चंद्र ग्रहण भारत में अदृश्य, रक्षाबंधन इसके प्रभाव से मुक्त रहेगा – डॉ. विनीत तिवारी
भोपाल। राजा भोज ज्योतिष पीठ के अध्यक्ष डॉ. विनीत तिवारी ने श्रावण पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के अवसर पर लगने वाले चंद्र ग्रहण के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि 28 अगस्त 2026 को होने वाला आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। अतः शास्त्रीय दृष्टि से यहाँ सूतक काल लागू नहीं होगा और रक्षाबंधन का पावन त्योहार ग्रहण के किसी भी प्रभाव से मुक्त रहेगा

डॉ. तिवारी ने बताया कि इस वर्ष श्रावण शुक्ल पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 शुक्रवार को है। इसी दिन आंशिक चंद्र ग्रहण भी घटित होगा। भारतीय मानक समय के अनुसार उपच्छाया चरण सुबह लगभग 6:55 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। आंशिक ग्रहण सुबह 8:04 बजे से 11:21 बजे तक चलेगा तथा अधिकतम प्रभाव सुबह 9:43 बजे होगा। इस दौरान चंद्रमा का लगभग 93 से 96 प्रतिशत भाग पृथ्वी की प्रच्छाया में प्रवेश करेगा।
उन्होंने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि ग्रहण के समय भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए यह घटना भारतीय आकाश में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगी। ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र की सुस्थापित मान्यता “यत्र दृश्यम् तत्र फलम्” के अनुसार, जो ग्रहण किसी स्थान से दिखाई नहीं देता, वहाँ उसका सूतक एवं संबंधित निषेध लागू नहीं होते। अतः भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिर खुले रहेंगे तथा पूजा-पाठ एवं शुभ कार्य निर्बाध रूप से संपन्न किए जा सकेंगे।
रक्षाबंधन के दिन पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे तक रहेगी। भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी। इसलिए सुबह का समय 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बाँधने के लिए शुभ रहेगा। बहनें अपने भाइयों को बिना किसी संकोच के निर्धारित मुहूर्त में राखी बाँध सकती हैं। उदय तिथि के अनुसार पूरा दिन रक्षाबंधन का दिन है, इसलिए पूर्णिमा समाप्त होने के बाद भी राखी बाँधी जा सकती है। सुबह 10:45 तक
अमृत की चौघड़िया में एवं 12:22 से 1:58 तक दोपहर में शुभ चौघड़िया में राखी बंधवाई जा सकती है ।
लेकिन सबसे शुद्ध एवं शास्त्रीय रूप से पूर्णिमा रहते हुए 9:48 बजे तक बाँधना श्रेष्ठ है। इसमें भी विशेष शुभ मुहूर्त लाभ की चौघड़िया में सुबह 7:33 से प्रारंभ होकर 9:9 तक फिर अमृत की चौघड़िया प्रारंभ हो जाएगी जो की पूर्णिमा के 9:48 तक रहेगी यह सर्वश्रेष्ठ बहुत रहेगा।
डॉ. तिवारी ने कहा कि जहाँ ग्रहण दिखाई दे रहा हो, वहाँ स्थानीय नियमों का पालन आवश्यक है, परंतु भारत में कोई बाधा नहीं है। समय की सभी गणनाएं इंडियन स्टैंडर्ड टाइम के अनुसार की गई हैं । उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस पावन अवसर पर पारिवारिक स्नेह, सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा के साथ त्योहार मनाएँ ।



