खबरमध्य प्रदेश

बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र का “बाल साहित्य संवाद~ 3” संपन्न।

देश में व्याप्त विषमताओं को देखते हुए बाल साहित्यकार जो भी लिखें, उसमें देशभक्ति के भाव अवश्य हों।

भोपाल 30 सितंबर। आज बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र के सभागार में केंद्र निदेशक श्री महेश सक्सेना के संयोजन में, कार्यक्रम साक्षात्कार श्रृंखला “बाल साहित्य संवाद~3” का आयोजन किया गया। श्रृंखला की तृतीय कड़ी के रूप में वरिष्ठ बाल साहित्यकार श्रीमती श्यामा गुप्ता दर्शना का साक्षात्कार वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी द्वारा लिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री महेश सक्सेना जी के स्वागत भाषण से हुआ। कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए श्री सक्सेना ने बताया कि इसमें प्रतिमाह किसी एक बाल साहित्यकार से पैंतीस मिनट का साक्षात्कार होता है एवं अगले पैंतीस मिनट में उनकी श्रेष्ठ रचनाओं का पाठ होता है, शेष बीस मिनट में उपस्थित बाल साहित्यकारों के प्रश्नों के उत्तर दिए जाए हैं।
ज्ञातव्य हो को वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती श्यामा गुप्ता की बाल साहित्य की कुल 12 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनमें उनको बाल साहित्य हेतु कई पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं।
जब साक्षात्कारकर्ता श्री गोकुल सोनी ने श्रीमती गुप्ता से पूछा कि किस घटना ने आपको बाल साहित्य लिखने हेतु प्रेरित किया तब उन्होंने बताया कि से पूछा कि वे बाल साहित्य कब से लिख रही हैं एवं लेखन हेतु वे अपना प्रेरणा स्रोत किसे मानती हैं तब श्रीमती बसंत ने बताया कि वे 12 वर्षों से लिख रही हैं एवं वे अपना प्रेरणा स्रोत चंपक, नंदन और बालवीर जैसी पत्रिकाओं को मानती हैं।
श्री सोनी ने बाल साहित्य से संबद्ध अनेकों प्रश्न पूछे जिनका श्रीमती गुप्ता ने बड़ी बेवाकी से अनेकों उदाहरणों के साथ रोचक एवं ज्ञानवर्धक शैली में उत्तर दिए। कुछ प्रश्न सदन में उपस्थित साहित्यकारों से रंजना शर्मा, संगीता भारद्वाज, सुनील चतुर्वेदी, अशोक धमनियां, के द्वारा भी पूछे गए जिसका समुचित उत्तर श्रीमती गुप्ता ने दिया। उन्होंने अपना बाल नाटक सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग एवं मीडिया, वागर्थ, शब्द शक्ति अंतरा, तरंग तथा यू ट्यूब के माध्यम से प्रचार व्यवस्था सुप्रसिद्ध गीतकार मनोज जैन मधुर, हेमराज कुर्मी एवं सुनील चतुर्वेदी, ने संभाली।
श्री गोकुल सोनी ने कहा कि देशप्रेम का बच्चों में बीजारोपण बल साहित्य से ही हो सकता है। कार्यक्रम में डॉ रामबल्लभ आचार्य, सुनील चतुर्वेदी, अशोक धमेंनियां, संगीता भारद्वाज, जयंत भारद्वाज, कुमकुम गुप्ता, मालती बसंत, रंजना शर्मा, एवं अन्य साहित्यकारों ने भी बालगीतों का पाठ किया।

महेश सक्सेना
निदेशक,
बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र, भोपाल

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