्यकारी अध्यक्ष श्री रघुनंदन शर्मा जी ने की कार्यशाला में भोपाल संभाग के अतिरिक्त संचालक डॉक्टर मथुरा प्रसाद एवं प्राचार्य डॉ सुरेंद्र बिहार गोस्वामी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉक्टर अनीता पूरी सिंह एवं सुश्री मंजरी उपमन्यु उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि श्री रघुनंदन शर्मा ने मां के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा की मां को नियंत्रित करना आसान कार्य नहीं है मन इच्छा क्षण में बदलता है अति चंचल है आंखें पलक झपकते ही वह योजन दूर जा सकता है इसी प्रकार की कल्पना कर सकता है समय में पीछे जा सकता है समय के आगे जा सकता है तो मन को नियंत्रित करना आसान कार्य नहीं है बिना मन को नियंत्रित किया संवेदनशील नहीं बनाया जा सकता अतः श्री शर्मा जी ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को विद्यार्थियों के प्रति अपने मन को संवेदनशील बनाने के लिए नियंत्रण करने की ओर इशारा किया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डॉक्टर मथुरा प्रसाद जी ने मां की स्थिरता को गीता की स्थित प्रज्ञा से तुलना करके बताया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुरेंद्र विहारी गोस्वामी ने मां को ही मनुष्य के बंधन एवं मोक्ष का कारण बताते हुए कहा कि हमें विद्यार्थी के नजरिया से परिस्थितियों को देखना होगा उसके जीवन की विभिन्न परिस्थितियों को समझना होगा तो भविष्य में कितने संघर्ष करेगा वर्तमान में किन-किन समस्याओं से घिरा हुआ है किन बातों को अपने मन में दबे हुए हैं उनको समझे बिना सुने बिना विद्यार्थी की मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर नहीं बनाया जा सकता इसलिए अत्यंत आवश्यक है कि हम विद्यार्थी के प्रति संवेदनशील बने एवं अभिभावक के रूप में अपनी भूमिका निभाते हुए उसकी समस्याओं को समझें।
विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉक्टर अनीता पूरी सिंह ने मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार के ऊपर पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से विद्यार्थी के जीवन में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के बारे में प्रकाश डाला एवं छात्र विद्यार्थी संवाद को किस प्रकार सकारात्मक रूप से बढ़कर विद्यार्थी के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है इसकी विभिन्न तकनीकों के बारे में बताया। Mindfulness, breathing exercise ke madhyam se kis prakar Ham Apne Man Ko niyantran kar sakte hain iska practical bhi madam ne karvaya। द्वितीय सत्र सुश्री मंजरी उपमन्यु ने आज के युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां उसकी पहचान रोकथाम और समाधान के ऊपर फोकस किया। मैडम उपमन्यु ने कहा कि विद्यार्थियों को समझने के लिए सहानुभूति नहीं प्रतिभूति चाहिए। सहानुभूति केवल एक सांत्वना है बल्कि परानुभुती (Empathy) दूसरे के दर्द को ठीक वैसा ही समझना जैसा वह समझ रहा है।
कार्यशाला में भोपाल संभाग के समस्त महाविद्यालय के प्राचार्य और नोडल ऑफिसर ने सहभागिता की। कार्यक्रम में लगभग 200 सहभागीय ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन मनोविज्ञान विभाग के विभाग अध्यक्ष श्री संतोष रलावनिया के द्वारा किया गया।




