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रक्षाबंधन से पहले भाई-बहन की मौत: लाचार मां विदेश से नहीं आ सकी पंजाब, वीडियो पर देखा बच्चों का अंतिम संस्कार

बिजली चले जाने से आंगन में सो रहे दो मासूम भाई-बहन के लिए जहरीले सांप का डंक मौत का पैगाम बन गया। गांव बस्सियां की उप्पल पत्ती में मंगलवार रात सांप के डसने से गंभीर रूप से घायल सात वर्षीय जसप्रीत कौर की मौत के करीब 18 घंटे बाद उसके आठ वर्षीय भाई जोबनप्रीत सिंह ने भी बुधवार रात लुधियाना के सीएमसी अस्पताल में दम तोड़ दिया। गुरुवार बाद दोपहर बस्सियां के श्मशानघाट में दोनों भाई-बहन का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पहले दो मासूमों की एक साथ जलती चिताओं का दृश्य देखकर श्मशानघाट में मौजूद हर आंख नम हो गई।

बिजली चले जाने से आंगन में सो रहे दो मासूम भाई-बहन के लिए जहरीले सांप का डंक मौत का पैगाम बन गया। गांव बस्सियां की उप्पल पत्ती में मंगलवार रात सांप के डसने से गंभीर रूप से घायल सात वर्षीय जसप्रीत कौर की मौत के करीब 18 घंटे बाद उसके आठ वर्षीय भाई जोबनप्रीत सिंह ने भी बुधवार रात लुधियाना के सीएमसी अस्पताल में दम तोड़ दिया।

गुरुवार बाद दोपहर बस्सियां के श्मशानघाट में दोनों भाई-बहन का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पहले दो मासूमों की एक साथ जलती चिताओं का दृश्य देखकर श्मशानघाट में मौजूद हर आंख नम हो गई
18 घंटे बाद भाई ने भी तोड़ा दम
बेटी की मौत के सदमे से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि करीब 18 घंटे बाद जोबनप्रीत की हालत भी बिगड़ गई। लुधियाना के सीएमसी अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके साथ ही परिवार की दोनों उम्मीदें एक ही दिन में खत्म हो गईं। बुधवार रात बच्चे की मौत की खबर गांव पहुंचते ही बस्सियां में मातम पसर गया।

ओमान में थी मां, बर्तन मांजते हुए देखा अंतिम संस्कार
इस दर्दनाक हादसे का सबसे कलेजा चीर देने वाला पहलू बच्चों की मां सरबजीत कौर से जुड़ा है। परिजनों के अनुसार, वह पिछले करीब डेढ़ साल से ओमान में एक शेख परिवार के घर नौकरानी के तौर पर काम कर रही है। बच्चों की मौत की खबर मिलने के बाद सरबजीत कौर ने शेख परिवार से बार-बार गुहार लगाई कि उसे अपने बच्चों के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत जाने दिया जाए, लेकिन आरोप है कि उसे छुट्टी नहीं दी गई और उसका पासपोर्ट देने से साफ इंकार कर दिया गया।

परिवार का आरोप है कि सरबजीत कौर को शेख परिवार द्वारा भागने की सूरत में पुलिस के हवाले कर जेल भिजवाने और पिछले तीन महीने की मजदूरी भी नहीं देने की धमकी दी गई । मजबूर मां सरबजीत कौर अपने जिगर के टुकड़ों के अंतिम दर्शन तक नहीं कर सकी। गुरुवार को जब बस्सियां के श्मशानघाट में दोनों बच्चों की चिताएं सजाई जा रही थीं, तब सरबजीत कौर ओमान से वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार देख रही थी। मोबाइल स्क्रीन पर मां एक ओर अपने बच्चों को आखिरी विदाई देती दिखाई दे रही थी, तो दूसरी ओर वह उसी समय शेख के घर में बर्तन मांज रही थी। बर्तन मांजते हुए उसके रोने, चीखने और चिल्लाने की आवाजें सुनकर वीडियो कॉल पर जुड़े परिजनों और श्मशानघाट में मौजूद लोगों के दिल दहल उठे।

Brother and sister die of snakebite in Punjab
बच्चों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते गांव के लोग – फोटो : संवाद
बच्चों की चिताओं के सामने गिरा पिता
पिता अमनदीप सिंह का रो-रोकर बुरा हाल था। दोनों बच्चों की अर्थियां सामने थीं और वह खुद को संभाल नहीं पा रहा था। अंतिम संस्कार के दौरान वह कई बार बेसुध होकर गिर पड़ा। कभी बच्चों की ओर देखता तो कभी आसमान की तरफ हाथ उठाकर फूट-फूटकर रोने लगता। पिता की हालत देखकर श्मशानघाट में मौजूद ग्रामीण भी अपने आंसू नहीं रोक पाए।

परिवार ने लगाया गंभीर आरोप
जोबनप्रीत की मौत के बाद परिवार और ग्रामीणों ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि बुधवार को रायकोट से जोबनप्रीत को लुधियाना ले जा रही सरकारी एंबुलेंस बेहद धीमी गति से चली। परिवार के मुताबिक, करीब 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से एंबुलेंस चलने के कारण बच्चे को लुधियाना पहुंचने और उपचार मिलने में देरी हुई।

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