बाबूजी की स्मृतियों में भावुक हुआ विदिशा, श्रद्धांजलि सभा में छलकीं आत्मीय यादें
महाराणा प्रताप कॉलेज में जुटे साहित्यकार, कवि, सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग; वक्ताओं ने श्री जगदीश मित्तल परमार्थी जी के व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्रसेवा को किया नमन

विदिशा। महाराणा प्रताप कॉलेज, विदिशा में राष्ट्रीय कवि संगम के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा संघ के वरिष्ठ प्रचारक रहे श्रद्धेय श्री जगदीश मित्तल परमार्थी जी की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। राष्ट्रीय कवि संगम के संरक्षक लायन अरुण कुमार सोनी ने बताया कि अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा में समर्पित करने वाले बाबूजी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए साहित्य, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभा में वक्ताओं ने उनके साथ बिताए संस्मरण साझा किए और उनके सरल, सहज, आत्मीय, स्नेही, फक्कड़ एवं सेवाभावी व्यक्तित्व को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
अपने सहज और आत्मीय व्यक्तित्व के कारण श्री जगदीश मित्तल परमार्थी जी कवि समुदाय के बीच स्नेहपूर्वक ‘बाबूजी’ के नाम से लोकप्रिय थे। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने कहा कि बाबूजी का जीवन राष्ट्र, समाज और साहित्य के प्रति समर्पण की ऐसी यात्रा रहा, जिसकी स्मृतियां सदैव लोगों के बीच जीवित रहेंगी।
श्रद्धांजलि सभा में राष्ट्रीय कवि संगम के प्रांत संरक्षक जे.एस. चौहान जी ने बाबूजी के साहित्यिक योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि बाबूजी स्वयं कवि नहीं थे, लेकिन उन्होंने 5,000 से अधिक कवियों को गढ़ने, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का महान कार्य किया।
इसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोज कटारे जी ने बाबूजी के स्वयंसेवक जीवन और तपस्वी जीवन को याद किया। भाजपा जिला उपाध्यक्ष संदीप सिंह डोंगर जी ने उनके साथ बिताए अपने संस्मरण साझा किए। वहीं नगर पालिका प्रतिनिधि राकेश शर्मा जी ने बाबूजी के स्वयंसेवक जीवन और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके समर्पण को स्मरण किया।
वरिष्ठ कवि संतोष सागर जी ने राष्ट्रीय कवि संगम के पुराने दिनों तथा संगठन के कार्यों में बाबूजी के योगदान को याद किया। भाजपा युवा नेता नागेंद्र लोधी जी ने बाबूजी की सरलता और सहजता से भरे व्यक्तित्व को रेखांकित किया। वहीं कॉलेज के संचालक यशवंत प्रताप जी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबूजी ने अपने जीवन में राष्ट्र तथा समाज के प्रति समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया।
करणी सेना के प्रदेश मंत्री रणवीर सिंह जी ने कवियों के प्रति बाबूजी के लगाव और स्नेह को स्मरण किया, जबकि करणी सेना जिला अध्यक्ष दातार सिंह जी ने उनके राष्ट्रप्रेम को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
लायंस क्लब अध्यक्ष अरुण सोनी जी ने जगाधरी के जगदीश से दिल्ली तक बाबूजी की जीवन-यात्रा से जुड़े विभिन्न प्रसंगों और उनकी यात्रा को स्मरण करते हुए उनके व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला।
सुरेंद्र श्रीवास्तव जी ने भावुक शब्दों में कहा, “जिस व्यक्ति को इतने लोग याद करते हैं, वह कभी मर नहीं सकता। उनका चरित्र हमेशा जीवित रहेगा और वे सदैव हम सभी के बीच रहेंगे।”
वहीं सुमन दीदी ने भावपूर्ण विचार रखते हुए आत्मा और परमात्मा के संबंध को समझाया और बाबूजी को श्रद्धापूर्वक नमन किया। साहित्यकार दिनेश श्रीवास्तव जी ने भी बाबूजी के व्यक्तित्व तथा उनके साहित्यिक-सामाजिक योगदान को स्मरण किया। रामपाल यादव जी ने अपने स्नेहपूर्ण शब्दों में बाबूजी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
राष्ट्रीय कवि संगम के प्रांत मंत्री सत्येंद्र सत्यज जी ने बाबूजी से जुड़े अपने संस्मरण साझा किए। जिला महामंत्री प्रियम आर्य जी ने उनके कृतित्व और व्यक्तित्व को याद करते हुए भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की। जिला मीडिया प्रभारी अनुज भार्गव जी ने उनके स्नेही और आत्मीय व्यक्तित्व को स्मरण किया। वहीं जिला उपाध्यक्ष सौरभ यादव जी ने बाबूजी के राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद करते हुए उन्हें नमन किया।
सभा में संगठन से जुड़े अजय, राहुल, दीपक रघुवंशी, अमन दांगी, दर्शन दिवाकर, मनन पांथी, अनिकेत बाथरी, सौरभ सोलंकी, अभिनव सोनी और आयुष कुशवाह सहित अन्य कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। उपस्थितजनों ने बाबूजी से जुड़े अपने-अपने किस्से, अनुभव और संस्मरण साझा किए। उनकी आत्मीयता, स्नेह और सहज व्यवहार को याद करते हुए अनेक लोग भावुक नजर आए।
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय कवि संगम के पूर्व प्रांत अध्यक्ष आशीष दुबे ने किया। अंत में जिलाध्यक्ष सुमित सिंह ने उपस्थित सभी साहित्यकारों, कवियों, संगठन के पदाधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों का आभार व्यक्त किया।
श्रद्धांजलि सभा में उमड़ी भावनाओं ने यह स्पष्ट किया कि बाबूजी की स्मृतियां केवल उनके निकट रहे लोगों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साहित्य और समाज के अनेक लोगों के जीवन से जुड़ी हुई हैं। उनका सेवाभाव, राष्ट्र के प्रति समर्पण, कवियों के प्रति स्नेह और आत्मीय व्यवहार लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा।






